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    अनिद्रा से आप भी परेशान हैं, तो इन 5 तरीकों से सोएं चैन की नींद

    मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Atul Modi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 26, 2018
    अनिद्रा से आप भी परेशान हैं, तो इन 5 तरीकों से सोएं चैन की नींद

    अनिद्रा के चलते रोगी को पर्याप्त व पूर्ण गुणवत्ता की नींद नहीं आती है और उसके मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालती है। देश में लगभग एक करोड़ लोग ऐसे हैं, जो गंभीर अनिद्रा के शिकार हैं।

    मनोरोग विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी, अबाधित व गहरी नींद आना आपकी स्वस्थ जीवनशैली से संबंधित है। वस्तुत: अनिद्रा या नींद न आना मस्तिष्क संबंधी एक विकार है, जिसे दूर किया जा सकता है...  नींद मानव मस्तिष्क द्वारा संचालित एक बेहद पेचीदा प्रक्रिया है, जो इंसान के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। इसके साथ ही इंसान के जिंदा रहने के लिए भी नींद जरूरी है। अनिद्रा या नींद न आना मानव मस्तिष्क के विकार से जुड़ा सबसे प्रमुख व सर्वाधिक पाया जाने वाला लक्षण है। अनिद्रा के चलते रोगी को पर्याप्त व पूर्ण गुणवत्ता की नींद नहीं आती है और उसके मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालती है। देश में लगभग एक करोड़ लोग ऐसे हैं, जो गंभीर अनिद्रा के शिकार हैं।

    अनिद्रा के प्रकार

    अनिद्रा के विभिन्न प्रकारों और उनके लक्षणों को समझना आवश्यक है।

    स्लीप लैग: इससे ग्रस्त लोगों को रात्रि में लेटने के बाद दो-तीन या चार घंटे तक नींद नहीं आती और देर रात या सुबह कब नींद आई, उन्हें पता ही नहीं चलता। ये रोगी देर से सोने के बाद 6 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लेने के बाद सुबह देर से 10, 11 या 12 बजे ही उठते हैं। रोजमर्रा के तनाव, रातभर नेट व टीवी की लत या लंबे समय से देर तक (सुबह 3 से 4 बजे तक) पढ़ाई करने की आदत के चलते स्लीप लैग की समस्या होती है।

    नाइट टाइम अवेकनिंग:  गंभीर व्यापारिक व पारिवारिक तनाव व किसी आत्मग्लानि के चलते व्यक्ति पहले तो सो जाता है, लेकिन अचानक बीच रात में चौंककर उसकी नींद टूट जाती है, उसका दिल धड़कने लगता है और व्यक्ति के मन में आत्मग्लानि, चिंता व नकारात्मक विचार सक्रिय हो जाते हैं और दोबारा सो नहीं पाता है और कभी-कभी तो वह बिस्तर छोड़कर इधर-उधर सुकून के लिए तड़पता है। तनाव के अलावा पैनिक डिसऑर्डर व जनरलाइज्ड एंग्जाइटी डिसऑर्डर में भी इसी प्रकार से नींंद प्रभावित होती है।

    मॉर्निंग इनसोमनिया: रोगी को रात्रि में लेटने  के बाद नींद आ जाती है, लेकिन सुबह नियत समय से दो तीन घंटे पहले ही अधूरी नींद से व्यक्ति उठ पड़ता है।

    फ्रेगमेंटेड स्लीप: रोगी को पूरी रात नींद टूट-टूटकर आती है। वह पूरी रात न सो पाता है और न ही होश मेंं रहता है और रात भर एक प्रकार की गफलत में रहता है। वह रात भर अनेक परेशान करने वाली हरकतें करता है व सुबह उठने पर बीती रात उसे अपनी कोई भी हरकत याद नहीं रहती है। इस प्रकार की नींद की समस्या शराब व नींद की गोलियों के पुराने लती (जिन्हें अचानक नशा मिलना बंद हो जाए) लोगों को होती है।

    डे टाइम सोम्नोलेंस: अनिद्रा के ऐसे रोगी दिन में ऊंघते रहते हैं और दिन के वक्त कहीं भी बैठे-बैठे भी एक मिनट में खर्राटे लेकर सोने लगते हैं। यहां तक कि इस रोग से ग्रस्त वाहन चालक चलती गाड़ी में सो जाते हैं और दुर्घटना कर बैठते हैं। शरीर से मोटे लोगों में ये समस्या ज्यादा होती है जो रात में जोर के खर्राटों के साथ सोते हैं और स्लीप एप्निया रोग से ग्रस्त होते हैं। ऐसे रोगियों के सोते समय सांस रुक जाने की वजह से रात भर थोड़ी-थोड़ी देर में नींद टूटती है व पूरी रात वे गहरी नींद न आने के कारण दिन भर ऊंघते रहते हैं।
     
    नो स्लीप: रोगी को अचानक से पूरी रात एक पल भी नींद नहीं आती है। अमूमन जिसे रात भर नींद न आए, वह अगले दिन भरपूर सो लेता है लेकिन साइकोसिस से ग्रस्त रोगी अगले दिन भी नहीं सो पाता है। इस रोग में रोगी को नींद की गोलियों से भी नींद नहीं आती है।

    मर्ज का इलाज

    एक अच्छी नींद हमेशा एक अच्छी जीवनशैली की पहचान होती है। इसके लिए स्वस्थ मन, स्वस्थ शरीर व सही दिनचर्या का होना जरूरी है...

    दिनचर्या: हमेशा रात्रि में एक निश्चित समय पर सोना और सुबह लगभग एक ही समय पर उठने की आदत से अनिद्रा से जुड़े सभी विकारों से बचा जा सकता है।

    स्वस्थ हल्का भोजन: हम नाश्ता व दोपहर के समय भारी भोजन भी कर सकते  हैं, लेकिन अच्छी नींद के लिए रात का भोजन हल्का व तेल रहित होना चाहिए। रात में चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक लेना नींद पर विपरीत असर डालता है। रात में एक गिलास गर्म दूध नींद लाने में सहायक होता है।
     
    व्यायाम: दिन में श्रम करना व पर्याप्त व्यायाम करना अच्छी नींद के लिए आवश्यक है।

    नींद की गोलियों से बचें: अनिद्रा के इलाज में नींद की गोलियां या शराब लेना बिल्कुल भी सही नहीं है। यदि आप महीने में पांच बार से अधिक नींद की गोलियां लेते हैं तो आपको निश्चित ही डॉक्टर की सलाह की जरूरत है। हर प्रकार का नशा जैसे धूम्रपान, गांजा, भांग व अन्य ड्रग्स नींद के संचालन को स्थाई रूप से नुकसान पहुंचाते हैं। ये मादक पदार्थ अनेक प्रकार के शारीरिक व मानसिक रोगों को जन्म देते हैं।

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    डॉक्टर की सलाह: यदि आपको अनिद्रा की शिकायत बार-बार होती है, आप नशा या नींद की गोलियां अक्सर लेते हैं, आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को अनिद्रा के अलावा कोई मानसिक रोग है तो अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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