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किशोर गर्भावस्‍था में करें साबुत अनाज और आयरन युक्‍त भोजन का सेवन

गर्भावस्‍था By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Sep 20, 2012
किशोर गर्भावस्‍था में करें साबुत अनाज और आयरन युक्‍त भोजन का सेवन

किशोर गर्भावस्‍था के दौरान आपको ज्‍यादा मात्रा में पोषक तत्‍वों की जरूरत होती है। इस समय गर्भ में पल रहे शिशु के साथ किशोरी का भी विकास हो रहा होता है।

 

Quick Bites
  • आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया किशोरी की मृत्यु का कारण बन सकता है।
  • गर्भावस्‍था में आयरन की कमी को पूरा करने के लिए फोलिक एसिड की गोलियां खाएं।
  • किशोर गर्भावस्‍था में शरीर को पौष्टिक आहार के जरिए पोषण दिया जा सकता है।
  • कैल्शियम की कमी से मां के साथ ही बच्‍चे की हड्डियां भी कमजोरी हो सकती है।

गर्भावस्‍था के दौरान महिला को सामान्‍य दिनों के मुकाबले विटामिन्‍स, मिनरल्‍स और हार्मोन्‍स की ज्‍यादा जरूरत होती है। इसलिए ध्‍यान रहें कि इस दौरान आपका आहार संतुलित और पौष्टिक हो। प्रेग्‍नेंसी के दौरान आपके आहार का असर गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को भी प्रभावित करता है।

foods in teenage pregnancy


यदि किशोर अवस्‍था में ही गर्भधारण हो जाएं तो आपको ज्‍यादा मात्रा में पोषक तत्‍वों की जरूरत पड़ती है। ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि इस समय किशोरी का स्‍वंय का भी विकास हो रहा होता है, साथ में बच्‍चे का विकास भी जरूरी होता है। इसलिए आहार में हरी सब्जि़यां, दूध, उबला हुआ भोजन, अंकुरित चना और अंडे आदि को शामिल करना चाहिए। इस लेख में हम बात करते हैं किशोर गर्भावस्‍था में संतुलित आहार के असर के बारे में।

 

किशोर गर्भावस्‍था पर आहार के प्रभाव

 

बच्चे के वजन पर असर

किशोरी के आहार में यदि पोषक तत्‍वों की कमी है तो इसका सीधा असर बच्चे के वजन और लंबाई पर पड़ता है। पोषक तत्‍वों की कमी से कई बार मां और बच्‍चे की जान पर भी खतरा बन सकता है। गर्भावस्था के 40 हफ्तों के दौरान किशोरी को ज्यादा से ज्यादा पौष्‍िटक आहार का सेवन करना चाहिए, ताकि उन्हें या आने वाले शिशु को किसी भी प्रकार का शारीरिक कष्‍ट या बीमारी न हो।

 

साबुत अनाज का सेवन

बच्चे का वजन सामान्‍य से कम न हो इसके लिए किशोरी के शरीर में वसा की मात्रा को बढ़ाने के लिए अधिक से अधिक भोजन की आवश्यकता होती है। स्टार्च (ब्रेड, अनाज, चावल और आलू) बड़ी मात्रा में लें। रिफाइंड और परिरक्षित खाद्य पदार्थों में विटामिन और फाइबर का क्षय हो जाता है। इसलिए इनकी जगह साबुत अनाज और घर का बना ताजा भोजन लें।

 

मछली और दाल

गर्भावस्‍था के दौरान किशोरी को अपने स्‍वास्‍थ्‍य के साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु का भी ध्‍यान रखना पड़ता है। ऐसे में दोनों को ही प्रोटीन की जरूरत होती है। इसलिए ध्‍यान रखें कि आप जो भी भोजन करें उसमें प्रोटील प्रचुर मात्रा में हो। प्रोटीन के लिए आप बीन्‍स, दाल, मांस, मछली और पॉल्ट्री उत्पादों को वरीयता दे सकती हैं।

 

कैल्शियम की जरूरत

गर्भावस्था में कैल्शियम की कमी से किशोरी की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। दांत भी कमजोर होकर टूटने लगते हैं। कैल्शियम की कमी से गर्भ में पल रहे बच्चे की हड्डियों और दांतों का सही ढंग से विकास नहीं होता। इस दौरान दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थ जैसे दही, पनीर, मक्खन और खीर आदि से खाने से शरीर में कैल्शियम की सही मात्रा बनी रहती है। पालक, बथुआ, मेथी, आंवला, गाजर, चौलाई और सोयाबीन खाने से भी कैल्शियम बढ़ता है।

 

आयरन युक्‍त भोजन

गर्भावस्था के दौरान आयरन युक्‍त भोजन करना चाहिए। आयरन की कमी एनीमिया का कारण बन सकती है और ऐसे कई मामलों में किशोरी की मृत्यु भी हो जाती है। शरीर में आयरन की कमी न हो इसके लिए प्रोटीन, विटामिन्स और मिनरल्स युक्‍त भोजन करना चाहिए। गर्भावस्था के अंतिम तीन महीनों में आयरन, फोलिक एसिड की एक गोली रोज लेना जरूरी है।

 

ज्‍यादा से ज्‍यादा दूध पिएं

दूध में सभी पौष्टिक तत्‍व पाए जाते हैं। दूध का ज्‍यादा से ज्‍यादा मात्रा में सेवन करें। गर्भस्थ शिशु अपनी सभी जरूरतों को मां के शरीर से पूरा करता है। फोलिक एसिड को फोलेट भी कहते हैं। यह कई तरह के आहार में विटामिन बी के रूप में मौजूद होता है। चूंकि आहार से गर्भवती महिला की लौह तत्वों की आपूर्ति नहीं हो पाती, इसलिए आयरन फोलिक एसिड की गोलियां खाना जरूरी होता है।

किशोरी को अपने शरीर को गर्भावस्था के लिए तैयार करने और शिशु के विकास के लिए लौह तत्वों की आवश्यकता होती है। हमारे देश में किशोरियों में एनीमिया की समस्‍या आम है। कुछ किशोरियों में यह समस्‍या गर्भावस्था के दौरान पाई जाती है। एनीमिया से बचने के लिए लौह तत्व से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे- हरी पत्तेदार सब्जियों, अनाज, दालों और मांस का सेवन करें। इस दौरान पौष्टिक आहार का सेवन न करने का असर बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य पर भी पड़ सकता है।

 

 

 

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Written by
Pooja Sinha
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागSep 20, 2012

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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