मेनोपॉज के बाद होने वाली इन 6 आम समस्याओं से ऐसे निपटें, बता रही हैं एक्सपर्ट

Updated at: Nov 27, 2020
मेनोपॉज के बाद होने वाली इन 6 आम समस्याओं से ऐसे निपटें, बता रही हैं एक्सपर्ट

एक्सपर्ट से जानें मेनोपोज की पूरी प्रक्रिया के बारे में। साथ ही जानें की महिलाओं को किन शारिरीक बदलावों से गुजरना पड़ता है।

Garima Garg
अन्य़ बीमारियांWritten by: Garima GargPublished at: Nov 27, 2020

मेनोपॉज के बाद शरीर मैं हार्मोनल बदलाव होते हैं। ऐसे में महिलाओं को शारीरिक व मानसिक समस्याओं से जूझना पड़ता है। अगर शुरुआत से ही सतर्कता बरती जाए तो महिलाएं स्वस्थ व सक्रिय जीवन व्यतीत कर पाएंगी। अगर स्त्री के जीवन पर प्रकाश डाला जाए तो पीरियड्स की शुरुआत, गर्भावस्था और मेनोपॉज यह तीनों अवस्थाएं स्त्री के जीवन को बेहद प्रभावित करती हैं। मेनोपॉज के बाद स्त्रियों को मासिक चक्र की प्रक्रिया से आजादी मिल जाती है। पर इसके बाद होने वाले बदलावों को भी स्त्रियां आसानी से स्वीकार नहीं कर पाती हैं।

एक्सपर्ट भारतीय स्त्रियों की जीवन शैली और जलवायु के अनुसार मेनोपोज की औसत आयु करीब 50 से 54 वर्ष मानते हैं। हालांकि तनावग्रस्त माहौल के कारण बड़े बड़े नगरों में रहने वाली स्त्रियां अर्ली मेनोपॉज का सामना भी कर रही हैं। ऐसे में स्त्रियों को 45 वर्ष से पहले ही मासिक चक्र बंद होने के लक्षण नजर आते हैं इसीलिए यह स्त्रियां कई स्त्री रोग से ग्रस्त हो जाती है।

आखिर क्या है मेनोपोज की ये प्रक्रिया? मेनोपोज के बाद कौन सी परेशानियों का सामना महिलाओं को पढ़ना पड़ता है? इन सवालों के जवाब आपको आगे दिए जा रहे हैं।

MENOPAUSE

मेनोपॉज की प्रक्रिया क्या है?

एक उम्र के बाद हर महिला के शरीर में ओवरी की कार्य क्षमता कमजोर हो जाती है। इसके अलावा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन की सक्रियता भी कम होने लगती है। यही कारण होता है कि महिलाओं के मासिक चक्र की अवधि कम होने लगती है और बिल्डिंग कम होती है। हालांकि कुछ स्त्रियों को हैवी ब्लीडिंग की समस्या भी हो जाती है। अनियमित होकर पीरियड्स एकदम बंद हो जाते हैं। अगर किसी महिला को 1 साल तक मासिक चक्र ना हो तो ये इस बात का संकेत है कि उसे मेनोपॉज हो चुका है। ध्यान दें कि असंतुलित हॉर्मोन के कारण मेनोपॉज के बाद स्त्रियों में शारीरिक में मानसिक बदलाव देखे गए हैं जानते हैं इनके बारे में-

यूटीआई की समस्या

मेनोपॉज के बाद स्त्रियों की यूरिनरी ट्रैक में स्थिरता आती है, जिसके कारण उन्हें यूटीआई और यूरिन प्रेशर पर नियंत्रण ना होना आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्हें खांसते वक्त भी यूरिन डिस्चार्ज महसूस होता है।

क्या करें-

एक्सपर्ट स्त्रियों को यूटीआई से बचाव के लिए पर्सनल हाइजीन की विशेष देखभाल करने के लिए कहते हैं। इसके लिए वह अच्छी कंपनी के इंटिमेट वॉश इस्तेमाल करने की सलाह दी देते हैं। पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल फ्लैश करने के बाद ही करें। इसके अलावा पानी की मात्रा को बढ़ा दें। यूरीन प्रेशर कंट्रोल रखने के लिए विशेषज्ञ बटरफ्लाई एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं। 

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अर्थराइटिस की समस्या

जैसे कि हमने पहले भी बताया मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन में कमी आ जाती है, जिससे स्त्रियों की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। यही कारण होता है कि स्त्रियों में घुटने और कमर में दर्द की समस्या देखने को मिलती है। 

