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परीक्षा के तनाव को कैसे कम करें? जानें एक्‍सपर्ट टिप्‍स

Updated at: Mar 19, 2019
तन मन
Written by: अतुल मोदीonlymyhealth editorial teamPublished at: Mar 19, 2019
परीक्षा के तनाव को कैसे कम करें? जानें एक्‍सपर्ट टिप्‍स

जब परीक्षाएँ करीब होती हैं तो इसके साथ ही परीक्षा का भयानक तनाव आता है जो आपके बच्चे की क्षमता को अत्यधिक कमजोर कर देता है। हल्का तनाव, जिसे यूस्ट्रेस के रूप में भी जाना जाता है, ज्ञान संबंधी कार्यों और प्रदर्शन

जब परीक्षाएँ करीब होती हैं तो इसके साथ ही परीक्षा का भयानक तनाव आता है जो आपके बच्चे की क्षमता को अत्यधिक कमजोर कर देता है। हल्का तनाव, जिसे यूस्ट्रेस के रूप में भी जाना जाता है, ज्ञान संबंधी कार्यों और प्रदर्शन में फायदेमंद है, लेकिन लगातार उच्च स्तर का तनाव बने रहने से अंतत: ऐंगजाइटी (चिंता, व्यग्रता) और डिप्रेशन (अवसाद) जैसी न्यूरोसाइकीऐट्रिक बीमारियाँ हो सकती हैं।

परीक्षा की चिंता छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने की हद तक नुकसान पहुँचा सकती है और चरम स्थिति में आत्महत्या की भी सूचना मिली है। परीक्षाएँ कॉर्टिसोल और एड्रेनेलिन जैसे तनाव संबंधी हार्मोनों के स्तर को बढ़ा सकती हैं, जो आपके बच्चे को लड़ने या पलायन की स्थिति में ले जा सकती हैं। इसलिए, वे अक्सर अपने सुरक्षात्मक घेरे में सिमट जाते हैं या अत्यधिक घबराहट के साथ प्रतिक्रिया करते हैं। 

 

आपका बच्चा किन कारणों से तनावग्रस्त महसूस कर सकता है

शोध बताते हैं कि परीक्षाएँ इन प्राथमिक कारणों के परिणामस्वरूप तनावपूर्ण हो जाती हैं (डेंसकॉम्ब, 2000): 

परिणाम: 

छात्र अक्सर अपने शैक्षणिक प्रदर्शन को व्यावसायिक परिणामों के साथ से जोड़ते हैं। उनके लिए पर्याप्त अंक हासिल करना उनके भावी पेशेवर जीवन में उनकी सफलता से बहुत अधिक जुड़ा हुआ है। 

स्वाभिमान के निशान:  

युवा किशोरों में ग्रेड हासिल करने की उनकी क्षमता के आधार पर खुद को आँकने की प्रवृत्ति होती है। उच्च ग्रेड का मतलब ज्यादा स्वाभिमान है। आजकल छात्रों के भीतर यह भावना घर कर जाने का पैटर्न दिखता है कि स्वाभिमान को शैक्षिक उपलब्धि के जरिये बढ़ाया जा सकता है। 

दूसरों की राय: 

यह अक्सर देखा गया है कि समाज की राय छात्रों के प्रदर्शन को बहुत नुकसान पहुँचाती है और उन पर अनुचित दबाव डालती है। अवास्तविक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दोस्तों और माता-पिता की उच्च अपेक्षाएँ आपके बच्चे के लिए तनाव का मुख्य स्रोत हो सकती हैं। 

तनावग्रस्त होने के लक्षण: 

आप अपने बच्चे या छात्रों में तनाव की शुरुआत या गंभीरता का अनुमान इन कारकों के आधार पर लगा सकते हैं। जानने-समझने की क्षमताओं, व्यवहारात्मक प्रदर्शन या जोश-खरोश की सामान्य व्यवहार में कोई बदलाव खतरे का निशान है जिस पर फौरन ध्यान दिये जाने की जरूरत होती है।

ज्ञान संबंधी लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:

  • याददाश्त संबंधी समस्याएँ
  • एकाग्र होने में असमर्थता
  • खराब फैसले
  • निराशावाद
  • चिंता या एक के बाद एक तेजी से आते विचार
  • लगातार चिंता करना

भावनात्मक लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • अवसाद या आमतौर पर दुखी रहना
  • चिंता और घबराहट
  • अस्थिर चित्त, चिड़चिड़ापन, या क्रोध
  • अकेलापन और एकांत
  • अन्य मानसिक या भावनात्मक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ

शारीरिक लक्षणों में अक्सर शामिल होते हैं:

  • वेदना और दर्द
  • दस्त या कब्ज
  • मतली, चक्कर आना
  • सीने में दर्द, तेजी से हृदय धड़कना
  • बार-बार सर्दी या फ्लू

व्यवहारात्मक लक्षण: 

