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ज्‍यादा प्रोटीन से गुर्दो को खतरा

लेटेस्ट By एजेंसी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 14, 2013
ज्‍यादा प्रोटीन से गुर्दो को खतरा

ज्‍यादा प्रोटीन से गुर्दो को खतरा: जानें इस लेख में ज्‍यादा प्रोटीन से गुर्दो को खतरा कैसे होता है, कैसे प्रोटीन की अतिरिक्त खुराक से गुर्दे को खतरा होता है।

कम उम्र के युवा तेजी से गुर्दा संबंधित बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे हैं। ऐसी बीमारी पौष्टिक आहार ना लेने, सिगरेट और शराब नहीं पीने से नहीं, बल्कि डॉक्‍टरों की सलाह के बगैर पूरक प्रोटीन आहार लेने से हो रही है।

jada protein se gurdo ko khatraडॉक्टरों की माने तो प्रोटीन की ज्यादा खुराक लेने से गुर्दे पर बुरा प्रभाव पड़ता है। आमतौर पर गुर्दे की बीमारियों की पहचान शुरुआत में नहीं हो पाती है। इसलिए बगैर उचित सलाह के अतिरिक्त प्रोटीन नहीं लेना चाहिए। लेकिन कई लोग इसकी अनदेखी करते हैं। नतीजतन गुर्दे की दीर्घकालिक बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। नेफ्रोलॉजिस्ट का मानना है कि लम्बे समय तक प्रोटीन पाउडर की ज्यादा मात्रा लेने से गुर्दे पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।

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गुर्दा प्रोटीन का प्रसंसकरण करता है और उसे तोड़ता है। यानी प्रोटीन की ज्यादा मात्रा लेने पर गुर्दे को ज्यादा काम करना पड़ता है। प्रोटीन की ज्यादा मात्रा लेने पर गुर्दे में पत्थरी की समस्‍या हो सकती है और गुर्दे बिल्कुल खराब भी हो सकते है। जानकारों के मुताबिक 40 फीसदी युवाओं को उच्च रक्तचाप, मोटापा और मधुमेह की समस्‍या रहती है। कई युवा सिगरेट और शराब पीते हैं। जिसके कारण भी गुर्दे में पत्थरी, संक्रमण और मधुमेह से जुड़ी बीमारियां का खतरा ज्यादा रहता है। कई युवा पूरक प्रोटीन आहार के रूप में प्रोटीन शैक, प्रोटीन की गोली और एनाबोलिक स्टेरायड लेते हैं। यह काफी कम अवधि में उन्हें दोगुनी, छहगुनी शक्ति देता है। लेकिन इससे गुर्दे खराब होने की संभावना बढ़ जाती है।

गुर्दे में 70 फीसदी तक की क्षति से व्यक्ति नपुंसक हो सकता है। गुर्दे की बीमारी की वजह से शरीर में विजातीय पदार्थ जमा होने लगते हैं। नतीजतन शुक्राणु की गुणवत्ता और उत्पादकता प्रभावित होती है। लेकिन जिन लोगों को गुर्दे संबंधी छोटी परेशानियां हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। परेशानी उन लोगों को हो सकती है, जिनका गुर्दा 60 फीसदी से भी ज्यादा क्षतिग्रस्त हो चुका है। गुर्दे की बीमारी का मतलब यह नहीं
है कि कोई पुरुष पिता नहीं बन सकता। गुर्दे के प्रत्यारोपण के बाद भी कई लोग सामान्य जीवन जी रहे हैं।

गुर्दे संबंधी परेशानियों का पता खून, पेशाब और रक्तचाप के जांच से लगाया जा सकता है। इसलिए हमेशा उचित सलाह के बाद ही पूरक प्रोटीन लेना चाहिए।

राष्ट्रीय गुर्दा प्रतिष्ठान के एक आकंलन के मुताबिक देश में दस लाख में से 100 लोग गुर्दे से जुड़ी बीमारियों से ग्रस्त हैं। भारत में सलाना 90,000 गुर्दा प्रत्यारोपण की जरूरत होती है।

 

 

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