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क्‍या चीनी हमारी सेहत के लिए खतरनाक है? एक्‍सपर्ट से जानें इसके फैक्‍ट्स और मिथ

स्वस्थ आहार By अतुल मोदी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 25, 2019
क्‍या चीनी हमारी सेहत के लिए खतरनाक है? एक्‍सपर्ट से जानें इसके फैक्‍ट्स और मिथ

कई विशेषज्ञों ने इंसुलिन रेसिस्टेंस, मोटापा, मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसे विभिन्न मोटाबॉलिक विकारों और यहाँ तक कि मधुमेह मेलेटस के लिए चीनी को जिम्मेदार बताया है। 

चीनी! इन दिनों हम इसके बारे में बहुत सुन रहे हैं। यह हमारे आहार में विलेन बन गया है। चीनी एक कार्बोहाइड्रेट है। हमारे आहार में ऊर्जा का 50-60% कार्बोहाइड्रेट से आता है। कार्बोहाइड्रेट सरल और जटिल होते हैं। सरल कार्बोहाइड्रेट में ग्लूकोज (फलों और सब्जियों में मौजूद), सुक्रोज (सफेद चीनी), फ्रक्टोज (फलों और सब्जियों में मौजूद), लैक्टोज (दूध में मौजूद) शामिल हैं। जटिल कार्बोहाइड्रेट में स्टार्च, संशोधित स्टार्च और आहार फाइबर के विभिन्न रूप शामिल हैं। यदि हम कार्बोहाइड्रेट के प्रत्येक रूप की मिठास की सीमा के बारे में बात करें, तो फ्रक्टोज सबसे मीठा रूप है जिसके बाद सुक्रोज, ग्लूकोज और लैक्टोज होता है। जटिल कार्बोहाइड्रेट में शर्करा अपेक्षाकृत कम होती है। 

 

ये शर्करा हमारे शरीर में कैसे काम करती है?

एक ग्राम कार्बोहाइड्रेट 4 किलो कैलोरी ऊर्जा देता है। सरल शर्करा हमारे शरीर में सीधे अवशोषित होते हैं और ऊर्जा प्रदान करते हैं। जबकि जटिल कार्बोहाइड्रेट को शरीर में विखंडित होने के लिए अपेक्षित एंजाइमों की जरूरत होती है और उसके बाद ही अवशोषित होते हैं। उदाहरण के लिए, प्रतिरोधी स्टार्च जैसे संशोधित स्टार्च मेटाबोलाइज़ करने में अधिक समय लेते हैं, इस प्रकार, वे हमारे शरीर में धीरे-धीरे ऊर्जा छोड़ते हैं, जो रक्त में शर्करा और इंसुलिन के स्तर को प्रभावित नहीं करता है।

जब हम चीनी के नकारात्मक प्रभाव के बारे में बात करते हैं, तो हमारा मतलब मूल रूप से परिष्कृत या संसाधित चीनी से है। हमारे भोजन में चीनी की भूमिका मिठास प्रदान करना है। इसके अलावा, वे जैम, जेली और सॉस में प्रिजरवेटिव के रूप में उपयोग किये जाते हैं। चीनी बेकरी उत्पादों जैसे विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों की संरचना बनाता है। इस्तेमाल किये गये चीनी के रूप के आधार पर गुण बदल जाते हैं।

चीनी के बारे में बड़ा हो-हल्ला क्या है?

कई विशेषज्ञों ने इंसुलिन रेसिस्टेंस, मोटापा, मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसे विभिन्न मोटाबॉलिक विकारों और यहाँ तक कि मधुमेह मेलेटस के लिए चीनी को जिम्मेदार बताया है 

यह कितना सच है? 

हमारी सुस्त जीवन शैली कैलोरी सेवन को प्रमुख दोषी बना देती है। इसका मतलब है कि नियमित शारीरिक गतिविधि जादू कर सकती है।

क्या इसका मतलब है कि हम जब तक व्यायाम करते हैं, तब तक जितनी चाहें, उतनी चीन खा सकते हैं?