  • ज्यादा या कम खाना
  • अत्धिक या बहुत कम सोना
  • दूसरों से बचना
  • जिम्मेदारियों को टालना या उपेक्षा करना
  • रिलैक्स होने के लिए शराब, सिगरेट, या ड्रग्स का उपयोग करना
  • उत्तेजनापूर्ण आदतें (जैसे नाखून चबाना, तेज चलना) 
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सामना करने के कार्य-उन्मुख उपाय 

सबसे पहले एक कार्य उन्मुख प्रतिक्रिया को तय करने की जरूरत होती है। इसमें किसी व्यक्ति को स्वयं में या आस-पास उचित बदलाव करना शामिल है। उदाहरण के लिए, परीक्षा से पहले बढ़िया तैयारी छात्र को आगामी परीक्षाओं के लिए आवश्यक आत्मविश्वास प्राप्त करने में मदद कर सकती है। समय के अनुसार दोहराने की योजना बनाना या सिलेबस के प्रति निश्चिंत हो जाना मददगार हो सकता है।

पर्याप्त सामाजिक सहयोग

आमने-सामने बात करने या प्रोत्साहन के शब्द बोलने जैसे साधारण कार्य आपके मित्र को खुद पर भरोसा और आत्मविश्वास प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं। इससे उन्हें अपने अस्थिर चित्त और असुरक्षा बोध का सामना करने में भी मदद मिल सकती है। इसलिए, अपने दोस्त या छात्र के साथ क्वालिटी टाइम बिताने से उसके मिजाज के साथ-साथ प्रदर्शन में भी सुधार होगा।

माता-पिता का सहयोग

आमतौर पर माता-पिता अपने बच्चों के ज्यादा निकट होते हैं और उनकी कमजोरियों और शक्तियों को जानते हैं। अपने बच्चे से बात करना और सलाह देना एक सहायक वातावरण बना सकता है जो उसे अपना सर्वश्रेष्ठ देने में मदद करेगा। बच्चे को हतोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए और उसे एक सकारात्मक वातावरण दिया जाना चाहिए। किसी भी कीमत पर अन्य छात्रों के साथ तुलना करने से बचना चाहिए।

बढ़ते रहो

अपनी गतिविधि के स्तर को बढ़ा देना आपके बच्चे को तनाव देने वाले नकारात्मक विचारों के दुष्चक्र से बाहर निकाल कर उसके मिजाज को दुरुस्त करने के साथ ही साथ उसे चिंताओं से दूर करने में सहायक हो सकता है। यदि आप मन लगाकर व्यायाम करते हैं तो लयबद्ध व्यायाम जैसे चलना, दौड़ना, तैरना, और नाचना विशेष रूप से प्रभावी हैं।

रिलैक्स होने की तकनीकें

आप अपने जीवन से तनाव को पूरी तरह से समाप्त नहीं कर सकते हैं, लेकिन आप यह नियंत्रित कर सकते हैं कि यह आपको कितना प्रभावित करे। योग, ध्यान और गहरी साँस लेना शरीर के रिलैक्स होने की क्रिया को सक्रिय करता है और इसलिए यह रिलैक्स करने की सबसे अच्छी तकनीकों में से एक है। जब इसका नियमित रूप से अभ्यास किया जाता है, तो ये गतिविधियाँ आपके रोजमर्रा के तनाव के स्तर को कम कर सकती हैं और दबाव में शांत और एकाग्र बने रहने की क्षमता को बढ़ा सकती हैं। 

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शरीर और मन के लिए आहार

आप जो खाते हैं, उसका आपकी मनोदशा से सीधा संबंध होता है और जीवन के तनावों से निपटने की आपकी क्षमता को प्रभावित करता है। प्रोसेस्ड और सुविधाजनक भोजन, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, और शक्कर युक्त स्नैक्स आहार से तनाव के लक्षण गहरा सकते हैं, जबकि ताजे फल और सब्जियों, उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर आहार से आप जीवन के उतार-चढ़ाव का बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं।

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पर्याप्त नींद

नींद को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इसका अभाव तनाव को बढ़ा सकता है और तर्कसंगत रूप से सोचने की क्षमता को बाधित कर सकता है। परीक्षा के दौरान विशेष रूप से 6-8 घंटे की गहरी नींद आपके बच्चे को अधिक उत्पादक और भावनात्मक रूप से संतुलित बना सकती है। 

हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि परीक्षाएँ अपरिहार्य तनावों के रूप में कार्य करती हैं और चिकित्सा शिक्षकों, अभिभावकों, स्कूल के साथ-साथ छात्रों को तनाव के नकारात्मक परिणामों से अवगत कराया जाना चाहिए। हालाँकि तनावग्रस्त छात्रों को कुशल रिलैक्स कार्यक्रम के साथ-साथ परामर्श सेवाएँ दी जानी चाहिए ताकि वे परीक्षा के तनाव का बेहतर तरीके से सामना कर सकें। फिर भी, चरम स्थितियों के मामले में मनोवैज्ञानिक या स्वास्थ्य चिकित्सक से जल्द से जल्द परामर्श लेना सर्वश्रेष्ठ दृष्टिकोण है।

यह लेख स्पर्श हॉस्पिटल के मनोवैज्ञानिक डॉ. अरबाज मुश्ताक से हुई बातचीत पर आधारित है। 

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