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थायरॉइड ग्रंथि के ज्यादा एक्टिव होने के क्या हैं संकेत, जानें रोग की जांच के 5 तरीके

अन्य़ बीमारियां By अनुराग अनुभव , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Nov 30, 2012
थायरॉइड ग्रंथि के ज्यादा एक्टिव होने के क्या हैं संकेत, जानें रोग की जांच के 5 तरीके

Tests to Diagnose Hyperthyroidism: जानें ओवर-एक्टिव थायरॉइड की समस्या यानी हायपरथायरॉइडिज्म होने पर कौन से संकेत इसका इशारा हैं और कैसे कर सकते हैं इस गंभीर रोग की जांच।

हमारे शरीर में ढेर सारी छोटी-बड़ी क्रियाओं के लिए हार्मोन्स जिम्मेदार होते हैं। ये ऐसे केमिकल्स होते हैं, जो शरीर में अलग-अलग फंक्शन करने में अंगों की मदद करते हैं। ऐसा ही एक बेहद जरूरी हार्मोन है थायरॉक्सिन, जो गले के पास मौजूद एक ग्रंथि बनाती है, जिसे थायरॉइड कहते हैं। थायरॉइड ग्रंथि में किसी तरह की समस्या आ जाए, तो शरीर के फंक्शन्स में भी परेशानी आने लगती है। कई बार ये थायरॉक्सिन ग्रंथि शरीर की जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है। ऐसी स्थिति को हायपरथायरॉइडिज्म कहते हैं।

हायपरथायरॉइडिज्म के लक्षण आम बीमारियों के लक्षण जैसे होते हैं, इसलिए इनकी पहचान करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इस अवस्था में रोगी को भूख लगती है लेकिन पर्याप्त भोजन करने के बाद भी वजन में गिरावट देखी जा सकती है। इसके अलवा नींद नहीं आना, थकान महसूस होना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से सम्‍पर्क करें।

हायपरथायरॉइडिज्म (ओवर-एक्टिव थायरॉइड) की जांच

हायपरथायरॉइडिज्म का असर चूंकि पूरे शरीर पर होता है और इसके कारण आपका वजन बिना किसी कारण घटने लगता है, इसलिए इसे नजरअंदाज करना आपके लिए खतरनाक हो सकता है। थायरॉइड के इलाज के लिए इन बातों का ध्यान रखें-

लक्षणों की जांच

डॉक्टर के पास जाने पर वो आपके द्वारा बताए गए लक्षणों की जांच करेगा जिसके बाद ही यह सुनिश्चित होगा कि यह हायपरथायरॉइडिज्म के लक्षण है या नहीं। दिल की धड़कन की अनियमित गति, पसीना आना, नर्वस होना, अत्यधिक गर्मी होना, वजन में गिरावट, अनिद्रा की समस्या इसके मुख्य लक्षण माने जाते हैं।

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शारीरिक जांच

इस जांच में बढ़ी हुई थायरॉइड ग्रंथि, उभड़ी हुई आखें, रैशेज होना, नब्ज की गति, हाथों को कांपना व मांसपेशियों की कमजोरियों के बारे में पता लगाया जाता है। जिसके बाद ही यह सामने आएगा कि रोगी हायपरथायरॉइडिज्म का शिकार है।

रक्त जांच

रक्त जांच के जरिए रक्त में थायरॉइड हार्मोन के स्तर के बारे में पता लगाया जाता है। इससे रक्त में टी3 व टी4 की मात्रा का पता लगाया जाता है। हायपरथायरॉइडिज्म में इन दोनों में से किसी एक हार्मोंन का या दोनों हार्मोंन का स्तर रक्त में सामान्य से ज्यादा होता है।

थायरॉइड एंटीबॉडीज परीक्षण

इस जांच का प्रयोग गर्भवती महिलाओं में थायरॉइड का पता लगाने के लिए किया जाता है।

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रेडियोएक्टिव आयोडीन जांच व थायरॉइड स्कैन

इस जांच में रक्त से थायरॉइड ग्रंथि द्वारा एकत्र किए गए आयोडीन की मात्रा का पता लगाया जाता है। रोगी के थायरॉइड में आयोडीन की मात्रा से पता चलता है कि हायपरथायरॉइडिज्म के पीछे क्या वजह है। जैसे अगर आयोडीन की मात्रा कम है तो यह थायरोइडिटिस और अगर आयोडीन की मात्रा ज्यादा है तो यह ग्रेव्स रोग की ओर संकेत करता है। थायरॉइड स्कैन यह दिखाता है कि थायरॉइड में कैसे और कहां-कहां आयोडीन की मात्रा पहुंची है। नोड्यूल्स के चित्र व अन्य संभावित अनियमिताओं के जरिए हायपरथायरॉइडिज्म का पता लगाया जा सकता है।

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