गर्मी में 20 % बढ़ जाते हैं गुर्दे की पथरी के मामले! जानें क्यों गर्म और उमस भरे मौसम में ज्यादा बनती है पथरी

Updated at: Aug 07, 2020
गर्मी में 20 % बढ़ जाते हैं गुर्दे की पथरी के मामले! जानें क्यों गर्म और उमस भरे मौसम में ज्यादा बनती है पथरी

क्या आप जानते हैं कि गर्मियों में गुर्दे की पथरी के 20 फीसदी मामले बढ़ जाते हैं। नहीं जानते तो ये लेख पढ़ें और इन चीजों से बचें।  

Jitendra Gupta
अन्य़ बीमारियांWritten by: Jitendra GuptaPublished at: Aug 07, 2020

गर्मी या उमस भरे मौसम में हर किसी को ठंडा पेय पीना, बाहरी गतिविधियां करना और पानी में खेलना बहुत ज्यादा पसंद  होता है। गर्मी के मौसम में राहत पाने के लिए हम महीनों तक बाजार में बिकने वाली तमाम ठंडी चीजों को पीते रहते हैं और निरंतर ऐसा करने पर हमें गर्मी का मौसम एक नई शुरुआत जैसा लगता है। हालांकि, चिलचिलाती गर्मी और बदबूदार पसीना हमेशा कई त्वचा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भरा होता है और इन्हीं में से एक है गुर्दे की पथरी। 

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जैसे ही मौसम गर्म होना शुरू होता है, गुर्दे की पथरी के मामलों में वृद्धि शुरू हो जाती है। गर्म मौसम के दौरान, हर साल गुर्दे की पथरी के मामलों में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देकी जाती है। अगर आप सोच रहे हैं कि मौसम और इस बीमारी के बीच क्या संबंध है, तो इस लेख में हम आपको इनके बीच के संबंध के बारे में  बता रहे हैं। ज्यादा समय न खराब करते हुए हम आपको बताते हैं कि आखिर क्यों गर्मी के मौसम में पथरी के मामले बढ़ जाते हैं। लेकिन उससे पहले जान लेते हैं कि क्या है गुर्दे की पथरी। 

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गुर्दे की पथरी क्या हैं?

गुर्दे में पथरी को खनिजों और लवणों के सख्त जमाव के कारण बनने वाले छोटे क्रिस्टल के रूप में हमेशा से संदर्भित किया जाता है। ये छोटी-छोटी पत्थरनुमा पथरी तब बनती है, जब मूत्र में क्रिस्टल बनाने वाले पदार्थों की सांद्रता बढ़ जाती है, जिससे वे एक साथ चिपक जाते हैं। अमीनो एसिड, प्रोटीन, बाइकार्बोनेट, कैल्शियम, फॉस्फेट, और पोटेशियम कुछ सामान्य खनिज हैं, जो पथरी के निर्माण में योगदान देते हैं। हालांकि लोगों को दर्द केवल तब महसूस होता है जब पथरी आकार में बढ़ने लगती है और अपनी स्थिति से हट जाती है।

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गर्मी और गुर्दे की पथरी के बीच संबंध

गर्मियों के गुर्दे की पथरी बनने का प्राथमिक कारण है डिहाइड्रेशन। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, हमें अधिक पसीना आता है, जिससे शरीर में मौजूद तरल पदार्थ की कमी होने लगती है। इस तरल पदार्थ के नुकसान को पूरा करने के लिए हमें अधिक पानी पीने की जरूरत होती है। पानी का अपर्याप्त सेवन यानी की पानी की कमी आपके शरीर के तरल पदार्थों को आहार खनिजों जैसे कैल्शियम के साथ अधिक केंद्रित बना सकें ती है और गुर्दे की पथरी के खतरे को बढ़ा सकती है।

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गुर्दे की पथरी को बनने से रोकने के लिए टिप्स

गुर्दे की पथरी को रोकने के कुछ आसान तरीके हैं, जिन्हें आप अपनी हेल्दी जीवनशैली में शामिल कर सकते हैं। 

हाइड्रेटेड रहें 

एक दिन में कम से कम 2 से 3 लीटर पानी पिएं। यह गुर्दे की पथरी के इतिहास वाले लोगों या उन लोगों के लिए अधिक आवश्यक है, जिन्हें अधिक पसीना आता है या फिर वे अधिक गर्म या नम क्षेत्र में रहते हैं।

प्लांट बेस्ड फूड और कम सोडियम वाले फूड खाएं 

अपने खाने में सामान्य मात्रा में नमक शामिल करें। इसके अलावा, प्लांट बेस्ड प्रोटीन खाद्य पदार्थ जैसे फलियां और बीज अधिक खाएं।

सप्लीमेंट्स लेने से बचें 

अपने डॉक्टर से सलाह किए बिना किसी भी तरह के सप्लीमेंट लेने से बचें, खासकर कैल्शियम सप्लीमेंट्स। यह आपके गुर्दे में पथरी के विकास के जोखिम को बढ़ा सकता है क्योंकि 80 प्रतिशत गुर्दे की पथरी कैल्शियम बेस्ड होती हैं।

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