• shareIcon

सर्दियों में अपने बच्चे को फ्लू से ऐसे बचाएं!

लेटेस्ट By ओन्लीमाईहैल्थ लेखक , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Dec 28, 2016
सर्दियों में अपने बच्चे को फ्लू से ऐसे बचाएं!

इंफ्लुएंजा (फ्लू) वायरल बुखार है जो सर्दियों के दौरान बच्चों में आम तौर पर हो जाता है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता होने की वजह से बच्चे इसका शिकार जल्दी हो जाते हैं।

इंफ्लुएंजा (फ्लू) वायरल बुखार है जो सर्दियों के दौरान बच्चों में आम तौर पर हो जाता है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता होने की वजह से बच्चे इसका शिकार जल्दी हो जाते हैं।

अचानक बुखार हो जाना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और बेचैनी के साथ साथ खराब गला, सरसराहट, नाक बहना और सांस प्रणाली की समस्याएं होना आदि सामान्य फ्लू के लक्षण हैं। बच्चों में फ्लू के लक्षण जुकाम और सांस प्रणाली के ऊपरी हिस्से के संक्रमण जैसे ही होते हैं। इससे मिचली, उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं।

flu in kids

इंडियन मेडिकल असोसिएशन (आईएमए) के मनोनीत अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने बताया, 'फ्लू बहुत तेजी से फैलता है, खासकर तब जब बच्चे स्कूल के बंद कमरों में रहते हैं। जब किसी की छींक या खांसी से निकले नमी कण हवा के जरिए फैलते हैं तो सांस के जरिए दूसरे बच्चों के अंदर भी चले जाते हैं या फिर जब बच्चे नाक से बहने वाले मवाद या संक्रमित थूक के संपर्क में आते हैं। बच्चे को इससे बचाने का सबसे आसान तरीका है सालाना वैक्सीनेशन। पैरेंट्स को इस बारे मे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।'

इसके बिगड़ने से कानों से मवाद निकलना, दमा और निमोनिया जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। बिगड़ा हुआ निमोनिया गंभीर और तेजी से जानलेवा हो सकता है, खास तौर पर जब स्टाफ बैक्टीरिया मौजूद हो। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि सभी लक्षण बच्चों में हों, सब में अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं। आम तौर पर इसका बुखार एक सप्ताह से दस दिन तक होता है।

डॉ. अग्रवाल बताते हैं, 'सर्दियों में जिन बच्चों को बुखार हो, बुखार के साथ सांस प्रणाली की समस्याएं हों, बुखार के साथ सीने में जकड़न की वजह से सांस लेने में समस्या हो, निमोनिया हो, 100 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा बुखार हो, तीव्र खांसी या खराब गला हो तो उन बच्चों में फ्लू होने की आशंका रहती ही है। 95 प्रतिशत मामलों में 39 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बुखार होता है और 77 प्रतिशत मामलों में खांसी और बहती नाक होती है।'

उन्होंने बताया कि इलाज अक्सर लक्षणों के अनुसार ही किया जाता है। डॉक्टर की सलाह अनुसार ऐसी स्थिति में बच्चे को पैरासीटामोल की खुराक 48 घंटे तक देते रहना चाहिए और उसे ज्यादा से ज्यादा आराम करने, तरल आहार लेने, खास तौर पर गर्म तरल आहार लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए। एक बात गौर करने वाली है कि फ्लू वायरस की वजह से होता है, उसमें एंटीबायोटिक का कोई फायदा नहीं होता, बल्कि एंटीबायोटिक लेने से पेट खराब और दस्त हो सकते हैं।

 

Image Source:ModernMom&Nashville Parent's

News Source: IANS


Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK