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बवासीर, कब्ज और अपेंडिक्स से बचाता है इंडियन स्टाइल टॉयलेट, वेस्टर्न से ज्यादा है फायदेमंद

विविध By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Sep 15, 2016
बवासीर, कब्ज और अपेंडिक्स से बचाता है इंडियन स्टाइल टॉयलेट, वेस्टर्न से ज्यादा है फायदेमंद

इंडियन स्टाइल टॉयलेट यानी देसी टॉयलेट आजकल घरों से कम होते जा रहे हैं। वेस्टर्न स्टाइल टॉयलेट ज्यादा स्टाइलिश लगते हैं और आपको आरामदायक भी महसूस होते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि इंडियन स्टाइल टॉयलेट, स्वास्थ्य के लिहाज से आपके लिए ज्यादा फायदेमं

इंडियन स्टाइल टॉयलेट यानी देसी टॉयलेट आजकल घरों से कम होते जा रहे हैं। वेस्टर्न स्टाइल टॉयलेट ज्यादा स्टाइलिश लगते हैं और आपको आरामदायक भी महसूस होते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि इंडियन स्टाइल टॉयलेट, स्वास्थ्य के लिहाज से आपके लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। जी हां, दुनियाभर में हुए तमाम शोधों में इस बात की पुष्टि की जा चुकी है कि इंडियन स्टाइल टॉयलेट में बैठने का जो तरीका है, उससे पेट और मल द्वार से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। वेस्टर्न स्टाइल टॉयलेट पर बैठने के दौरान आपके पेट के मलाशय में मौजूद सारी गंदगी बाहर नहीं निकल पाती है।

बचपन से ही माता-पिता बच्चे को घुटने पर बैठकर पॉटी करना सिखाते हैं, जो प्राकृतिक तौर पर पॉटी करने का सही तरीका है। इंडियन स्टाइल टॉयलेट में जिस पोजीशन में बैठकर पॉटी किया जाता है उसे स्क्वाट (squat) यानि उकड़ूँ पोजीशन कहते हैं। आइए आपको बताते हैं क्यों ज्यादा फायदेमंद है इंडियन स्टाइल टॉयलेट।

इंडियन टॉयलेट है ज्यादा फायदेमंद

  • एक्सरसाइज होती है - इंडियन टॉयलेट में स्क्वाट पोजीशन में बैठ कर पोटी की जाती है जिसमें आपको पैर मोड़ने होते हैं। जिससे हिप्स व घुटने छाती को छूते हैं। इससे पैरों की एक्सरसाइज हो जाती है और मल त्याग करने के लिए किसी भी तरह का प्रेशर नहीं बनाना पड़ता। क्योंकि इस पोज़ीशन में बाकी सारा काम ग्रेविटी से हो जाता है और इसके अलावा आपके शरीर के ऊपरी हिस्से से पेट पर बाहरी और आंतरिक दबाव बनता है जो मल त्याग करने में मदद करता है।
  • अपेंडिक्स का खतरा कम - वेस्टर्न टॉयलेट में मल को बाहर निकालने के लिए पेट पर अधिक जोर लगाना पड़ता है। कई बार इस दबाव के कारण अपेंडिक्स का खतरा बढ़ जाता है। इंडियन टॉयलेट में बैठते समय आपके पेट और पैर के बीच 135 डिग्री का कोण बनता है, जिसके कारण मल त्याग में ज्यादा दबावन नहीं डालना पड़ता है। दरअसल इंडियन स्टाइल टॉयलेट में सीधे पैर से सेकम (cecum) पर और उल्टे पैर से सिग्मोइड कोलन पर दबाव बनता है।

नहीं होती ये बीमारियां

  • बवासीर का खतरा करें कम - इंडियन स्टाइल टॉयलेट में बैठकर पोटी करने से बवासीर का खतरा कम हो जाता है। इस पर जर्नल डिजीज ऑफ दी कोलन एंड रेक्टम में एक अध्ययन भी प्रकाशित हो चुका है, जिसके अनुसार इस पोजीशन में बैठने से एनस और रेक्टम पर दबाव बनता है जिस वजह से मल त्याग में आसानी होती है। मतलब साफ है अगर शरीर में मल जमा रहता है तो आपको कब्ज और बवासीर का खतरा हो जाता है।
  • दूर करें कब्ज की समस्या - इस पोजिशन में बैठकर पोटी करने से कब्ज की समस्या भी दूर हो जाती है। जर्नल यूरिनरी ट्रैक्ट सिम्पटम्स में प्रकाशित हुए एक अध्ययन के अनुसार, इस पोजीशन में बैठकर पॉटी करने से शरीर के बॉउल स्प्रिंग में दबाव बनता है जिससे मल त्याग करने में आसानी होती है और मोशन में सुधार होता है।

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