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हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग के नफे-नुकसान

एक्सरसाइज और फिटनेस
By Bharat Malhotra , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 24, 2014
हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग के नफे-नुकसान

इस प्रकार के व्‍यायाम में आप अधिक समय तक व्‍यायाम करने के बजाय, कम समय में काफी कड़ा और अलग-अलग प्रकार का प्‍यायाम करते हैं। इसकी आपकी मांसपेशियों को अधिक शक्ति मिलती है और आप रहते हैं पहले से अधिक फिट और हेल्‍थी।

Quick Bites
  • हाई इंटेंसिटी व्‍यायाम से दिल रहता है दुरुस्‍त।
  • इस व्‍यायाम में कम समय में अधिक कैलोरी खर्च की जाती है।
  • कई बार इस व्‍यायाम से हो सकते हैं कुछ नुकसान भी।
  • किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही करने चाहिए ये व्‍यायाम।

व्‍यायाम के साथ सबसे मुश्किल बात है रोज घंटे भर का समय निकालना। इसी के चक्‍कर में कई लोग व्‍यायाम से कतराते हैं। यदि ऐसा है तो आपके लिए हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (एचआईआईटी) काफी मददगार साबित हो सकती है। यह बात कई वैज्ञानिक शोधों में प्रमाणित हो चुकी है कि दिल की सुरक्षा के लिए हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (एचआईआईटी) मॉडरेट बाउट्स से ज्यादा बेहतर है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें दिल ज्यादा कड़ी मेहनत करता है। उसे अपनी हर धड़कन के साथ अधिक मात्रा में रक्‍त पंप करना पड़ता है। डॉक्टर भी मानते हैं कि एचआईआईटी का असर सभी लोगों पर लगभग एक समान ही होता है।

हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग से आपकी मांसपेशियों में छोटी-छोटी ऊर्जा कोशिकायें बनने लगती हैं, जो शुगर और वसा के लिए ईंधन का काम करती हैं। इन ऊर्जा कोशिकाओं की संख्‍या जितनी अधिक होगी आपकी मांसपेशियां उतने ही बेहतर तरीके से कार्बोहाइड्रेट का इस्‍तेमाल कर पाएंगी। इसके साथ ही शरीर में इनसुलिन संवेदनशीलता में भी इजाफा होता है। इतना ही नहीं इस रक्‍त में शुगर फ्लोट्स की संख्‍या कम हो जाएगी जिससे टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा भी घट जाता है। टाइप टू डायबिटीज दिल की बीमारियों की बड़ी वजह है। एचआईआईटी हमारे रक्‍तचाप को भी काबू में रखने का काम करती है।

cardio exercise

अपनी ताकत में करें इजाफा

अगर आप अपनी मांसपेशियों को बनाए रखने का के लिए प्रयास नहीं करते, तो यकीन मानिए कि उम्र के साथ इनकी ताकत कम होती जाएगी। 35 के बाद पांच फीसदी प्रति दशक के हिसाब से इनका क्षय होने लगेगा। हर गुजरते साल के साथ आपकी मांसपेशियां ढीली पड़ती जाएंगी। रोजाना की एक्सरसाइज में लाइट वेट ट्रेनिंग को शामिल करने से आराम मिलेगा। अच्छे मसल्स न केवल शरीर को डायबिटीज से बचाते हैं, बल्कि रक्‍तचाप को भी नियंत्रित करते हैं। अच्छे मसल्स उनके लिए भी फायदेमंद है जिन्हें बीपी, डायबिटीज और दिल की बीमारियां हों। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के बिना वजन नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है, इसके साथ ही शरीर में जमा अतिरिक्‍त कैलोरी से हृदयाघात की आशंका बढ़ जाती है।


अपनी सीमायें बढ़ायें

मसल्स में जितनी लचक होगी, रक्तवाहिनियां भी उतने ही बेहतर तरीके से काम करेंगी। स्ट्रेच एक्सरसाइज से रक्तवाहिनियों को लचीला बना सकते हैं। स्ट्रेचिंग आपको रिलेक्स करती है। ब्लड प्रेशर कम होता है और साथ ही दिल की बीमारी के खतरे भी कम होते हैं।

क्‍या हैं फायदे

क्‍योंकि एचआईआईटी वर्कआउट में काफी अधिक जोर लगाकर व्‍यायाम किया जाता है, इसलिए आप कम समय में अधिक कैलोरी खर्च करते हैं। कैलोरी खर्च करने का सीधा सा नियम है कि आप जितना अधिक कड़ा व्‍यायाम करेंगे आप उतनी ही अधिक कैलोरी खर्च पाएंगे। इसके सा‍थ ही इस व्‍यायाम से आपकी मांसपेशियों का निर्माण होता है साथ ही मेटाबॉलिज्‍म को भी फायदा होता है। एचआईआईटी का एक लाभ यह भी है कि इसका असर अधिक समय तक बना रहता है। एचआईआईटी में कई प्रकार के व्‍यायाम शामिल होते हैं, तो इससे आपके बोर होने की आशंका भी कम हो जाती है। जब इस व्‍यायाम को समूह में किया जाता है, तो इससे सौहार्द्र भी बना रहता है। और क्‍योंकि हर व्‍यायाम का अपना समय होता है, इसलिए आप दूसरों से इसे लेकर प्रतिस्‍पर्धा भी करते हैं। इससे आप मोटिवेटेड रहते हैं।

 

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क्‍या हैं नुकसान

एचआईआईटी में काफी कड़े व्‍यायाम होते हैं। इसमें कई ऐसे व्‍यायाम भी होते हैं जो उन लोगों के इतने सुरक्षित नहीं माने जाते, जो शारीरिक रूप से अधिक फिट नहीं हैं। ऐसे में उन्‍हें चोट लगने की आशंका काफी अधिक है। व्‍यायाम में बार-बार पोजीशन बदलने से चक्‍कर आने अथवा हाथ-पैर के निचले हिस्‍से में रक्‍त प्रवाह पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही बहुत कम समय में बहुत अधिक व्‍यायाम करने से मांसपेशियों में सूजन हो सकती है। कुछ दुर्लभ मामलों में मांसपेशियों का फाइबर टूटकर रक्‍त में मिल सकता है, जो किडनी को विषाक्‍त बना सकता है।

 

 

कुल मिलाकर देखा जाए तो ये व्‍यायाम आपको कम समय में अधिक और लंबे समय तक रहने वाला फायदा पहुंचाते हैं। लेकिन इसके साथ ही जरूरी है कि आप किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसे करें। वरना कई बार फायदा पहुंचने के स्‍थान पर आपको नुकसान भी हो सकता है।

 

Image Courtesy- Getty Images

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Written by
Bharat Malhotra
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागApr 24, 2014

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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