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कन्जेनिटल इंसेसिटिविटी रोग में हड्डी टूटने पर भी नहीं होता दर्द, फिर भी ये रोग है खतरनाक

अन्य़ बीमारियां By मिताली जैन , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 01, 2019
कन्जेनिटल इंसेसिटिविटी रोग में हड्डी टूटने पर भी नहीं होता दर्द, फिर भी ये रोग है खतरनाक

हर व्यक्ति चाहता है कि जब उसे चोट लगे तो दर्द न हो या फिर बेहद कम दर्द हो। लेकिन दुनिया में ऐसे भी लोग हैं, जिन्हें किसी भी तरह के दर्द का अहसास नहीं होता। दरअसल, यह एक बीमारी है, जिसमें यदि पीड़ित व्यक्ति का ध्यान न रखा जाए तो उसे काफी नुकसान भी ह

आपने अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि मर्द को दर्द नहीं होता। फिल्मों में भी इस डॉयलॉग का इस्तेमाल किया जाता है और महिलाएं भी ऐसे पुरूषों के प्रति आकर्षक होती हैं, जो अधिक मजबूत हों। लेकिन क्या आप इस बात से वाकिफ हैं कि वास्तव में ऐसी एक बीमारी भी होती है, जिसे कन्जेनिटल इंसेसिटिविटी ऑफ पेन अर्थात सीआईपी कहा जाता है। यह बीमारी जन्मजात होती है और जो व्यक्ति इस बीमारी से पीड़ित होता है, उसे बिल्कुल भी दर्द का अहसास नहीं होता। अगर आप सोच रहे हैं कि यह तो कुदरत का आशीर्वाद है तो आप गलत हैं। इस बीमारी के चलते व्यक्ति की जान पर भी बन आती है।

 

क्या है यह समस्या

सरोज सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन और मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. एस के मुंद्रा कहते हैं कि यह एक जीन्स आधारित बीमारी है, इसलिए यह जन्मजात होती है। जिन लोगों को सीआईपी नामक यह बीमारी होती है, उन्हें किसी भी तरह की चोट लगने, कटने, जलने या परेशानी होने पर दर्द का अहसास नहीं होता। डॉ. मुंद्रा कहते हैं कि एक बेहद असाधारण बीमारी है और अभी तक पूरी दुनिया में ऐसे रोगियों की संख्या 200 से अधिक नहीं है। डॉ. मुंद्रा के अनुसार, कुछ लोग इस बीमारी को मानसिक परेशानी समझ लेते हैं, लेकिन यह बीमारी मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्तियों से अलग होती है।

जहां सीआईपी पीड़ित व्यक्ति के शरीर में दर्द का अहसास कराने वाली तंत्रिकाएं ही नहीं होतीं, वहीं जो लोग मानसिक रूप से पीड़ित होते हैं, उनमें दर्द का अहसास कराने वाली तंत्रिकाएं तो होती हैं, लेकिन मेंटल डिसऑर्डर के कारण चोट लगने पर उनका मस्तिष्क शरीर को दर्द होने के सिग्नल नहीं भेज पाता, जिससे मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्ति को दर्द नहीं होता या फिर वह दर्द होने पर उसे सही तरह से बयां नहीं कर पाते। 

समझें लक्षण 

इस बीमारी का सबसे बड़ा लक्षण यह है कि इसमें व्यक्ति को किसी भी तरह के दर्द या परेशानी का अहसास नहीं होता। लेकिन इसके अतिरिक्त भी सीआईपी से पीड़ित व्यक्ति में कुछ लक्षण देखे जाते हैं। मसलन, कुछ लोगों में पसीने वाली ग्रंथि भी नहीं होती, जिससे उन्हें कभी पसीना नहीं आता। जिसके कारण उनका शरीर काफी गर्म रहता है। वहीं कुछ लोगों की चीजों को चखकर उसके स्वाद का पता लगाने वाली ग्रंथि का अभाव होता है। ऐसे व्यक्ति चाहे कुछ भी खाएं, उन्हें उसके स्वाद का पता नहीं चलता। 

ऐसे करें पहचान

डॉ. मुंद्रा कहते हैं कि भले ही एक जन्मजात बीमारी हो लेकिन जन्म के समय इस बीमारी का पता लगा पाना काफी संभव नहीं है। लेकिन जब बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता है और उसे किसी भी प्रकार का दर्द नहीं होता तो अभिभावक डॉक्टर से संपर्क करते हैं और उसके बाद कुछ जीन्स आधारित परीक्षण करने के पश्चात इस बीमारी की पहचान की जा सकती है। 

हो सकती है बेहद घातक

सीआईपी एक ऐसी बीमारी है, जिसे भले ही आप हल्के में लें लेकिन वास्तव में यह व्यक्ति के लिए बेहद घातक हो सकती है। दरअसल, जब व्यक्ति गिरता है या चोट लगती है तो उसे दर्द का अहसास होता है। लेकिन जब व्यक्ति को दर्द ही नहीं होता तो चोट लगने पर उसे पता ही नहीं चलता। कई बार उसे देर से पता चलता है और तब तक उसे काफी नुकसान पहुंच चुका होता है।

डॉ. मुंद्रा कहते हैं कि इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की जिन्दगी काफी कम होती है और ऐसा उनकी बीमारी के कारण नहीं होता। बल्कि वह बार-बार गिरते हैं या उन्हें चोट लगती रहती है। वह चाहे गरमागरम चाय पिएं या उनकी हड्डी टूट जाए, उन्हें जलन व दर्द का अहसास ही नहीं होता। कई बार तो उन्हें इंटरनल इंजरी भी हो जाती है, लेकिन दर्द का अहसास न होने पर वह चोट जानलेवा भी हो जाती है। इस प्रकार अगर कहा जाए तो दर्द का अहसास न होने की बीमारी अन्य कई तरह की समस्याओं को जन्म देती है।

बाहरी चोटों के अलावा ऐसे व्यक्तियों को कई बीमारियां अपनी चपेट में ले लेती हैं। दरअसल, बहुत सी बीमारियों में दर्द का अहसास ही एक प्रारंभिक लक्षण के रूप में सामने आता है जैसे नर्व डैमेज होने, हड्डी या कमर में परेशानी का सबसे पहला लक्षण दर्द ही है। लेकिन जब व्यक्ति को दर्द का पता नहीं चलता तो उनके भीतर ही भीतर ही वह बीमारी बढ़ती रहती है। जब तक उस बीमारी के शारीरिक लक्षण उभरकर सामने आते हैं, तब तक उन पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है।

रखें पूरा ख्याल

यह बीमारी बेहद अजीब व गैरमामूली है और अभी तक इस बीमारी के उपचार के लिए किसी भी तरह की दवाई का विकास नहीं किया गया है। ऐसे में रोगी का अधिक से अधिक ध्यान रखना ही इसका एक उपचार है। अगर कोई व्यक्ति इस बीमारी से पीड़ित है तो उसकी पूरी तरह से केयर करना और उस पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी है। दरअसल, ऐसे व्यक्ति को दर्द का अहसास नहीं होता, इसलिए अगर उसका सही तरह से ध्यान न रखा जाए तो वह खुद को बेहद गंभीर रूप से घायल कर सकते हैं।

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