अल्जाइमर रोग के कारण अब नहीं कम होगी याददाश्त, IIT गुवाहाटी ने खोजा बचाव का नया तरीका

Updated at: May 20, 2020
अल्जाइमर रोग के कारण अब नहीं कम होगी याददाश्त, IIT गुवाहाटी ने खोजा बचाव का नया तरीका

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने अल्जाइमर से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए खोजा नया तरीका।

Vishal Singh
लेटेस्टWritten by: Vishal SinghPublished at: May 20, 2020

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गुवाहाटी (Indian Institute of Technology, Guwahati) के शोधकर्ताओं ने अल्जाइमर (Alzheimer) रोग को लेकर ऐसी चीजों पर काम किया है जो रोग से जुड़ी हानि को रोकने या उसे कम करने में मदद कर सकते हैं। प्रो.विबिन रामकृष्णन, प्रोफेसर, बायोसाइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी गुवाहाटी, और प्रो.हर्षल नेमडे, प्रोफेसर, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी गुवाहाटी के नेतृत्व में उनकी टीम ने अल्जाइमर के न्यूरोकेमिकल प्रिंसिपल्स का अध्ययन किया है और नए तरीके तलाश किए हैं। 

IIT GUWAHATI

अब नहीं जाएगी अल्जाइमर के कारण याददाश्त

आईआईटी गुवाहाटी (IIT Guwahati) की टीम ने ट्रोजन पेप्टाइड्स का इस्तेमाल किया जो न्यूरोटॉक्सिक कणों को दिमाग में रोक सके। इस अध्ययन के परिणाम एसीएस केमिकल न्यूरोसाइंस, रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री के आरएससी एडवांस, बीबीए और न्यूरोपेप्टाइड जैसे पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। इस खतरनाक रोग यानी अल्जाइमर रोग के इलाज को विकास करना विशेष रूप से भारत के लिए काफी जरूरी है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि चीन और अमेरिका के बाद दुनिया में तीसरे नंबर पर अल्जाइमर से पीड़ित लोगों की तादात भारत में सबसे ज्यादा है। जिसमें चार मिलियन से ज्यादा लोग इससे जुड़ी हानि का शिकार हो गए हैं। 

कई दवाएं हो चुकी है विफल

डॉ. रामाकृष्णन जो बीमारी के इलाज के लिए दुनियाभर की कोशिशों में हिस्सा लेते हैं, उनका कहना है कि अल्जाइमर (Alzheimer) रोग के इलाज के लिए लगभग 100 संभावित दवाएं 1998 और 2011 के बीच असफल हो गई हैं, जो दिन प्रतिदिन गंभीरता की स्थिति बनती जा रही है। डॉ. रामाकृष्णन और डॉ. नोमेड ने अल्जाइमर रोग की फैलने से रोकने के लिए पेप्टाइड्स के जरिए कम करने के तरीकों की तलाश की है। 

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ऐसे पाया जाएगा नियंत्रण

साल 2019 में  आईआईटी गुवाहाटी(IIT Guwahati) के वैज्ञानिकों ने पाया था कि कम-वोल्टेज, सुरक्षित बिजली क्षेत्र के प्रयोग से न्यूरोडीजेनेरेटिव अणुओं का निर्माण या उसे फैलने को कम किया जा सकता है जो अल्जाइमर रोग में मेमोरी लॉस का कारण बनते हैं। इस क्षेत्र में काम करते हुए वैज्ञानिकों ने इन न्यूरोटॉक्सिन अणुओं को रोकने के लिए 'ट्रोजन पेप्टाइड्स' का उपयोग करने की संभावना का पता लगाया। डॉ. रामाकृष्णन और मोमेड ने बताया कि हमारे शोध के जरिए एक नया रास्ता निकाला गया है जो अल्जाइमर(Alzheimer) रोग की शुरुआत को बढ़ा सकता है। हालांकि, इस तरह के नए चिकित्सीय दृष्टिकोणों को मानव उपचार में लाने से पहले पशु मॉडल और परीक्षणों की जरूरत होगी। 

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क्या है अल्जाइमर रोग (What is Alzheimer’s disease)

अल्जाइमर रोग मस्तिष्क से जुड़ा एक रोग है जिसके कारण आपके स्मृति, सोच और व्यवहार को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। इसके साथ ही ये परिवर्तन दैनिक जीवन में हस्तक्षेप करते हैं। अल्जाइमर एसोसिएशन के अनुसार, अल्जाइमर रोग में 60 से 80 प्रतिशत डिमेंशिया के मामले होते हैं। 65 साल की उम्र के बाद इस बीमारी से पीड़ित लोगों को निदान मिलता है। अगर इससे पहले इसका निदान किया जाता है, तो यह आमतौर पर शुरुआती अल्जाइमर रोग के रूप में जाना जाता है।

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