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महिलाओं में इन 2 कारणों से होता है ऑस्टियोपोरोसिस, जानें बचाव का तरीका

महिला स्‍वास्थ्‍य By Atul Modi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 25, 2019
महिलाओं में इन 2 कारणों से होता है ऑस्टियोपोरोसिस, जानें बचाव का तरीका

इंटरनेशनल ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन का अनुमान है कि पूरी दुनिया में ऑस्टियोपोरोसिस की वजह से लगभग 200 मिलियन महिलाएं प्रभावित हैं। वैसे पुरुषों को भी ऑस्टियोपोरोसिस की समस्‍या हो सकती है लेकिन इससे प्रभावित होन

Quick Bites
  • दुनिया में ऑस्टियोपोरोसिस की वजह से लगभग 200 मिलियन महिलाएं प्रभावित हैं।
  • पुरुषों को भी ऑस्टियोपोरोसिस की समस्‍या हो सकती है!
  • ऑस्टियोपोरोसिस से प्रभावित होने वालों में ज्‍यादातर संख्‍या महिलाओं की है। 

ऑस्टियोपोरोसिस पूरी दुनिया में एक वैश्विक स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या है। ऑस्टियोपोरोसिस, जिसका अर्थ है "छिद्रयुक्‍त हड्डियां", एक ऐसी बीमारी है जोकि हड्डियों को पतला और कमजोर बनाती है, उन्‍हें नाजुक और बिलकुल टूटने जैसी बना देती है। कई देशों में ऑस्टियोपोरोसिस से होने वाला फ्रैक्‍चर बढ़ रहा है। इसका कारण लोगों की लंबी उम्र है। सामाजिक-आर्थिक स्थिति बेहतर होने से रोजमर्रा की शारीकि गतिविधियां कम होना फ्रैक्‍चर की बढ़ते दर की एक वजह माना जा सकता है। इंटरनेशनल ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन का अनुमान है कि पूरी दुनिया में ऑस्टियोपोरोसिस की वजह से लगभग 200 मिलियन महिलाएं प्रभावित हैं। वैसे पुरुषों को भी ऑस्टियोपोरोसिस की समस्‍या हो सकती है लेकिन इससे प्रभावित होने वालों में ज्‍यादातर संख्‍या महिलाओं की है। 

 

ऑस्टियोपोरोसिस से जुड़े कुछ तथ्‍य 

  • पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हड्डी का घनत्‍व कम होता है और जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है उनकी हड्डियां ज्‍यादा जल्‍दी घिसती हैं। 
  • ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम करने के लिये, यह जरूरी है कि महिलाएं मेनोपॉज से पहले हड्डियों का मास ज्‍यादा से ज्‍यादा बढ़ा लें और मोनोपॉज के बाद हड्डियों के घिसने की दर को कम कर लें। गिरने के जोखिम को कम करने से फ्रैक्‍चर की समस्‍या भी कम होगी। 
  • महिलाओं में हड्डियों का मास उनकी जिंदगी के दूसरे दशक में अपने चरम पर होता है। उसके बाद उस चरण से लेकर मेनोपॉज तक धीरे-धीरे हड्डियां घिसती जाती हैं। मेनोपॉज होने पर इसकी दर बढ़ जाती है और कुछ सालों तक मेनोपॉज के साथ-साथ हर साल यह 5 प्रतिशत तक सबसे ज्‍यादा हो सकता है। इसके बाद, यह दर धीरे-धीरे कम हो जाती है।
  • हड्डियों का मास बनने में अनुवांशिकता मुख्‍य कारक होता है, वैसे बहुत सारे ऐसे तरीके हैं, जिससे महिलाएं अपने हड्डियों के मास को बढ़ा सकती हैं। 

ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के उपाय 

  • वजन सहने की शक्ति के अलग-अलग तरीके, उच्‍च तीव्रता वाली गतिविधियां, ऐसी गतिविधियां जिसमें उछलना-कूदना शामिल हो और प्रतिरोधक ट्रेनिंग को भी बढ़ावा मिलना चाहिये। 
  • ऐसी गतिविधियां जिसमें वजन सहन करने की जरूरत नहीं जैसे स्विमिंग और साइकलिंग प्रभावी पाये गये हैं। हड्डियों पर एक्‍सरसाइज का प्रभाव पर्याप्‍त कैल्शियम लेने से बढ़ जाता है। 
  • जरूरत से ज्‍यादा एक्‍सरसाइज करने से ऊर्जा का असंतुलन और मासिक चक्र की अनियमितता, हड्डी के मास पर नकारात्‍मक प्रभाव डाल सकते हैं। विटामिन डी लेने से भी हड्डी के घिसने की समस्‍या को कम करने में मदद मिलती है।
  • फ्रैक्‍चर के लिये गिरना सबसे बड़ा खतरा होता है और उम्र के साथ गिरने का खतरा बढ़ जाता है। गिरने के खतरों में आंखों की रोशनी कम होना, न्‍यूरोलॉजिकल और मस्‍कुलोस्‍केलेटल अक्षमता, मांसपेशियों का कमजोर होना, कुछ खास प्रकार की दवायें, पोस्‍ट्यूरल हाइपोटेंशन, खराब संतुलन, पर्यावरण प्रदूषण, कॉग्‍नेटिव परेशानियां और ठोकर लगना, शामिल हैं। 
  • सुधार योग्‍य कारणों के मूल्‍यांकन और उसे उपचार में ऑस्टियोपोरोटिक फ्रैक्‍चर के खतरे को कम करना शामिल है। इसके लिये टोनिंग प्रोग्राम के साथ प्रोप्रियोसेप्‍शन और बैलेंस ट्रेनिंग किया जाता है। 

यह लेख हील इंस्‍टीट्यूट की स्‍पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्‍ट अक्षता डोरकादी से हुई बातचीत पर आधारित है। 

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Written by
Atul Modi
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागMar 25, 2019

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