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ये 6 लक्षण बताते हैं कि ओवर-एक्टिव हो गया है आपका थायरॉइड, जानें क्या है हायपरथायरॉइडिज्म

अन्य़ बीमारियां By अनुराग अनुभव , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 20, 2012
ये 6 लक्षण बताते हैं कि ओवर-एक्टिव हो गया है आपका थायरॉइड, जानें क्या है हायपरथायरॉइडिज्म

थायरॉइड ग्रंथि के ओवर-एक्टिव हो जाने की समस्या को हायपरथायरॉइडिज्म कहते हैं। आमतौर पर बिना कारण तेजी से वजन घटना और हर समय थकान इसका लक्षण है। जानें इस रोग के बारे में जरूरी बातें।

थायरॉइड को आम भाषा में रोग कह दिया जाता है, मगर असल में ये आपके गले में मौजूद एक ग्रंथि है, जो शरीर के लिए जरूरी थायरॉक्सिन हार्मोन का निर्माण करती है। जब किसी व्यक्ति की थायरॉइड ग्रंथियां सामान्य से ज्यादा थायरॉक्सिन हार्मोन्स का निर्माण करने लगती हैं, तो इसे ओवर एक्टिव थायरॉइड या हायपरथायरॉइडिज्म कहते हैं। थायरॉइड ग्रंथियों के ज्यादा एक्टिव हो जाने के कारण मरीज के शरीर का मेटाबॉलिज्म काफी बढ़ जाता है, जिसके कारण उसका वजन तेजी से घटने लगता है और दिल की धड़कन असामान्य रहने लगती है। नजरअंदाज करने पर ये समस्या खतरनाक हो सकती है। मेडिकल एक्सपर्ट्स थायरॉइड को साइलेंट किलर मानते हैं, क्योंकि ये बीमारी धीरे-धीरे खतरे को बढ़ाती जाती है।

कैसे पहचानें हायपरथायरॉइडिज्म को

जब आपके शरीर में तेजी से थायरॉक्सिन हार्मोन बनने लगता है तो हो सकता है कि आपके शरीरे में कई बदलाव आने लगते हैं, जैसे- तेजी से वजन कम या अधिक होना, हृदयगति तेज होना, ज्यादा पसीना आना या नर्वस महसूस करना व मूड में बदलाव आना। या फिर यह भी हो सकता है कि आपको कोई लक्षण न दिखाई दे और जब आपका डॉक्टर किसी अन्य कारण की वजह से कुछ टेस्ट करवाए तो उसमें हायपरथायरॉइडिज्म का पता चले।

इसे भी पढ़ें: इन 10 संकेतों से पहचानें आपका थायरॉइड ओवरएक्टिव है या अंडरएक्टिव

हायपरथायरॉइडिज्म क्या है

हायपरथायरॉइडिज्म होने पर घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि इसका इलाज आसानी से किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है नियमित जांच व कुछ सावधानियां बरतने की। उसके बाद फिर से स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। हायपरथायरॉइडिज्म की वजह से हृदय संबंधी व हड्डियों संबंधी गंभीर समस्या हो सकती है जिसे थाइरॉइड स्टॉर्म कहते हैं।

हायपरथायरॉइडिज्म के कारण

  • ग्रेव्स रोग हायपरथायरॉइडिज्म की बड़ी वजह है। इसमें थायरॉइड ग्रंथि से थायरॉइड हार्मोन का स्राव बहुत अधिक बढ़ जाता है। ग्रेव्स रोग ज्यादातर 20 और 40 की उम्र के बीच की महिलाओं को प्रभावित करता है हालांकि रोगियों में 12% पुरुष हैं। क्योंकि ग्रेव्स रोग आनुवंशिक कारकों से संबंधित वंशानुगत विकार है, इसलिए थाइराइड रोग एक ही परिवार में कई लोगों को प्रभावित कर सकता है।
  • विनाइन (नॉनकैन्सरस) थाइराइड ट्यूमर, जो कि अनियंत्रित ढंग से थाइराइड हार्मोन की बढ़ी हुई मात्रा को निकालता है।
  • विषाक्त मल्टीनोडूलर गण्डमाला (गोईटर), ऐसी अवस्था जिसके कारण थायरॉयड ग्रंथि, कई विनाइन (नॉनकैन्सरस) थाइरोइड ट्यूमर की वजह से बड़ी हो जाती है और थायरॉयड हार्मोन के स्राव की मात्रा को बढ़ा देती है।

हायपरथायरॉइडिज्म के लक्षण

  • अचानक बिना कारण वजन का घटने लगना
  • हर समय कमजोर या थका हुआ महसूस करना।
  • सांस लेने में समस्या, हृदय गति बढ़ना, हाथों का कांपना
  • ज्यादा पसीना आना, गर्मी लगना, त्वचा मे खुजली व लालिमा पैदा होना।
  • बाल झड़ने की समस्या होना।
  • पर्याप्त भोजन लेने के बाद भी तेजी से वजन कम होना। 

अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपंर्क करें और उसे इन लक्षणों के बारे में बताएं।

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