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पेट को स्वस्थ रखने के लिए कैसे बढ़ाएं गुड-बैक्टीरिया ? जानें 5 आसान तरीके

विविध By पल्‍लवी कुमारी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 17, 2019
पेट को स्वस्थ रखने के लिए कैसे बढ़ाएं गुड-बैक्टीरिया ? जानें 5 आसान तरीके

पेट के गुड- बैक्टीरिया में सुधार करने से हमारा शरीर अपनी छोटी-मोटी बीमारियों को खुद ठीक कर सकता है। दरअसल हमारे आंत यानी कि इंटेस्टाइन में कई सारे गुड और बैड बैक्टीरिया रहते हैं। उनमें से कुछ गुड-बैक्टीरिया को बढ़ाकर हम बीमार होने से बच सकते हैं।

हमारे शरीर में लगभग 40 ट्रिलियन बैक्टीरिया हैं, जिनमें से अधिकांश हमारे इंटेस्टाइन यानी आंतों में रहते हैं। सामूहिक रूप से इन्हें पेट के 'माइक्रोबायोटा' के रूप में जाना जाता है और यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। हालांकि, आपकी आंतों में कुछ प्रकार के बैक्टीरिया कई बीमारियों का भी कारण बनते हैं। दिलचस्प बात यह है कि आपके द्वारा खाया जाने वाला खाना, आपके अंदर रहने वाले बैक्टीरिया के प्रकार को भी बहुत प्रभावित करता है। आम भाषा में लोग इसे गुड-बैक्टीरिया भी कहते हैं, जो हमारे लाइफ-स्टाइल से काफी जुड़ा होता है। इसके कारण ही अक्सर शरीर की छोटी-मोटी बीमारियां अपने आप ही ठीक हो जाती हैं। दरअसल आपकी आंतों में बैक्टीरिया की सैकड़ों प्रजातियां हैं। प्रत्येक प्रजाति आपके स्वास्थ्य में एक अलग भूमिका निभाती है। सामान्य तौर पर, एक विविध माइक्रोबायोटा को शरीर के लिए ज्यादा स्वस्थ माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आपके पास बैक्टीरिया की जितनी अधिक प्रजातियां होंगी, वो उतनी ही आपके स्वास्थ्य लाभ में योगदान देंगी। इसका मतलब जिसके शरीर में जितना गुड-बैक्टीरिया होगा, वह उतना स्वस्थ रहेगा।

healthy bacteria 

विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों से युक्त आहार में विविध प्रकार के माइक्रोबायोटा पाए जाते हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि आप अपने शरीर में माइक्रोबायोटा यानी कि गुड-बैक्टीरिया को कैसे बढ़ा सकते हैं।

बहुत सारी सब्जियां, फलियां, बीन्स और फल खाएं

फल और सब्जियां एक स्वस्थ माइक्रोबायोटा के लिए पोषक तत्वों का सबसे अच्छा स्रोत हैं। इसमें हाई फाइबर होता है, जो आपके शरीर द्वारा पच नहीं पाते और इसे पचाने के लिए आंत में पल रहे बैक्टीरिया काम करते हैं। इस तरह यह शरीर के गुड-बैक्टीरिया के विकास को उत्तेजित करता है। सेब, आर्टिचोक, ब्लूबेरी, बादाम और पिस्ता शरीर में बिफीडोबैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं। बिफीडोबैक्टीरिया को शरीर के लिए लाभकारी बैक्टीरिया भी माना जाता है, क्योंकि वे आंतों की सूजन को रोकने और आंत के स्वास्थ्य को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। इसलिए अगर आप अपने शरीर के गुड बैक्टीरिया को बढ़ाना चाहते हैं तो अपने खाने में इन चीजों को शामिल कर सकते हैं:

