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भावनात्मक रूप से भी प्रभावित करता है बांझपन

डेटिंग टिप्स By Shabnam Khan , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Dec 20, 2014
भावनात्मक रूप से भी प्रभावित करता है बांझपन

इंर्फिटलिटी या बांझपन एक ऐसी समस्या है जब किसी कपल का बच्चा नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति का न केवल उनके शरीर पर बल्कि उनके रिश्ते पर भी प्रभाव पड़ता है।

वर्तमान समय में बांझपन एक सामान्‍य समस्‍या है, यह कोई अभिशाप या शर्मिंदगी की बात नहीं है। यह एक शारीरिक समस्‍या है लेकिन कई लोग इस बात को नहीं समझते हैं और उन्‍हे यह समस्‍या होने पर वह चिंताग्रस्त हो जाते हैं। बच्चा न हो पाना जो शरीर से जुड़ी समस्या है, इसका अक्सर कपल्स पर नकारात्मक भावनात्मक प्रभाव पड़ता है।

कहते हैं कि जब किसी कपल की जिंदगी में उनका बच्चा आता है तो वो भावनात्मक स्तर पर अधिक जुड़ जाते हैं। लेकिन जब मेडिकल कॉम्प्लीकेशन्स की वजह से उन्हें बच्चा पैदा करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है तो वे भावनात्मक स्तर पर टूट भी जाते हैं। इंर्फिटलिटी यानी बांझपन की दिक्कत से न सिर्फ दंपतियों को सामाजिक प्रताडना का भय रहता है, बल्कि कई बार दोनों के आपसी निजी रिश्तों में भी खटास आने का डर रहता है।

 

consoling partner in Hindi

 

बांझपन और मानसिक प्रभाव

पढ़ाई और करियर की वजह से आजकल लड़के-लड़कियां देर से शादी करते हैं। वे शादी करने के तुरंत बाद बच्चा नहीं चाहते। इस वजह से शुरुआत में वह कई तरह की सावधानियां बरतते हैं। लेकिन जब वो बच्चा प्लान कर लेते हैं और उसके बाद महिला जल्दी गर्भधारण नहीं कर पातीं तो वे चिंताग्रस्त हो जाते हैं। निरंतर दबाव में रहने के कारण वह दिन-रात बेचैन रहते हैं।

उन्हें खुद नहीं समझ आता कि पति-पत्नी दोनों स्वस्थ हैं फिर भी गर्भधारण क्यों नहीं कर पा रहे। उन्हें तमाम तरह के तनाव हो जाते हैं। वे निरंतर चिंता, डिप्रेशन फस्ट्रेशन में घुलने लगते हैं जिसका असर उन दोनों की ही सेहत पर पड़ता है। हाल में हुए एक सर्वे के अनुसार जो महिलाएं ज्यादा तनाव में रहती हैं उनमें से 40 प्रतिशत महिलाओं में बांझपन की शिकायत होती है। हालांकि अभी तक इस बात का ठोस प्रमाण नहीं है कि तनाव के कारण ही बांझपन है।

तनाव का कारण ये भी होता है कि बच्चा होने का पारिवारिक और सामाजिक दबाव भी रहता है। हमारे समाज में यह मान्यता प्रचलित है कि जब शादीशुदा जोड़े का बच्चा हो जाता है तभी उसका परिवार पूरा होता है। हर महिला की गोद भरना उसका सौभाग्य माना जाता है और गोद न भर पाना दुर्भाग्य। जब किसी जोड़े को बांझपन का सामना करना पड़ता है तो न केवल वह अपनी मां-बाप बनने की भावनात्मक आवश्यकता के पूरे न हो पाने के कारण मानसिक तनाव झेलता है, बल्कि उसे समाज की भी चिंता रहती है।

बांझपन की समस्या महिला या पुरूष किसी एक से जुड़ी हो सकती है। लेकिन उसके प्रभाव दोनों के रिश्ते पर पड़ते हैं। ऐसे में कई बार ये भी होता है कि लोग अपने पार्टनर को कम अहमियत देने लग जाते हैं। उनके मन में लगातार ये बात चल सकती है कि वो खुद तो ठीक है लेकिन अपने पार्टनर की किसी शारीरिक मजबूरी के चलते मां या पिता नहीं बन पा रहे। ऐसे में दोनों के रिश्ते में कड़वाहट व एक दूसरे से शिकायतें होना आम बात है।

 

Couple in Hindi

 

बांझपन से मानसिक रूप से जूझने के तरीके

 

  • भावनाएं नियंत्रित करें - अगर आप मां नहीं बन पा रही हैं तो दूसरी गर्भवती महिलाओं से जलन न करें। हमेशा उसे शुभकामनाएं दें। अपने दुख को खुलेआम जाहिर करने से बचें। हमेशा सबके सामने अपनी किसी कमजोरी या मजबूरी का रोते रहना न तो आपके लिए अच्छा है न ही दूसरों के लिए।
  • पार्टनर के साथ अच्छा व्यवहार - ऐसे वक्त में आपके पार्टनर की भावनात्मक आवश्यकताएं बहुत बढ़ जाती हैं। अगर आप सही हैं और आपके पार्टनर में यह दोष है तो उसे गिरी हुई निगाह से न देखें। उसके साथ व्‍यवहार में बदलाव न लाएं। उसे अधिक प्यार व स्नेह दें। उसके साथ सामान्य रहें।
  • स्वस्थ रिलेशन रखें: बांझपन का पता लगने के बाद लोगों के साथ अपने रिश्‍तों में बदलाव न लाएं। सभी को खुद के मां न बन पाने का कारण स्‍पष्‍ट कर दें ताकि कोई बार-बार सवाल न करें।
  • काम में मन लगाएं- खुद को व्‍यस्‍त रखना सीखें। जितना ज्यादा आप अपने काम में व्यस्त रहेंगे उतना ही आप बुरी बातों को नहीं सोचगें और न ही खराब खयाल मन में आएंगें।
  • पारदर्शी रहें - अपनी समस्‍या को परिवार के लोगों के साथ बांटें। इससे आपका दुख कम होगा और वह लोग आपका भावनात्‍मक रूप से साथ भी देगें। साथ ही, आपके दुख को समझ कर वो आप पर दबाव भी नहीं बनाएंगे। इससे आपका तनाव कम होगा।


इस बात को समझना बहुत जरूरी है कि बांझपन एक ऐसी समस्या है जो किसी के साथ भी हो सकती है। इसे शरीर के दूसरे रोगों की तरह ही समझना बहुत जरूरी है। साथ ही, ये भी जरूरी है कि आप मेडिकल सहायता लेते रहें। विज्ञान बहुत तरक्की कर चुका है, और लगभग हर चीज़ का इलाज मौजूद है। अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें, और किसी अच्छे चिकित्सक से सलाह लें।



Image Source - Getty Images


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