सम्मोहन थेरेपी: बंद हो जाएंगे बुरे सपने

Updated at: Jan 30, 2017
सम्मोहन थेरेपी: बंद हो जाएंगे बुरे सपने

अगर आपको नींद में बुरे सपने आते हैं या फिर आप पोस्ट ट्रामैटिक स्ट्रैस डिसऑर्डर के शिकार हैं और इलाज करवा-करवा कर थक गए हैं तो सम्मोहन थैरेपी अपनाएं।

Gayatree Verma
अन्य़ बीमारियांWritten by: Gayatree Verma Published at: Sep 05, 2016

संध्या रोज आधी रात में डर के कारण जग जाती थी। उसे नींद में उसके सपने डराते थे। जिसके कारण वो फिर दोबारा सो नहीं पाती थी। इन बुरे सपनों के कारण वो किसी काम में मन भी नहीं लगा पा रही थी। शुरू में तो संध्या ने इन सपनों को बुरा सपना मानकर इग्नोर कर दिया। लेकिन जब समस्या दिन पर दिन बिगड़ते गई तो वो अपने चिकित्सक के पास गई। तब संध्या के चिकित्सक ने उसे बताया कि वो ‘पोस्ट ट्रामैटिक स्ट्रैस डिसऑर्डर’ से ग्रस्त है। उसके चिकित्सक ने उसे दवाईयों के साथ स्मोहन थैरेपी अपनाने को कहा। सम्मोहन का नाम सुनते ही संध्या पहले तो घबराई लेकिन उसके चिकित्सक ने उसे समझाया की ये केवल अच्छे के लिए है। तब जाकर संध्या ने सम्मोहन थैरेपी अपनाई। इस थैरेपी से उसके महीनों से आने वाले बुरे सपने पंद्रह दिनों में ही बंद हो गए।

अगर संध्या की तरह आपको भी आपके बुरे सपने डराते हैं तो एक बार अपना चेकअप कराएं। क्योंकि बुरे सपने आना ‘पोस्ट ट्रामैटिक स्ट्रैस डिसऑर्डर’ का एक लक्षण है।

‘पोस्ट ट्रामैटिक स्ट्रैस डिसऑर्डर’ क्या है?

तो आइए इस लेख में ‘पोस्ट ट्रामैटिक स्ट्रैस डिसऑर्डर’ औऱ इससे छुटकारा दिलाने वाली सम्मोहन थैरेपी के बारे में विस्तार से जानें।

‘पोस्ट ट्रामैटिक स्ट्रैस डिसऑर्डर’

नींद में बार-बार बुरे सपने आने की स्थिति को ‘पोस्ट ट्रामैटिक स्ट्रैस डिसऑर्डर’ कहते हैं। इसमें इंसान आधी रात में ही डर से जग जाता है और दोबारा सोने में काफी डरता है। इन सपनों के कारण वो किसी काम में ध्यान भी नहीं लगा पाता।  ये एक मानसिक बीमारी है। इस बीमारी से ग्रस्त मरीज चिड़चिड़ा हो जाता है और हर छोटी-छोटी बात पर गुस्सा करने लगता है।


‘पीटीएसडी’ एक मानसिक समस्या है, जिसमें दिमाग में पुरानी बातें चलती रहती हैं और दिमाग उसपर अपनी प्रतिक्रिया देने लगता है। या यूं कहें कि मरीज का दिमाग पुरानी किसी पुरानी वाली स्थिति ( जो उसके याद में सबसे बुरी हो) में होता है।

(क्या आपको भी आता है छोटी बातों पर गुस्सा? )

 

क्या है कारण

हाल ही में हुई एक रिसर्च में पता चला है कि किसी भी तरह की पारिवारिक समस्या या वो स्थिति जिसपर आप चाहकर भी कुछ नहीं पा रहे हैं तो, वो आपकी दिमाग में हमेशा चलते रहती है। जब उस समस्या या याद के बारे में आपका दिमाग ज्यादा सोचने लगता है तो पीटीएसडी के होने की संभावना उत्पन्न होती है।

 

पीटीएसडी के लक्षण:

  • आधी नींद में जगना
  • नींद में पसीना आना
  • नींद में बुरे सपने देखना
  • सपने में एक घटना का बार-बार दिखना या याद आना
  • डर, घबराहट और चिंता में बने रहना
  • मांसपेशियों में दर्द
  • भूलने की परेशानी
  • ध्यान केंद्रित नहीं कर पाना
  • अचानक तेज गुस्सा और कभी-कभी हिंसक होना

(गुस्से को ना बनने दें अपनी आदत)

 

क्या है इलाज

  • मरीज की समस्या में जल्द से जल्द सुधार लाने के लिए चिकित्सक ‘मूड एलिवेटर’ थेरेपी का इस्तेमाल करते हैं।
  • यह एक सम्मोहन (हिप्नोसिस) थैरेपी है जिसमें मरीज को सम्मोहित किया जाता है।
  • मनोचिकित्सकीय तकनीक कागनेटिव बिहेवरल थेरेपी से भी इस बीमारी का इलाज किया जाता है।

 

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