यह बहस का मुद्दा है। संयमित रूप से खायी गयी कोई भी चीज स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है। बेशक, संयम एक संदिग्ध शब्द है, जिसकी व्याख्या हर व्यक्ति के लिए अलग होती है।

फिर, चीनी के उपभोग के लिए दिशानिर्देश क्या हैं?

  • डब्लूएचओ के दिशानिर्देशों के अनुसार, कार्बोहाइड्रेट से ऊर्जा का 5% शर्करा से आना चाहिए, जो प्रति दिन लगभग 25 ग्राम (6 चम्मच) हो सकता है। अध्ययनों से पता चला है कि चीनी का अधिक उपभोग का परिणाम अतिसक्रियता, ज्यादा खाना, खाने की अधिक इच्छा और परिवर्तित मानसिक क्रिया-कलाप होते हैं। 
  • अब मान लीजिए कि औसत व्यक्ति एक दिन में 6 चम्मच से कम चीनी खाता है; यानी प्रति कप 2 चम्मच चीनी के साथ 2-3 कप चाय या कॉफी कह सकते हैं।

जोखिम कहाँ है?

मानिए या मत मानिये, लेकिन कुछ छिपी हुई शर्करा है जिनसे हम रोजाना संपर्क में आते हैं। छिपी शर्करा के स्रोत के रूप में सुक्रोज, उच्च फ्रक्टोज कॉर्न सिरप, ग्लूकोज सिरप, माल्टोज और डेक्सट्रोज जैसे कुछ नाम हैं। वे उन विभिन्न खाद्य पदार्थों में मौजूद होते हैं जिनका हम उपभोग करते हैं, जैसे नाश्ते का अनाज, क्रीम बिस्कुट, कार्बोनेटेड पेय, पैकेटबंद फलों का रस, सलाद ड्रेसिंग, चॉकलेट, फलों को जमा कर बनाये गये उत्पाद आदि। इसलिए आपकी रोजाना की शर्करा मात्रा को बढ़ाने वाली छिपी हुई शर्करा को देखने के लिए अगली बार खाद्य लेबल की जाँच करें।

इस चर्चा से यह निष्कर्ष निकालता है कि चीनी मुक्त उत्पाद अत्यधिक उपभोग से बचने में आपकी मदद करेंगे।

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क्या यह सबसे अच्छा समाधान है?

शर्करा मुक्त उत्पाद में फैट अधिक होता है और इसमें कृत्रिम मिठास का उपयोग करते हैं जो सफेद चीनी की तुलना में कई सौ गुना अधिक मिठास प्रदान करता है। वे आपको सफेद चीनी की अतिरिक्त कैलोरी के बिना मिठास का आनंद प्रदान करते हैं। लेकिन, ऐसे अध्ययन हैं जो इसके उपभोग से आँत की माइक्रोफ्लोरा पर प्रतिकूल प्रभाव दिखाते हैं।

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तो वास्तव में सबसे अच्छा समाधान क्या है?

अपने स्वादेंद्रियों का मिठास से अनुकूलन खत्म करें! शैशवावस्था में हम जिस तरह के खाद्य पदार्थों का उपभोग करते हैं, उसके आधार पर स्वाद की प्राथमिकताएँ विकसित होती हैं। परंपरागत रूप से, शिशुओं को शहद दिया जाता था जो बचपन की नाजुक उम्र में मिठास की प्राथमिकता को विकसित करते थे। कम मीठे खाद्य पदार्थों के सेवन से कम उम्र में मीठी वरीयताओं के विकास से बचा जाता है।

अपने आहार में शामिल सफेद चीनी की मात्रा को कम करने की दिशा में बढ़ाया गया एक कदम आपको कई बीमारियों से दूर रखने में मदद करेगा। आज ही अपना शुगर डिटॉक्स शुरू करें!

नोट: यह लेख प्रिस्टीन ऑर्गेनिक्स की सीनियर न्यूट्रिशनिस्ट, श्रुति कुंबला से हुई बातचीत पर आधारित है। 

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