क्या करें

डाइट में कुछ बदलाव करने की सलाह देते हैं। वह दही, पनीर, लो फैट मिल्क भरपूर मात्रा में लेने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि इस उम्र में मांसपेशियों की मजबूती जरूरी है जिसके लिए प्रोटीन युक्त आहार लेना सही विकल्प है। ऐसे में दाल, स्प्राउट्स, सोयाबीन आदि को अपनी डाइट में जोड़ें। 

अगर आप नॉनवेजिटेरियन हैं तो अपनी डाइट में चिकन और अंडे की सफेदी का सेवन शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है। स्त्रियां अंडे के पीले भाग का सेवन ज्यादा ना करें क्योंकि इससे बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है। इसके अलावा अपनी दिनचर्या में नियमित एक्सरसाइज मॉर्निंग वॉक को शामिल करें। 

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सौंदर्य की समस्याएं

मेनोपॉज के बाद काफी हद तक स्त्रियों की त्वचा भी प्रभावित होती है क्योंकि एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन कम होने लगते हैं ऐसे में त्वचा पतली और रूखी नजर आती है। साथ ही हाथ पैरों पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं। इसके अलावा स्त्रियों को बाल झड़ने की समस्या और चेहरे पर अवांछित बाल की समस्या का सामना करना पड़ता है।

क्या करें 

अगर आप अवांछित बालों की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आधुनिक चिकित्सा का सहारा ले सकते हैं। किसी कुशल सौंदर्य विशेषज्ञ की सलाह पर आप इस चिकित्सा को अपना सकते हैं।

हॉट फ्लैशेज की समस्या

मेनोपॉज के बाद महिलाओं को हॉट फ्लैशेज की समस्या भी होने लगती है। इसके अंतर्गत महिलाओं के शरीर के तापमान में असमान्य बदलाव होता है। साथ ही सर्दियों में भी पसीना आना या बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह लक्षण मेनोपॉज के प्रमुख लक्षणों में से हैं। ‌

क्या करें

  • जिस कमरे में आप रह रहे हैं उसका तापमान सामान्य और ठंडा रखें।
  • भोजन में ज्यादा गर्म और मसालेदार चीजें ना खाएं।
  • चाय और कॉफी की मात्रा कम कर दें।
  • ठंडा पानी पीएं और सूती कपड़े पहनें।

इन सब के बावजूद अगर आराम नहीं मिलता है तो डॉक्टर को दिखाएं। दवाओं से समस्या को रोका जा सकता है।

दिल की समस्या

जिन लोगों को इस बात भ्रम है कि स्त्रियों को दिल की बीमारी नहीं होती उन्हें बता दे यह धारणा गलत है। चूंकी मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन की कमी हो जाती है इसलिए स्त्रियों के ब्लड में कोलेस्ट्रोल और ट्राइग्लिसराइड की मात्रा बढ़ जाती है जिसके कारण रक्त वाहिका नलिका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यही कारण होता है कि हार्ट की वेसेल्स के सिकुड़ने से एंजाइना दर्द और हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है।

क्या करें

अपने भोजन में घी, तेल, मक्खन, मैदा, नमक, मिर्च मसाले, चीनी आदि की मात्रा को सीमित कर दें। साथ ही अल्कोहल और स्मोकिंग से बचें। एक्सपर्ट डाइट में हरी सब्जी और फलों को जोड़ने की सलाह देते हैं। मेनोपॉज के बाद स्त्रियां समय-समय पर ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल चेक करवाती रहें क्योंकि डायबिटीज और हार्ट ब्लड प्रेशर की समस्या हार्ट अटैक का सामना करा सकती है।

मनोदशा पर प्रभाव

ब्रेन की ब्लड वेसेल्स के सुकड़ने से स्त्रियों में याद्दाश कमजोर होना, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा जैसी समस्याएं नजर आती हैं। इस उम्र में अधिकतर स्त्री अकेलापन महसूस करती हैं, जिससे वे डिप्रेशन का शिकार भी हो जाती है। यही कारण होता है कि अधिकतर स्त्रियों में नकारात्मक सोच पैदा होने लगती है और वह हर वक्त निराश महसूस करती हैं।

क्या करें

स्त्रियां विशेषज्ञ की सलाह पर एक्सरसाइज करें, जिससे मांसपेशियों में कसाव आए। ऐसे समय में पति से खुलकर बात करें। डिप्रेशन से बचना चाहते हैं तो सामाजिक दायरे को बढ़ाएं। अपनी रुचि से जुड़ी गतिविधियों को भी अपनी दिनचर्या में जोड़ें।

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