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बहुत जरूरी है शिशु को डकार दिलाना, जानें इसके फायदे और कराने का सही तरीका

नवजात की देखभाल By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 16, 2019
बहुत जरूरी है शिशु को डकार दिलाना, जानें इसके फायदे और कराने का सही तरीका

शिशु भले ही आकार में छोटे होते हैं लेकिन उनके भी हर चीज उसी तरह जरूरी होती है जितनी कि एक बड़े व्यक्ति के लिए होती है। जिस तरह से बच्चे द्धारा पीए गए दूध का पॉटी के रूप में समय पर बाहर निकलना जरूरी है उसी तरह उसे डकार आना भी जरूरी है। डॉक्टर्स कहत

शिशु भले ही आकार में छोटे होते हैं लेकिन उनके भी हर चीज उसी तरह जरूरी होती है जितनी कि एक बड़े व्यक्ति के लिए होती है। जिस तरह से बच्चे द्धारा पीए गए दूध का पॉटी के रूप में समय पर बाहर निकलना जरूरी है उसी तरह उसे डकार आना भी जरूरी है। डॉक्टर्स कहते हैं कि कई बार बच्चे के पेट में हवा भर जाती है जिसका किसी न किसी रूप में बाहर निकलना बहुत जरूरी है। अगर ऐसा न हो तो बच्चा कब्ज का शिकार हो सकता है। अत्‍यधिक गैस आपके बच्‍चे पेट में दर्द का कारण बन सकता है। उसके शरीर में अत्यधिक गैस और असुविधा से राहत देने के लिए डकार दिलवाने के लिए उनको आपकी सहायता की आवश्‍यकता होती है।

बच्चे को डकार दिलाना क्यों है जरूरी?

  • आपका शिशु रूक–रूक कर दूध पी रहा हो या धीरे–धीरे दूध पी रहा है तो डकार लेने का यही सही समय है। हालांकि आपका बच्चा दूध पीने पर उनके रोने और अधिक हवा निगलने पर वह डकार लेने की कोशिश करता है।
  • डकार लेने की क्रिया को अपने बच्चे की पीठ को हल्के हाथ से थपथपाने के द्वारा करें। हल्के हाथ से हिलाते हुए अपने बच्चे की पीठ को थपथपाएं और रगड़ते हुए इस युक्ति को करें।
  • अपने शिशु को डकार देने के लिए यहां अलग–अलग स्थितियों का चुनाव करें, जो आप दोनों के लिए सुविधाजनक हो।
  • जब आप सीधे बैठे हो तो अपने बच्चे को पकड़े उसकी थोढ़ी आपके कंधो पर टिकी हो। अपने एक हाथ से अपने बच्चे की पीठ और निचले भाग (नितम्ब) को सहारा दें जबकि दूसरे हाथ से बच्चे की पीठ को धीरे से थपथपाएं और रगड़े।
  • शिशु के शरीर को आगे की ओर झुकाएं हालांकि आप एक हाथ से उसकी चेस्‍ट और सिर को सहारा दे और दूसरे हाथ से बच्चे की पीठ को हल्के हाथ से थपथपाएं।
  • इस स्थिति जब आप उसके चेहरे और पेट को पलट कर (बच्चे को उल्टा लिटा कर) धीरे से उसकी पीठ को थपथपाएं।
  • बच्चे को डकार की आवश्यकता तब होती है, जब वह पेट भर के उधम मचाते है या हिलते है, इस स्थिति में वह शायद सबसे ज्यादा गैसी होना महसूस करते है। दूध पिलाते समय थोड़ा रूक कर बच्चे को डकार दिलवाएं। जबकि स्तनपान कराते समय, जब कभी आप अपने स्तन से दूध पीला चुके हो आपको चाहिए कि आप अपने बच्चे को डकार दिलवाएं। एक सही स्थिति में बैठकर अपने बच्चे को दूध पिलाने के बाद उसे वापस निकालने या उल्टी करने से बचने के लिए उसे डकार दिलवाएं। आपके बच्चे का दूध पीने के बाद उसे निकालना सामान्य है।

क्या बच्चों का रोना अच्छा है?

अकसर आपने बुजुर्गो को यह कहते सुना होगा कि शिशु के लिए थोड़ा रोना भी जरूरी है। आज के बाल रोग विशेषज्ञ भी इसे सही मानते हैं कि रोने से बच्चे की मांसपेशियों की अच्छी एक्सरसाइज होती है और फेफड़ों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलता है। इस संबंध में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.आलोक गुप्ता कहते हैं, 'शिशु अपनी मांगें पूरी करवाने के लिए रोते हैं, लेकिन उनके लिए थोड़ा अनुशासन भी जरूरी है। मिसाल के तौर पर अगर आप बच्चे को हर तीन घंटे के अंतराल पर फीड देती हैं तो उसके इस रूटीन को कायम रखने की कोशिश करें। अगर बीच में बच्चा रोता भी है तो उसे दूध देने के बजाय बहलाकर चुप कराने की कोशिश करें। इसी तरह कुछ बच्चे गोद में घूमने के लिए रोते हैं तो रोने पर उन्हें थोड़ी देर के लिए गोद में जरूर उठाएं, लेकिन उसे जल्द ही बेड पर लिटा दें और खुद उसके पास बैठी रहें। इससे वह सुरक्षित महसूस करेगा और उसे यह एहसास हो जाएगा कि सोने की सही जगह बेड ही है, गोद नहीं।' कई बार बच्चे आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए भी रोते हैं। ऐसे में उन्हें बहलाना ही सही उपाय है।'

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Written by
Rashmi Upadhyay
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागJan 16, 2019

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