  • रास्पबेरी
  • हरी मटर
  • चना
  • मसूर की दाल
  • बीन्स
  • साबुत अनाज 

फर्मेंटेड चीजों को खाएं

खमीर वाली चीजें यानी फर्मेंटड चीजों में लैक्टोबैसिल्यस नामक बैक्टीरिया होते हैं, जो गुड- बैक्टीरिया के लिए फायदेमंद होते हैं। जो लोग दही खाते हैं, उनकी आंतों में अधिक लैक्टोबैसिली होती है। इन लोगों में एंटरोबैक्टीरिया भी कम होता है, जो सूजन और कई पुरानी बीमारियों के जुड़ा होता है। इसी तरह, कई अध्ययनों से पता चला है कि दही का सेवन आंतों के बैक्टीरिया के लिए लाभदायक हो सकता है।हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कई योगर्ट्स, विशेष रूप से स्वाद वाले योगर्ट्स में हाई शुगर होता है ।इसलिए, खाने के लिए सादा और प्राकृतिक दही का इस्तेमाल करें। इस तरह का दही जो केवल दूध और बैक्टीरिया के मिश्रण से बनता है, जिसे "स्टार्टर कल्चर" भी कहा जाता है, उसी को खाएं। इसके अलावा सोयाबीन दूध कुछ अन्य रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया की मात्रा कम करते हुए, लाभकारी बैक्टीरिया, जैसे बिफीडोबैक्टीरिया और लैक्टोबैसिली के विकास को बढ़ा सकता है। 

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आर्टिफिशियल स्वीटनर का ज्यादा इस्तेमाल न करें

आर्टिफिशियल स्वीटनर का ज्यादा इस्तेमाल माइक्रोबायोटा के लिए नुकसानदायक होता है। यह वजन बढ़ाने का काम करता है और इससे ब्लड सर्कुलेशन और इंसुलिन को भी नुकसान पहुंचता है। इसलिए आप जब भी कुछ खाएं तो ध्यान रखें कि उसमें आर्टिफिशियल स्वीटनर न मिला हो। अक्सर बाहरी खाने वाली चीजों में आर्टिफिशियल स्वीटनर की मात्रा ज्यादा होती है। इसलिए घर के बने खाने को ज्यादा खाएं और कोशिश करें कि वह अपने प्राकृतिक रूप में ही हो।

मां का दूध बच्चे में गुड बैक्टीरिया को विकसित करता है

एक बच्चे का माइक्रोबायोटा जन्म के समय ठीक से विकसित होने लगता है इसलिए जरूरी है कि अपने बच्चे को स्तनपान जरूर करवाएं। दरअसल मां के दूध में कई सारे तत्व होते हैं, जो बच्चे के लिए बहुत जरूरी होता है।एक शिशु का माइक्रोबायोटा लगातार विकासशील और लाभकारी बिफीडोबैक्टीरिया में समृद्ध होता है, जो स्तन के दूध में शुगर को पचा सकता है। कई अध्ययनों से पता चला है कि जिन शिशुओं को स्तनपान कराया जाता है, उनमें बिफीडोबैक्टीरिया नामक स्वस्थ माइक्रोबायोटा विकसित होता है, जिससे बच्चा कई सारी बीमारियों सो बचा रहता है। स्तनपान भी एलर्जी, मोटापा और अन्य बीमारियों भी आंतों के माइक्रोबायोटा की कमी से जुड़ा हुआ है। 

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प्लांट-बेस्ड डाइट खाएं

प्लांट-बेस्ड डाइट आंतों में विभिन्न प्रकार के जीवाणुओं को बढ़ावा देता है। कई अध्ययनों से पता चला है कि शाकाहारी आहार से इंटेस्टाइन के माइक्रोबायोटा को ज्यादा फायदा मिलता है। क्योंकि इनमें हाई फाइबर होते हैं। इसके अलावा शाकाहारी भोजन से मोटापा आदि रोगों का भी स्तर कम हो जाता है। साथ ही शरीर में वजन, सूजन और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम होता है। शाकाहारी आहार शरीर के ई- कोलाई बैक्टीरिया को भी काफी कम कर देता है। इसलिए हमें गुड-बैक्टीरिया को शरीर में बढ़ाने के लिए प्लांट-बेस्ड डाइट को अपनाना चाहिए। इसके अलावा हम कोको और डार्क चॉकलेट, अंगूर, ग्रीन-टी, बादाम, प्याज, ब्लू बैरीज़ और ब्रोकोली आदि को भी अपने खाने में शामिल कर सकते हैं।

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