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गर्भावस्‍था के दौरान यूरीन से संबंधित समस्‍या को कहते हैं असंयम

गर्भावस्‍था By Nachiketa Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 27, 2013
गर्भावस्‍था के दौरान यूरीन से संबंधित समस्‍या को कहते हैं असंयम

गर्भावस्‍था के दौरान कई प्रकार की समस्‍यायें होती हैं, असंयम भी प्रेग्‍नेंसी की एक जटिलता है। जानिए, इंकांटीनेंस के बारे में।

गर्भावस्‍था के दौरान असंयम यानी इंकांटीनेंस की समस्‍या हो सकती है। यह यूरीन से संबंधित समस्‍या है, इस स्थिति में अप्रत्‍याशित और असुविधाजनक तरीके से यूरीन लीक होता है। ज्‍यादातर यह समस्‍या खांसने, छींकने, व्‍यायाम के दौरान होती है।

गर्भवती महिलाअसंयम की समस्‍या ज्‍यादातर पहली बार गर्भधारण करने वाली महिलाओं को होती है। कुछ महिलाओं में असंयम की स्थिति दिन में कई बार होती है। प्रसव के बाद भी यह समस्‍या बनी रहती है। आइए हम आपको ब्‍लैडर से जुड़ी इस समस्‍या के बारे में विस्‍तार से जानकारी देते हैं।

 

असंयम क्या है

हालांकि असंयम (इसे ब्‍लैडर वीकनेस भी कहते हैं) यानी इंकांटीनेंस कई प्रकार का होता है, लेकिन तनाव के कारण गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं को प्रभावित करने वाले कारकों में यह सबसे सामान्‍य है। यह हंसते वक्‍त, छींकने के दौरान, खांसते वक्‍त, व्‍यायाम के दौरान, भारी वस्‍तु उठाने के समय हो सकता है। असंयम होने पर मूत्राशय से बहुत कम मात्रा में यूरीन का रिसाव होता है।

ऐसा माना जाता है कि गर्भवस्‍था के दौरान लगभग दो-तिहाई महिलाओं में तनाव सामान्‍य होता है, यह अतिसक्रिय ब्‍लैडर के कारण होता है। गर्भावस्‍था के दौरान असंयम की समस्‍या में यदि आपका मूत्राशय खाली हो तो भी यूरीन का रिसाव हो सकता है। यदि आपने थोड़ी देर पहले वाशरूम का इस्‍तेमाल किया है फिर भी इंकांटीनेंस होता है। महिला यदि 35 साल की उम्र के बाद गर्भधारण करती है तो उसे इंकांटीनेंस होने की संभावना ज्‍यादा होती है और यह स्थिति प्रसवोत्‍तर भी बनी रहती है।

असंयम के कारण

गर्भावस्‍था के दौरान महिला का वजन बढ़ना निश्चित है और असंयम के लिए बढ़ता हुआ वजन सबसे ज्‍यादा उत्‍तरदायी होता है। तीसरे ट्राइमेस्‍टर में भ्रूण का विकास ज्‍यादा हो जाता है जिसके कारण महिला का वजन लगभग 25-30 पाउंड तक बढ़ जाता है। इस दौरान सबसे ज्‍यादा दबाव मूत्राशय के आसपास की कोशिकाओं पर पड़ता है। इस दबाव के कारण ही ब्‍लैडर के आसपास की मांसेशियां कमजोर हो जाती हैं जिसके कारण असंयम की स्थिति पैदा होती है।

जैसे-जैसे प्रसव का समय नजदीक आता है हार्मोन्‍स शरीर के ऊतकों और जोड़ों को और लचीला बना देते हैं। हार्मोन्‍स में इस प्रकार के परिवर्तन के कारण ही प्रसव के दौरान ज्‍यादा समस्‍यायें नही होती हैं। यही हार्मोन मूत्राशय की मांसपेशियों को भी प्रभावित करते हैं, जिसके कारण ब्‍लैडर कमजोर हो जाता है।

गर्भावस्‍था के दौरान कब्‍ज की समस्‍या भी होती है, जो पेट की श्रोणि पर दबाव डालते हैं। प्रसव के दौरान योनि पर दबाव पड़ने के कारण मूत्राशय के ऊतकों पर असर पड़ता है और समस्‍या और भी खराब हो सकती है।

यदि प्रसव सीजेरियन से हुआ है तो इसका असर सबसे ज्‍यादा मांसपेशियों पर पड़ता है, जिसके कारण मूत्राशय के आसपास की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं और असंयम होता है।

 

यह कब तक रहता है

प्रसव के बाद लगभग 3 से 6 महीने में असंयम की समस्‍या को कम किया जा सकता है। डिलीवरी के बाद जैसे-जैसे महिला का शरीर स्‍वस्‍थ होता जाता है इस तरह के विकार अपने आप ठीक हो जाते हैं। इसलिए डिलीवरी के बाद सबसे ज्‍यादा ध्‍यान खान-पान पर देना चाहिए। जब आपकी श्रोणि की मांसपेशियां मजबूत हो जायेंगी असंयम को रोकने में मदद मिलेगी। पेल्विक फ्लोर और कीगल एक्‍सरसाइज के द्वारा इस असंयम पर काबू पाया जा सकता है।


दवाओं और मेडिकल उपकरणों के द्वारा इस स्थिति पर काबू पाया जा सकता है। इसके इलाज के लिए आप यूरोगाइनीकोलॉजिस्‍ट से सलाह ले सकती हैं।

 

 

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