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जरूरत से ज्यादा आता है पसीना, तो इस तरह निपटें इससे

अन्य़ बीमारियां By मिताली जैन , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 13, 2018
जरूरत से ज्यादा आता है पसीना, तो इस तरह निपटें इससे

आमतौर पर लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते और न ही किसी विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक समझते हैं। जबकि वास्तव में यह एक मेडिकल कंडीशन है, जिसका उपचार संभव है। तो अब आपको शर्मिन्दगी उठाने की आवश्यकता नहीं है। जानते है

गर्मी व उमस के मौसम में शरीर से पसीना आना लाजमी है, लेकिन अगर आपको कुछ जरूरत से ज्यादा ही पसीना आए, कपड़े हरदम भीगे रहें या फिर किसी से हाथ मिलाने से भी पहले टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करना पड़े तो यकीनन यह आपको बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा। आमतौर पर लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते और न ही किसी विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक समझते हैं। जबकि वास्तव में यह एक मेडिकल कंडीशन है, जिसका उपचार संभव है। तो अब आपको शर्मिन्दगी उठाने की आवश्यकता नहीं है। जानते हैं अत्यधिक पसीना आने के कारण और उसके निदान के बारे में-

 

पसीना या हाइपरिड्रोसिस

शरीर से पसीना आना व अत्यधिक पसीना आने की स्थिति अलग-अलग होती है। अत्यधिक पसीना आने की स्थिति को आमतौर पर, हाइपरिड्रोसिस कहा जाता है। पसीना शरीर की एक सामान्य प्रतिक्रिया है, जब आप कड़ी मेहनत करते हैं और फिर आपकी बॉडी कूल डाउन होती है। अगर व्यक्ति का शरीर अलग तरीके से काम करता है, इसलिए कुछ लोगों को सामान्य से अधिक पसीना आता है। हालांकि अत्यधिक पसीना आने से सेहत पर किसी तरह का विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन इसके कारण व्यक्ति अक्सर परेशानी व उलझन की स्थिति में रहता है।  

समझें कारण

दिल्ली के अपोलो हास्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन डॉक्‍टर सुरनजीत चटर्जी बताते हैं कि अत्यधिक पसीना आने के पीछे कई बार नर्वस सिस्टम का भी हाथ होता है। बहुत से लोग ऐसे होते हैं, जिनके हथेलियों व पैरों के पंजे पर बहुत अधिक पसीना आता है। ऐसा तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली में मामूली खराबी आ जाने के कारण होता है। लेकिन इससे परेशान होने या घबराने की कोई आवश्यकता होती है। इस समस्या के निदान के लिए शल्य चिकित्सा द्वारा उस पसीने ग्रंथि को हटा दिया जाता है, जिससे व्यक्ति को फिर भविष्य में अत्यधिक पसीना आने की शिकायत नहीं होती।

इसके अतिरिक्त मनुष्य की कुछ मेडिकल कंडीशन भी अत्यधिक पसीना आने का कारण बनती हैं। मसलन, मेनोपॉज, गर्भावस्था, थॉयराइड, डायबिटीज, ट्यूबरकुलोसिस, स्टोक, पार्किसंस रोग, हार्ट फेलयर, ल्यूकेमिया व लिम्फोमा जैसे कैंसर, जरूरत से ज्यादा चिंता करना व कुछ विशेष दवाओं के सेवन से व्यक्ति को आवश्यकता से अधिक पसीना आता है। 

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मिलें डॉक्‍टर से

यूं तो पसीना आने का उपचार कुछ घरेलू तरीकों द्वारा भी संभव है। लेकिन कुछ लक्षण ऐसे होते हैं, जो यह बताते हैं कि अब आपको एक बार चिकित्सक का परामर्श ले लेना चाहिए। जैसे-

  • अगर रात को सोते समय भी पसीने आएं 
  • आपके शरीर के केवल एक साइड ही पसीने से भीग जाए
  • शरीर के हर अंग में जरूरत से ज्यादा स्वेटिंग हो
  • किसी दवाई के सेवन की शुरूआत के बाद जरूरत से ज्यादा पसीना आए
  • या फिर एकदम आपको इतना पसीना आए, जिसे संभालना आपके लिए मुश्किल हो जाए।

कारगर हैं उपचार

यूं तो अत्यधिक पसीना आने की समस्या पूरी तरह खत्म करने के लिए सर्जिकल प्रोसेस ही किया जाता है, लेकिन हाइपरिड्रोसिस के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए अन्य कई तरह के उपचार किए जा सकते हैं। जैसे डॉक्‍टर की सलाह पर आप कुछ स्पेर, लोशन, रोल-ऑन आदि का प्रयोग कर सकते हैं, यह पसीना आने की समस्या को काफी हद तक कंटोल करते हैं।

इसके अतिरिक्त विद्युत आवेग के जरिए भी हाइपरिड्रोसिस का उपचार किया जाता है। इस टीटमेंट में निम्न स्तर के विदयुग आवेग का प्रयोग करके पसीना ग्रंथियों को अक्षम किया जाता है। हालांकि यह उपचार केवल कुछ समय के लिए ही कारगर साबित होता है।

वहीं कुछ दवाईयां व बोटोक्स के इंजेक्शन भी अस्थायी रूप से उन नसों को रोकता है, जो शरीर में अत्यधिक पसीना आने के लिए जिम्मेदार होती है।

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