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बच्चों में डायबिटीज के लक्षणों को पहचानें

डायबिटीज़ By Bharat Malhotra , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 23, 2014
बच्चों में डायबिटीज के लक्षणों को पहचानें

मधुमेह की समस्या सिर्फ बड़ों की ही नहीं बच्चों को भी अपनी चपेट में ले सकती है। अपने लाडलों को इस बीमारी से  बचाने के लिए जरूरी है कि बच्चों में डायबिटीज के दिखने वाले लक्षणों के बारे में जान लिया जाए।

डायबिटीज को अक्‍सर अधिक उम्र के साथ जोड़कर देखा जाता है। लेकिन, अब यह रोग बच्‍चों में भी फैलता जा रहा है। हालांकि, माता-पिता बच्‍चों में इस रोग को लेकर गंभीर नहीं होते, इसलिए वे इसके लक्षणों की ओर ध्‍यान भी नहीं देते। लेकिन, ऐसा करना बच्‍चों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो सकता है।

 

Juvenile Diabetesमाता-पिता के लिए बच्‍चों में डायबिटीज के लक्षणों को समय रहते पहचानना बहुत जरूरी है, अन्‍यथा इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। डायबिटीज के कारण शरीर में होने वाले बदलाव काफी धीमे और सूक्ष्‍म होते हैं, इसलिए जब तक बच्‍चा काफी बीमार नहीं होता, तब तक इस बीमारी को पकड़ पाना आसान नहीं होता। आमतौर पर वह किसी अन्‍य बीमारी के संयोजन से बीमार होता है, लेकिन जांच में डायबिटीज का होना सामने आता है।  

तो माता-पिता को कैसे पता चले कि उनके बच्‍चे को डायबिटीज है। इसके लिए जरूरी है कि आप अपने बच्‍चे की सेहत पर नजर रखें और इन लक्षणों को अनदेखा न करें-


पेशाब अधिक आना

डायबिटीज के दौरान ग्‍लूकोज कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता, इसलिए रक्‍त में ग्‍लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है। नतीजा यह होता है कि किडनी अतिरिक्‍त शर्करा को फिल्‍टर करने लगती है। इससे पेशाब की मात्रा बढ़ जाती है। इसलिए आपका बच्‍चा पहले से अधिक बार पेशाब करने जाने लगता है। यह बच्‍चों में डायबिटीज होने का सबसे सामान्‍य लक्षण है।


अधिक प्‍यास लगना

अब क्‍योंकि आपका बच्‍चा अधिक बार पेशाब करने जाने लगता है, इसलिए उसे पहले से अधिक प्‍यास लगती है। आमतौर पर माता-पिता यह सोचते हैं कि क्‍योंकि बच्‍चा अधिक पानी पी रहा है, इसलिए अधिक पेशाब कर रहा है, लेकिन हकीकत इससे उल्‍टी होती है।


भूख बढ़ना

डायबिटीज से पीडि़त बच्‍चे हमेशा भूख लगने की शिकायत करते हैं। इसके पीछे सीधा सा कारण है, क्‍योंकि ग्‍लूकोज शरीर की कोशिकाओं में नहीं पहुंच रहा होता, इसलिए उसे हमेशा भूख का अहसास होता रहता है।


वजन कम होना

आमतौर पर लोग वजन बढ़ने को डायबिटीज के साथ जोड़कर देखते हैं। टाइप टू डायबिटीज में, अधिक मोटे व्‍यक्ति को डायबिटीज होने का खतरा अधिक होता है। टाइप वन अथवा बच्‍चों को होने वाली डायबिटीज इससे अलग होती है। अगर बच्‍चों में डायबिटीज का इलाज न करवाया जाए, तो उनका वजन कम होने लगता है। क्‍योंकि शरीर को पर्याप्‍त मात्रा में ग्‍लूकोज नहीं मिलता, इसलिए भी वजन घटने लगता है।



अगर आपको अपने बच्‍चे में इनमें से किसी भी प्रकार का लक्षण नजर आए, तो उसे फौरन डॉक्‍टर के पास ले जाएं क्‍योंकि ये लक्षण डायबिटीज के अलावा अन्‍य कारणों से भी हो सकते हैं। अगर डॉक्‍टर को संशय हो कि आपके बच्‍चे को डायबिटीज है, तो वह रक्‍त जांच से इस बात की पुष्टि कर सकता है। एक बार जब डायबिटीज की पुष्टि हो जाती है, तो माता-पिता को इस बात का अहसास होता है कि वे काफी समय से इन लक्षणों को देखकर अनदेखा कर रहे थे।


अगर डायबिटीज का इलाज न करवाया जाए, तो यह बच्‍चों को जीवनभर की परेशानियां दे सकती है। इसके लघुगामी प्रभावों में हाई ब्‍लड शुगर, लो ब्‍लड शुगर, डायबिटीज केटोएसिडोसिस (पेशाब में किटोन्‍स की मात्रा बढ़ना) ओर कोमा आदि शामिल हैं। वहीं दीर्घगामी प्रभावों में मुख्‍य संवहिनी और तंत्रिका प्रणाली को नुकसान होना, जिससे आंखों की रोशनी भी जा सकती है, किडनी फैल्‍योर, अंग-विच्‍छेदन और हृदयाघात अथवा स्‍ट्रोक का खतरा बढ़ना आदि शामिल हैं।

अब क्‍योंकि बच्‍चे इस बीमारी के दीर्घगामी प्रभावों को नहीं समझ सकते, लेकिन यह माता-पिता की जिम्‍मेदारी है कि वे बच्‍चों का पूरा खयाल रखें। तकनीक और इलाज की उन्‍नत पद्धतियों का होने के कारण डायबिटीज से पीडि़त बच्‍चे अब स्‍वस्‍थ और लंबा जीवन जी सकते हैं।

 

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Disclaimer:

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