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किडनी की पथरी के लिए शॉक वेव लीथोट्रिप्सी ट्रीटमेंट

किडनी फेल्योर By Shabnam Khan , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 23, 2015
किडनी की पथरी के लिए शॉक वेव लीथोट्रिप्सी ट्रीटमेंट

शॉक वेव लीथोट्रिप्सी (एसडब्ल्यूएल) अमेरिका में किडनी की पथरी के लिए सबसे आम उपचार है। इसके कहीं कहीं एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लीथोट्रिप्सी भी कहा जाता है।

शॉक वेव लीथोट्रिप्सी (एसडब्ल्यूएल) अमेरिका में किडनी की पथरी के लिए सबसे आम उपचार है। इसके कहीं कहीं एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लीथोट्रिप्सी भी कहा जाता है। एक्स्ट्राकोर्पोरियल का अर्थ होता है, शरीर के बाहर से। शॉक वेव यानी वह तरंगे जिन्हें दबाव से भेजा जाता है। और लीथोट्रिप्सी एक ग्रीक शब्द है जिसमें लीथो यानी पत्थर या पथरी और ट्रिप्सी यानी तोड़ना या पीसना। इस उपचार में शरीर के बाहर से शॉक वेव दी जाती हैं जिनका लक्ष्य किडनी की पथरी को तोड़ना होता है। इस उपचार के बाद पथरी छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाती है। इस तरह से एसडब्ल्यूएल किडनी की पथरी के उपचार के लिए एक नॉन-सर्जिकल ट्रीटमेंट है।

 

कौन करवा सकता है एसडब्ल्यूएल?

एसडब्ल्यूएल कुछ पथरी की समस्याओं पर काम करता है, कुछ पर नहीं। बहुत बड़ी पथरी का इलाज इसके जरिये नहीं किया जा सकता। पथरी का आकार, उसका स्थान, आपकी स्वास्थ्य स्थितियां और साथ ही, आपकी किडनी का स्वास्थ्य, इन सब जानकारियों पर ये निर्भर करता है कि आपके लिए ये ट्रीटमेंट फायदेमंद होगा या नहीं। आमतौर पर, जिसकी पथरी का आकार 2 सेमी. से कम होता है उसके लिए एसडब्ल्यूएल आदर्श उपचार माना जाता है।

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एसडब्ल्यूएल कुछ लोगों के लिए उपयुक्त होता है कुछ के लिए नहीं। एसडब्ल्यूएल में एक्सरे और शॉक वेव की जरूरत होती है, इस वजह से गर्भवती महिला जिसे पथरी हो, उसका ट्रीटमेंट इस तरह से नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, वे लोग जिन्हें रक्तस्राव संबंधी बीमारियां, इन्फेक्शन, मोटापा आदि समस्याएं होती हैं, उनके लिए भी एसडब्ल्यूएल ट्रीटमेंट आदर्श नहीं है। इसलिए, ये ट्रीटमेंट लेने से पहले संबंधित डॉक्टर को अपनी हेल्थ हिस्ट्री जरूर बताएं।

क्या एनेस्थिसिया की जरूरत होती है?

जी हां, शॉक वेव लीथोट्रिप्सी के दौरान एनेस्थिसिया की जरूरत पड़ती है, भले ही इसमें किसी प्रकार का चीरा नहीं लगाया जाता। ऐसा इसलिए होता है कि इसमें दर्द होता है। ये अलग-अलग मरीजों और उनकी समस्या के हिसाब से होता है कि किस प्रकार से एनेस्थिसिया दिया जाएगा।

 

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एसडब्ल्यूएल के फायदे और नुकसान

एसडब्ल्यूएल का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इस उपचार में किसी प्रकार का कट या चीरा नहीं लगाया जाता है। लिहाजा, हॉस्पिटल में रूकना नहीं पड़ता और रिकवरी में कम वक्त लगता है। लेकिन इसका नुकसान ये है कि एसडब्ल्यूएल हमेशा काम नहीं करता। 50 प्रतिशत लोगों की पथरी एक महीने में खत्म हो जाती है। बाकी लोगों में पथरी बच जाती है। कई बार इस प्रक्रिया को दोहराना भी पड़ता है। इसलिए, ये ट्रीटमेंट लेने से पहले डॉक्टर से इसके बारे में पूरी जानकारी ले लें।

एसडब्ल्यूएल ट्रीटमेंट बहुत सारे हॉस्पिटल, आउट-पेशेंट सेंटर और मोबाइल यूनिट में भी उपलब्ध है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर या फिर लोकर हॉस्पिटल या हेल्थ केयर सेंटर से संपर्क करें।

 

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