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जानलेवा हो सकता है ऑफिस का तनाव

लेटेस्ट By सम्‍पादकीय विभाग , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Nov 07, 2018
जानलेवा हो सकता है ऑफिस का तनाव

तनावपूर्ण हालात का हृदय संबंधी रोगों की चपेट में आने का सीधा संबंध होता है, जानिए।....

काम के दौरान तनाव होना लाजमी है। लेकिन लंबे समय तक इस तनाव का आपके साथ बने रहना ठीक नहीं। यह तनाव आपके दिल की सेहत के लिए अच्‍छा नहीं।


jaanleva ho sakta hai office ka tanav

तनाव शरीर में वसा को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था को बदल देता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है और आप जानलेवा हार्ट अटैक की तरफ बढ़ जाते हैं, यह बात एक ताजा शोध में सामने आई है।


अगर आपके ऑफिस का माहौल ठीक नही है। बॉस आपको हमेशा डांटता-फटकारता रहता है और आप हमेशा तनाव में रहते है तो जान लीजिए आप कभी भी हार्ट अटैक के शिकार हो सकते हैं।

शाम को आप ऑफिस से निकल जाते हैं, लेकिन स्ट्रेस के रूप में ऑफिस आप में से नहीं निकलता तो इसे खतरे की घंटी मानते हुए सचेत हो जाएं।

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स्पेन के शोधकर्ताओं ने पाया कि दफ्तर का तनावपूर्ण माहौल आपके शरीर के भीतर ऐसा उथल-पुथल मचाता है और मेटाबोलिसेस चर्बी को प्रभावित करता है कि शरीर में 'बैड कोलेस्ट्रॉल' का स्तर बढ़ जाता है।

वैज्ञानिक काफी लंबे समय से इस बात पर जोर दे रहे हैं कि तनावपूर्ण हालात का हृदय संबंधी रोगों की चपेट में आने का सीधा सम्‍बन्‍ध है।

 

इसमें स्मोकिंग, उलटा-सीधा खाना और लापरवाही भरी लाइफस्टाइल आग में घी का काम करती है, लेकिन नए शोध के दौरान पाया गया है कि स्ट्रेस डाइस्लिपीडीमिया नामक विकार हो जाता है, जो रक्त में फैट और लिपोप्रोटीन के स्तर पर बदलकर रख देती है।

 

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वर्जिन डी ला विक्टोरिया हॉस्पिटल और सेंटीयागो डी कंपोस्टिला यूनिवर्सिटी के डॉक्टर ने जॉब स्ट्रेस और शरीर में फैटी एसिड के मैटाबॉलिज्म के साथ सामंजस्य के विभिन्न मापदंडों के संबंधों का अध्ययन किया।

 

'स्कैडिनेवियन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार 90 हजार कामगारों की सैंपल संख्या के मेडिकल चेकअप के नतीजों की जांच की गई। इनमें पाया गया कि तनाव के कारण चिड़चिड़ापन और उदासी, काम में दिल न लगना नींद न आना, थकान, ध्यान केंद्रित न कर पाना, समाज के प्रति उदासीनता, सेक्स ड्राइव में कमी, सिगरेट, शराब का सेवन बढ़ना, आदि इसके दुष्‍प्रभावों के तौर पर सामने आ रहे हैं।

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कार्यस्थल से जुड़े तनाव संबंधी मामलों की विशेषज्ञ क्‍लीनिकल साइकोलॉजिस्ट कालरेस कैटालीना ने बताया कि पिछले बारह महीनों से अपने काम के दौरान दिक्कतों का सामना कर रहे वर्कर्स डाइस्लिपीडीमिया का शिकार होने का खतरा ज्यादा पाया गया।

 

वैज्ञानिकों ने पाया कि जो लोग जॉब स्ट्रेस के शिकार होते हैं, 'बैड कोलेस्ट्रॉल' के स्तर के बढ़ने का खतरा होता है, जिसके नतीजे में आर्टरीज ब्लाक हो सकती है।

 

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