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केरल में बाढ़ के पानी से लेप्टोस्पायरोसिस रोग का खतरा, जानें लक्षण और बचाव

संक्रामक बीमारियां By अनुराग अनुभव , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 20, 2018
केरल में बाढ़ के पानी से लेप्टोस्पायरोसिस रोग का खतरा, जानें लक्षण और बचाव

केरल समेत देश के कई हिस्सों में बाढ़ से मची तबाही रुकने का नाम नहीं ले रही है। इन इलाकों में बाढ़ के पानी से कई तरह के संक्रामक रोगों और जलजनित रोगों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

केरल समेत देश के कई हिस्सों में बाढ़ से मची तबाही रुकने का नाम नहीं ले रही है। इन इलाकों में बाढ़ के पानी से कई तरह के संक्रामक रोगों और जलजनित रोगों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। केरल में बाढ़ के पानी से 370 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और 7 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए। दरअसल बाढ़ का पानी तेजी से आता है और हर जगह प्रवेश कर जाता है। इसके साथ ही इससे इंसानों के साथ-साथ जानवर और कीड़े-मकोड़े भी प्रभावित होते हैं। इसलिए इस दौरान कई तरह के खतरनाक संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इन रोगों का खतरा केरल के साथ-साथ अन्य बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी है। आइए आपको बताते हैं बाढ़ के समय किन रोगों का होता है ज्यादा होता है और कैसे कर सकते हैं इनसे बचाव।

लेप्टोस्पायरोसिस

लेप्टोस्पायरोसिस एक तरह का बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो आदमियों और जानवरों दोनों को प्रभावित करता है। आमतौर पर ये रोग पालतू जानवरों जैसे- गाय, भैंस, बकरी, मुर्गों, कुत्तों और चूहों से फैलता है। आमतौर पर इस रोग के लक्षण जल्दी दिखाई नहीं देते हैं मगर बाढ़ और पानी आदि के प्रभाव में ये रोग तेजी से एक से दूसरे व्यक्ति या जानवर में फैलते हैं। आमतौर पर दूषित पानी और जानवरों के मल-मूत्र के संपर्क में आने से फैलने वाला लेप्टोस्पायरोसिस रोग जानलेवा नहीं होता है मगर ये किडनी को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

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क्या हैं लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण

  • सिर दर्द या शरीर में दर्द
  • तेज बुखार होना
  • खांसी में खून निकलना
  • पीलिया भी इस बीमारी के कारण ही होता है।
  • शरीर का लाल होना
  • शरीर में रैशेज होना

हैजा

बैक्टीरिया की वजह से होने वाली बीमारी हैजा बाढ़ के दौरान फैलने वाली सबसे घातक बीमारी होती है। इसके कारण उल्टी-दस्त और निर्जलीकरण यानी डिहाइड्रेशन हो जाता है। कई गंभीर मामलों में हैजा जानलेवा भी हो सकता है। दरअसल हैजा एक खास तरह के बैक्टीरिया के कारण फैलता है। यह मुंह और मलमार्ग के माध्यम से ज़ोर पकड़ता है। इससे प्रभावित लोगों के मल में बड़ी संख्या में इस बीमारी के जीवाणु पाए जाते हैं। इस मल के बाढ़ के पानी में मिल जाने की स्थिति में इसके कारण बड़े पैमाने पर संक्रमण फैल जाता है और बहुत तेजी से लोग हैजा के शिकार होने लगते हैं। बाढ़ के समय में शरणस्थल के शिविरों में पहले ही साफ-सफाई की कमी होती है, जिससे तीव्र संक्रमणशील यह बीमारी जल्दी ही महामारी का रूप ले लेती है।

बाढ़ के दौरान वाली अन्य बीमारियां

बाढ़ के दौरान कई तरह के जलजनित रोगों जैसे- मियादी बुखार, हैजा और हेपटाइटिस-ए, लेप्टोस्पायरोसिस आदि का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा मच्छरों से पैदा होने वाली बीमारियां जैसे- मलेरिया, डेंगू, हेमरहेजिक बुखार, पीतज्वर और वेस्ट नाइल फीवर आदि का भी खतरा बहुत ज्यादा होता है।

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बाढ़ के दौरान बरतें ये सावधानियां

  • बाढ़ के पानी के साथ सीधे संपर्क में न आने की पूरी कोशिश करें, तथा कभी भी इसका सेवन न करें। आमतौर पर, नलके का पानी बाढ़ से अप्रभावित होता है और पीने के लिए सुरक्षित होता है।
  • अगर आपको पानी में जाना ही पड़े तो रबड़ के जूते और या वाटर प्रूफ दस्ताने पहनें।
  • नियमित रूप से अपने हाथों को धोएं, विशेष रूप से खाने से पहले। अगर पानी उपलब्ध नहीं है तो हेंड सेनेटाइज़र या वेट वाइप का प्रयोग करें।
  • बाढ़ के पानी के संपर्क में आए भोजन का सेवन कभी न करें।
  • अगर कहीं कट या छिल गया हो तो वहां वाटरप्रूफ प्लास्टर पहनें।
  • आप गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण है, तो आपदा रूल बुक में ऐसी स्थिति के निर्देश पढ़ें।
  • जानवरों को कोई रोग होने पर उनके मल-मूत्र, उनके शरीर और लार से सीधे संपर्क में आने से बचें।
  • कई दिनों का बासी और गंदे पानी से बना खाना न खाएं।
  • बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मांसाहारी आहार जैसे- मीट, मछली आदि के सेवन से बचें।
  • अगर संभव हो, तो पानी बिना उबाले न पिएं।
  • खाने के अच्छी तरह पकाएं। अधपका खाना कई बीमारियों को जन्म दे सकता है।
  • जितना हो सके सूखा रहने का प्रयास करें।

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