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घुटानों के दर्द में भूलकर भी न करें ये 7 काम, हो सकता है भारी नुकसान

दर्द का प्रबंधन
By Atul Modi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 13, 2018
घुटानों के दर्द में भूलकर भी न करें ये 7 काम, हो सकता है भारी नुकसान

कुछ फिजिकल थेरेपी और घुटने के ब्रेसिज़ भी घुटनों के दर्द से राहत देने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में घुटनों के दर्द को खत्म कने के लिए सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है।

Quick Bites
  • कुछ फिजिकल थेरेपी घुटनों के दर्द से राहत दे सकते हैं।
  • घुटनों के दर्द को खत्म करने में सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है।
  • घुटनों में दर्द होना एक सामान्य समस्या है, जो किसी भी उम्र में हो सकती है।

घुटनों में दर्द होना एक सामान्य समस्या है, जो किसी भी उम्र में हो सकती है। घुटनों में दर्द अक्‍सर चोट लगने के कार, जैसे लिगामेंट का टूटना, कार्टिलेज का फटना आदि हो सकता है। इनके अलावा घुटनों में दर्द अन्य कई रोगों के कारण भी होता है, जैसे गठिया, गाउट और किसी संक्रमण की वजह से भी हो सकते हैं। घुटनों में हल्के दर्द के ज्यादातर प्रकार खुद की देखभाल और सामान्‍य तरीकों से ठीक हो जाता है। कुछ फिजिकल थेरेपी और घुटने के ब्रेसिज़ भी घुटनों के दर्द से राहत देने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में घुटनों के दर्द को खत्म कने के लिए सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है।

घुटनों के दर्द के लक्षण   

घुटने के दर्द की जगह व गंभीरता अलग-अलग हो सकती है। कुछ लक्षण व संकेत जो कभी-कभी घुटनों के दर्द के दौरान दिखाई देते हैं, सूजन और जकड़न प्रभावित त्वचा लाल होना और छूने पर गर्म महसूस होना कमजोरी व अस्थिरता, घुटने से आवाज आना, घुटने को पूरी तरह से सीधा करने में असमर्थता आदि।

घुटनों में दर्द की वजह

घुटनों में क्रॉनिक दर्द से अस्थायी दर्द अलग होता है। काफी लोगों में अस्थायी दर्द चोट या किसी दुर्घटना के कारण होता है। घुटनों के क्रॉनिक दर्द बहुत ही कम मामलों में बिना इलाज के ठीक हो पाते हैं। ये हमेशा एक ही घटना के कारण से नहीं होते, अक्सर ये कई परिस्थितियों व कारणों के परिणाम से होता है। कुछ शारीरिक समस्या या रोग जो घुटनों में दर्द का कारण बन सकते हैं।

1 ऑस्टियोआर्थराइटिस- इसमें जोड़ों के बिगड़ने और उनकी बद्तर स्थिति होने के कारण दर्द, सूजन और अन्य समस्याएं होने लगती हैं।
2 टेंडिनाइटिस- इसमें घुटने के अगले हिस्सें में दर्द होता है, जो सीढ़ियां चढ़नें और चलते समय और अधिक बद्तर हो जाता है।
3 बर्साइटिस- यह घुटने का बार-बार सामान्य से अधिक इस्तेमाल करना, या चोट आदि लगने से होता है।
4 डिस्लोकेशन- हड्डियों के जोड़ उखड़ने या जगह से हिल जाने को डिस्लोकेशन कहा जाता है, घुटने की उपरी हड्डी का डिस्लोकेशन अक्सर आघात के कारण ही होता है।
5 मेनिस्कस टियर- घुटने के कार्टिलेज में एक या उससे ज्यादा टूट-फूट होना

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6 लिगामेंट का टूटना- लिगामेंट एक रेशेदार और लचीला ऊतक होता है, जो दो हड्डियों को आपस में जोड़ने में मदद करता है। घुटने में स्थित चार लिगामेंट में से एक का भी टूटना घुटने के दर्द का कारण बन सकता है। क्षतिग्रस्त लिगामेंट में ज्यादातर एंटेरियर क्रूसिएट लिगामेंट के मामले पाए जाते हैं।
7 हड्डियों के ट्यूमर- ऑस्टियोसार्कोमा कैंसर, दूसरा सबसे प्रचलित हड्डियों का कैंसर होता है, यह सबसे ज्यादा घुटनों में ही होता है।
8 गाउट- यह गठिया का एक रूप होता है, जो यूरिक एसिड बनने की वजह से होता है।
9 बेकर्स सिस्ट- इसमें घुटने के पीछे सिनोवियल द्रव का निर्माण होने लगता है।
10 संधिशोथ- यह एक क्रॉनिक सूजन संबंधी स्व-प्रतिरक्षित विकार होता है, जो दर्दनाक सूजन का कारण बन सकता है, और अंत में हड्डियों में विकृति और क्षय का कारण बन सकता है।

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घुटनों के दर्द में क्‍या करने से बचें

  • आमतौर पर घुटने के दर्द को रोक पाना संभव नहीं होता, निम्न कुछ सुझाव घुटनों की अंदरूनी व बाहरी चोटों और अन्य जोड़ संबंधी समस्याओं की रोकथाम करने में मदद कर सकते हैं
  • अपना स्वस्थ वजन बनाएं रखें, यह आपने घुटनों के स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छे उपायों में से एक है।
  • किसी प्रकार के खेल में हिस्सा लेने से पहले अपनी मांसपेशियों को तैयार करने के लिए, उनको खेल के अनुकूलि बनाने के लिए समय निकालें।
  • मांसपेशियों की कमजोरी घुटनों की अंदरूनी चोटों के प्रमुख कारणों में से एक होती हैं। इसलिए शरीर में क्वाड्रिसिप्स और हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों को मजबूत बना लेना चाहिए, क्योंकि ये मांसपेशियां घुटनों को सहारा देती हैं। अधिक टाइट मांसपेशियां भी अंदरूनी चोटों का कारण बन सकती हैं, इसलिए समय पर शरीर को स्ट्रेच करना जरूरी होता है।
  • अगर आपको ऑस्टियोआर्थराइटिस, क्रॉनिक घुटने के दर्द या घुटने में बार-बार होने वाली अंदरूनी समस्याएं हैं, तो आपको व्यायाम करने के तरीके को बदलने की आवश्यकता हो सकती है। कम से कम सप्ताह के कुछ दिनों के लिए, स्विमिंग या अन्य कम प्रभाव वाली गतिविधियों से बदलाव करने पर विचार करें। कभी-कभी अधिक प्रभाव वाली गतिविधियों को सीमित करने पर राहत मिल जाती है।

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Written by
Atul Modi
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागFeb 13, 2018

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