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डायपर के कारण शिशु को हो गए हैं रैशेज तो करें यह उपाय, साफ रहेगी त्वचा

परवरिश के तरीके By मिताली जैन , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Sep 17, 2019
डायपर के कारण शिशु को हो गए हैं रैशेज तो करें यह उपाय, साफ रहेगी त्वचा

छोटे बच्चों में डायपर रैश होना एक आम समस्या है। डायपर रैश होने पर बच्चे के गुप्तांगों और कूल्हों पर लाल चकते दिखाई देते हैं। यूं तो इनका इलाज घर पर ही किया जा सकता है, लेकिन अगर शुरूआत में इस ओर ध्यान न दिया जाए तो समस्या कई गुना बढ़ सकती है।

छोटे शिशुओं की त्वचा बहुत ही नाजुक और संवेदनशील होती है और इसलिए उनका काफी ध्यान रखने के बाद भी शिशु को डायपर रैश होने की संभावना रहती है। वैसे तो यह डायपर पहनने वाले शिशुओं में होने वाली आम समस्या है, लेकिन इसके कारण बच्चों को काफी परेशानी होती है। इसके कारण बच्चों को जलन व असहज महसूस होता है। डायपर रैश यानी डायपर लगाने से पड़ने वाले चकत्ते, गीले या समय पर बदले न जाने वाले डायपर से, दस्त, नए तरह के खाने और एंटीबायोटिक्स के कारण हो सकते हैं। अधिकतर मामलों में डायपर रैश होने पर इसे घर पर ही ठीक किया जा सकता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-

कारण

  • बच्चों में डायपर रैश कई कारणों से होता है। इसमें सबसे मुख्य है डायपर और त्वचा में स्थित नमी से बैक्टीरिया का उत्पन्न होना। अन्य कारण हैं-
  • लंबे समय तक गीले और गंदे डायपर पहनना।
  • डायपर के आसपास गीलापन।
  • दस्त होने पर।
  • टाइट डायपर होने पर बच्चे की त्वचा का डायपर से रगड़ खाना।
  • खानपान में बदलाव।
  • एंटीबायोटिक्स का सेवन।
  • त्वचा का अत्यधिक संवेदनशील होना।
  • शिशु को एक्जिमा या अटोपिक डर्मेटाइटिस।

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डायपर रैश के लक्षण-

  • शिशु के गुप्तांग और कूल्हों पर लाल चकत्ते
  • ध्यान न देने पर यह लाल चकते फुंसियों में भी बदल जाते हैं।
  • लड़कों में लिंग या लड़कियों में वेजाइना व जांघों के उपर के हिस्से का लाल हो जाना
  • गंभीर स्थिति में, प्रभावित हिस्से में सूजन हो सकती है।
  • पेशाब करते समय जलन या दर्द का अनुभव

उपचार

  • अधिकतर मामलों में डायपर रैश होने पर डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं होती। आप कुछ बातों का ध्यान रखकर व कुछ घरेलू उपायों की मदद से इसे ठीक कर सकते हैं-
  • बच्चे के डायपर को समय पर बदलें। डायपर रैश का एक मुख्य कारण गीला व गंदा डायपर होता है।
  • हमेशा डायपर बदलने से पहले और बाद में हाथों को धोना न भूलें। इससे बच्चे में और अधिक बैक्टीरिया संचारित नहीं होंगे। साथ ही डायपर बदलने से पहले बच्चे को हल्के गुनगुने पानी से गीले वाइप्स या कपडे़ की मदद से क्लीन करें। कभी भी बच्चे की स्किन को रगड़ें नहीं। इससे उसे जलन व दर्द हो सकता है।
  • बच्चे के निचले हिस्से को अधिक से अधिक सूखा रखने का प्रयास करें। इसलिए जब संभव हो तो उसे बिना डायपर के ही रखें। 
  • बहुत अधिक टाइट डायपर न पहनाएं। हल्का ढीला डायपर होने से उसके नितम्बों में हवा लगती रहेगी और डायपर रैश जल्दी ठीक होंगे। हालांकि वह बहुत अधिक ढीला भी नहीं होना चाहिए। 
  • अगर बच्चे को बार-बार डायपर रैश हो जाते हैं तो आप किसी दूसरे ब्रांड के या सेंसेटिव स्किन के लिए डिजाइन किए गए डायपर का इस्तेमाल करके देखें।
  • अगर आप कपड़े के डायपर का इस्तेमाल करते हैं तो उसके डायपर को अलग से हल्के डिटर्जेंट से धोएं और उसे समय-समय पर बदलें। मल त्याग के बाद इस डायपर को तुरंत बदलने की आवश्यकता होती है। 
  • डायपर रैश को जल्दी ठीक करने व उससे होने वाले दर्द को कम करने के लिए आप डायपर रैश क्रीम का इस्तेमाल कर सकते हैं। 
  • घरेलू उपचार में नारियल का तेल भी काफी प्रभावशाली होता है। आप डायपर एरिया में नारियल तेल को दिन में कई बार इस्तेमाल कर सकते हैं।

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डॉक्टर की मदद

  • अगर शिशु की सही तरह से देख-रेख की जाए तो डॉक्टर के पास जाने की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन अगर आपको डायपर रैश के साथ-साथ कुछ अन्य लक्षण दिखाई दें तो बाल रोग विशेषज्ञ को जरूर दिखाना चाहिए-
  • मवाद की वजह से फुंसियों का पीला पड़ना।
  • रैश के साथ-साथ शिशु को बुखार आना
  • रैश के आस पास पिम्पल या ब्लिस्टर होना
  • घरेलू उपचार के बावजूद भी चकतों का उभरना।

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