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गेंहूं के आटे और व्हाइट राइस का हेल्दी विकल्प ढूंढ रहे हैं तो खाइए 'कटहल का आटा', जानें कितना फायदेमंद है ये

स्वस्थ आहार By पल्‍लवी कुमारी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 16, 2019
गेंहूं के आटे और व्हाइट राइस का हेल्दी विकल्प ढूंढ रहे हैं तो खाइए 'कटहल का आटा', जानें कितना फायदेमंद है ये

गेहूं और चावल का एक अच्छा विकल्प बन सकता है कटहल के बीज का आटा। कटहल के बीज से बने आटे को खाने से डायबिटीज और कोलन कैंसर जैसी बीमारियों ठीक हो सकती हैं। आइए हम आपको बताते हैं कटहल के कई लाभकारी फायदे।

कटहल एक तरीके का सुपरफूड् है क्योंकि इसमें सारे पौष्टिक गुण हैं। इसका मतलब कई लोगों के लिए कई चीजें हैं। यह एक फल, अचार, ड्राई-फ्रूट और शाकाहारी मांस के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। सिर्फ भारतवासियों की ही बात करें तो दक्षिण भारत के लोग यह फल और इसके बीज को प्रोटीन से भरपूर अखरोट के रूप में पसंद करते हैं। तो उत्तर में, टेंडर कटहल या कथल एक स्वादिष्ट सब्जी है और बंगाल में यह गच-पेठा (ट्री मटन) है। केरल में यह मुख्य रूप से एक स्वस्थ कार्बोहाइड्रेट और हर दूसरी चीज में लोग इसका उपयोग करते हैं। कच्चे कटहल की सब्जी चावल और रोटी के विकल्प के साथ-साथ मछली या छोले जैसे प्रोटीन करी के रूप में खाया जाता है। वहीं कच्चा कटहल, कच्चे आम की तरह अचार बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा यह जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में भी काफी लाभदायक है। वहीं अब कटहल को चावल और रोटी के स्वस्थ विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

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डायबिटीज में 

'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ डायबिटीज' में प्रकाशित एक शोध अध्ययन, के अनुसार कटहल यानी कि जैकफ्रूट में कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट और ग्लाइसेमिक लोड चावल की तुलना में 40% कम है। इस तरह यह चावल के लिए यह संभावित रूप एक स्वस्थ विकल्प बना सकता है। इसके अलावा मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए तो सबसे ज्यादा फायदेमंद है। इसके अलावा कच्चे कटहल में फाइबर की मात्रा भी सही है। वहीं जैकफ्रूट के बारे में यह भी कहा जाता है कि डायबिटीज के मरीज अगर इसका लगातार सेवन करते हैं, तो उनता ब्लड शुगर कम होने लगता है। साथ ही इनके ऊर्जा स्तर में भी कहीं से कोई कमी नहीं आती। 

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कच्चे कटहल का आटा भी है लाभदायक

इसके अलावा कई जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ, जो हमारे उच्च-कैलोरी और कम फाइबर वाले आहार के कारण होती हैं उसमें कच्चे कटहल के आटे को खाने में इस्तेमाल करने से कई फायदे होते हैं। दरअसल कच्चे कटहल के बीज को सूखा कर पीस कर बनाए गए आटे में एक हद तक ब्लडप्रेशर और मोटापा जैसे जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को नियंत्रित करने की क्षमता होती है। वहीं कटहल के आटे और रूट स्टार्च के मिश्रण से बनी रोटियां और मोमोज काफी टेस्टी और स्वास्थयकारी होता है। कुछ लोगों को कटहल के बीज का आटा थोड़ा कड़वा लगता है पर फिर भी इसे लोग पसंद कर रहे हैं।

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कोलेस्ट्रॉल को कम करता है

कच्चा कटहल घुलनशील यानी कि सोल्युबल फाइबर से युक्त होता है। यही सोल्युबल फाइबर आपके शरीर से कोलेस्ट्रॉल को हटाने में मदद करते हैं। तो अगर आप अपने रोज के खाने में कटहल को चावल और रोटी की जगह इस्तेमाल करते हैं, तो आपके शरीर में हमेशा ही कोलेस्ट्रॉल कम रहेगा।

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कोलन कैंसर में भी होता है लाभदायक

कोलन, रेक्टल या दोनों में ही कोशिकाओं की असमान्य वृद्धि को कोलन कैंसर कहा जाता है। इसे कोलोरेक्‍टल, बोवेल, रेक्टल कैंसर भी कहा जाता है। साथ ही आम भाषा में अक्सर लोग कोलन कैंसर को बड़ी आंत का कैंसर भी कहते हैं। पके हुए कटहल में अघुलनशील फाइबर की मात्रा चावल या रोटियों की तुलना में बहुत अधिक होती है। यह मल त्याग में सुधार करता है जिससे फाइबर पेट के कैंसर में आराम में मिलता है। 

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स्वस्थ और दीर्घायु बनाता है

कम अम्लता के कारण कटहल एकमात्र ऐसा फल है जिसका सेवन भोजन के रूप में किया जा सकता है, जो आपके नियमित कार्बोहाइड्रेट जैसे गेहूं और चावल से बेहतर है। नेशनल हेल्थ सर्विस, यूके द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि सब्जियों और फलों की कम खपत व्यायाम की कमी के कारण लोगों की आयु कम हो रही है। इसलिए जब हम कच्चे कटहल को भोजन के रूप में पकाते और खाते हैं, तो उसमें एक ही भोजन में जितनी मात्रा सब्जी और फल की होनी चाहिए, उतना हमें इसे खाने से मिल जाता है। जिससे हम स्वस्थय और सुखी रहकर दीर्घायु होते हैं।

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