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कार्यस्थल पर अगर महिला का होता है यौन शोषण, तो मिलेगी 90 दिन की पेड लीव

Updated at: Mar 22, 2017
आफिस स्‍वास्‍थ्‍य
Written by: Gayatree Verma Published at: Mar 22, 2017
कार्यस्थल पर अगर महिला का होता है यौन शोषण, तो मिलेगी 90 दिन की पेड लीव

केंद्र सरकार ने अपनी महिला कर्मचारियों के सुरक्षा का ध्यान रखते हुए उनके लिए एक विशेष नियम पारित करवाया है। इस नियम के तहत कार्यस्थल पर यौन शोषण का शिकार होने वाली महिला को 90 दिन की पेड लीव मिलेगी।

वर्तमान सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कुछ ज्यादा चिंतित है। इस बात की पुष्टि सरकार द्वारा हाल ही में लिए गए फैसले से होती है। केंद्र सरकार ने अपनी महिला कर्मचारियों के लिए तय किया है कि कार्यस्‍थल पर यौन शोषण की शिकायत करने वाली महिला को 90 दिन की पेड लीव मिलेगी। ये लीव तब तक मिलेगी जब तक मामले की जांच चल रही होगी। इस नियम में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने सेवा नियमावली में आवश्‍यक बदलाव कर दिए हैं। 

 

ये है नया नियम

अगर किसी महिला के साथ कार्यस्‍थल पर यौन उत्पीड़न हुआ हो तो वो रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम-2013 के तहत शिकायत की जांच चलने तक 90 दिन तक का अधिकतम विशेष अवकाश ले सकती है। ये सारी छुट्टियां पेड होंगी अर्थात  इस 90 दिनों के अवकाश के दौरान उसे पूरी सैलरी मिलेगी।

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ये है खास

इस नियम की खास बात ये है कि इन छुट्टियों की भरपाई पीड़िता को दी गई छुट्टियों के खाते से नहीं काटी जाएंगी। 

 


क्‍यों जरूरत पड़ी इस नियम की

इन नियम की जरूरत महिलाओं द्वारा लंबे समय से की जा रही थी। लंबे समय से इस तरह की शिकायत करने वाली महिलाओं का कहना रहा है कि उन्‍हें जांच के दौरान कई प्रकार की धमकियां मिलती रहती हैं। इन्‍हीं की धमकियों को रोकने के लिए और महिलाओं को हर तरह के मानिसक दबाव से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

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ये है शर्त

लेकिन इस नियम में एक विशेष तरह की शर्त भी है। इस नियम में यह प्रावधान भी रखा गया है कि ये छुट्टियां आंतरिक कमेटी की सिफारिश के आधार पर ही दी जाएगी। मतलब की कार्यस्थल पर उस विशेष घटना की जांच करने वाली आंतरिक कमेटी को अगर लगता है कि महिला को छुट्टी दी जानी चाहिए तभी महिला को छुट्टी मिल पाएगी।

 

ये था मामला

इन छुट्टियों वाले नियम की मांग पिछले साल से ही महिला कर्मचारियों के तरफ से हो रही थी। दिसंबर 2016 में डीओपीटी ने कार्यस्थल पर यौन शोषण का शिकार होने वाली महिलाओं के मामलों को लेकर दिशानिर्देश जारी किए थे, जिसके तहत 30 दिनों में केस की जांच पूरी करने की बात कही गई थी। य़ह भी कहा गया था कि किसी भी सूरत में शिकायत किए जाने के 90 दिनों के भीतर जांच पूरी हो जानी चाहिए। इन दिशानिर्देशों को डीओपीटी ने अपनी सेवा नियमावली में बदलाव को जोड़ लिए हैं।

 

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