आईवीएफ के बाद होम प्रेगनेंसी टेस्ट

Updated at: May 16, 2015
आईवीएफ के बाद होम प्रेगनेंसी टेस्ट

आईवीएफ एक प्रक्रिया है जिसमें अंडे की कोशिकाओं को मां के गर्भ से बाहर निकालते हैं और डोनर के स्पर्म के साथ निषेचित करते हैं।

Anubha Tripathi
गर्भावस्‍था Written by: Anubha TripathiPublished at: Apr 18, 2012

ivf ke bad home pregnancy test

आईवीएफ एक प्रक्रिया है जिसमें अंडे की कोशिकाओं को मां के गर्भ से बाहर निकालते हैं और डोनर के स्पर्म के साथ निषेचित करते हैं। यह पूरी प्रक्रिया इनक्यूबेटर के अंदर होती है। निषेचित करने की पूरी प्रक्रिया में लगभग तीन दिनों का समय लग जाता है। भ्रूण के पर्याप्त विकास के बाद इसे वापस मां के गर्भ में पहुंचा दिया जाता है। इसके बाद महिला को 12 से 15 दिनों तक बेडरेस्ट की सलाह दी जाती है। इस पूरी प्रक्रिया की सुनिश्चितता का पता लगाने के लिए होम  प्रेगनेंसी टेस्ट किया जाता है।

आमतौर पर प्रोजेस्ट्रोनि स्तर को मापने के लिए एक सीरम से गर्भावस्था परीक्षण किया जाता है। यह एक तरह का ब्लेड टेस्ट है जो प्रेगनेंसी को सुनिश्चित करता है। इन परीक्षणों की आवश्यकता अस्थानिक गर्भधारण और गर्भपात की संभावना पर नजर रखने के लिए होती है। इन सबसे पहले घर पर प्रेग्‍नेंसी टेस्ट करके यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि आईवीएफ की प्रक्रिया सफल रही।

आमतौर पर घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट से यूरीन में एचसीजी का पता चलता है। अगर भ्रूण सफल तरीके से गर्भ में पहुंच जाता है तो नाल (placenta) के द्वारा एचसीजी का निर्माण होता है, जिससे प्रेग्‍नेंसी टेस्ट पॉजिटीव होता है। आईए जानें आईवीएफ के बाद प्रेग्‍नेंसी टेस्ट के बारे में जरूरी तथ्य।

  • आईवीएफ के बाद घर पर प्रेंगनेंसी टेस्ट की अपेक्षा ब्लड टेस्ट ज्यादा विश्वसनीय है।
  • वेजाइनल अल्ट्रासांउड के जरिए भी यह पता लगाया जा सकता है कि आईवीएफ की प्रक्रिया सफल रही या नहीं। आमतौर पर अल्ट्रासांउड से गर्भधारण की संख्या का पता नहीं चल पाता है क्योंकि आईवीएफ प्रक्रिया में एक से ज्यादा गर्भधारण की संभावना होती है।   
  • अगर टेस्ट का परिणाम पाजिटिव है तो डॉक्टर  द्वारा अल्ट्रासाउंड के साथ ब्लड टेस्ट भी करवाना चाहिए।

 

एचसीजी के इंजेक्शन के 14 दिन बाद घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहिए। किसी भी महिला के लिए इंतजार करना बहुत ही कठिन होता है लेकिन इससे पहले टेस्ट करने पर गलत पॉजिटीव परिणाम आने की संभावना होती है। ऐसा इसलिए होता है कि शरीर में एचसीजी की मात्रा होती है लेकिन कुछ समय बाद टेस्ट करने से परिणाम सही आते हैं।

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