बच्चों में निराशा का क्या कारण है? अपने बच्चों को सिखाएं निराशा से निपटना

Updated at: Jun 21, 2020
बच्चों में निराशा का क्या कारण है? अपने बच्चों को सिखाएं निराशा से निपटना

आजकल बच्चे बहुत जल्दी निराश हो जाते हैं। आइए आपको बताते हैं कि बच्चों में निराशा का क्या कारण है और बच्चों को किस तरह से बताएं खुश रहना।

सम्‍पादकीय विभाग
परवरिश के तरीकेWritten by: सम्‍पादकीय विभागPublished at: Jun 21, 2020

स्कूल से आने के बाद रोहन काफी सुस्त था और काफी देर तक अपने कमरे से बाहर भी नहीं आया। जब उसकी मां ने पूछा तो उसने बताया ,"इस बार मैं रेस में सैकेंड आया हूं"। इस पर उसकी मां ने कहा ,"तो क्या हो गया !अगली बार थोड़ा और मेहनत करना! तो तुम फर्स्ट भी आ जाओगे"! विशेषज्ञों की मानें तो मां के इस जवाब ने बच्चे को सही दिशा दी। उसे निराश होने से बचाया। अब कम से कम रोहन असफलता से घबराकर  निराशा की ओर नहीं जायेगा।

आज कल के बच्चे मन चाहा परिणाम न मिलने पर बहुत जल्दी निराश व दुखी हो जाते हैं। ऐसे में उनके दिमाग में नकारात्मक विचार आते हैं। इस के चलते वो जल्दबाजी में कुछ गलत फैसले भी ले लेते हैं । जिन की वजह से उन्हें बाद में पछताना पडता है। ऐसे समय में बच्चे को किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है जो उन्हे समझा सके कि निराशा से कैसे निपट सकते हैं।

इधर आत्म हत्या के केस बढ़ें हैं। जिनका कारण भी यही है निराशा और हताशा। आइये जानते हैं कि किस प्रकार पैरेंट्स अपने बच्चों को निराशाजनक स्थिति से उबरने में मदद कर सकते हैं।

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लक्ष्य निर्धारण

हमें बच्चों को समझाना होगा कि लक्ष्य सिर्फ उतना ही निर्धारित करें जिस को पूरा कर सकें। व उस को पूरा करने के लिए पूरी मेहनत करें। क्योंकि परिणाम उतना ही मिलेगा जितनी मेहनत उसमें लगेगी।

असफलता से न घबरायें

यदि एक आद बार उन्हें मन चाहे परिणाम न मिलने पर निराशा भी हासिल हो ,तो उन्हे उस का सामना करना सिखाइए और समझाइए कि सफलता प्राप्त करने में बाधाएं तो आती ही हैं।

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कारण तलाशें

उनको किस वजह से निराशा हासिल हुई है वो कारण खोजना सिखाइए। ताकि भविष्य में वो और अच्छे से तैयारी करें व एक गलती को बार बार न दोहराएं।

हार का सामना

उनको हार से अवगत कराएं क्योंकि वो जब तक हार नहींं देखेंगे तब तक उन्हें जीत की कीमत नहीं पता चलेगी।

प्रेरित करें

अपने बच्चों का मनोबल बढाएं। आप किसी भी महान आत्मा की जीवन गाथा सुना कर, अपने बच्चे को प्रेरित कर सकते हैं। जब बच्चों को लगेगा कि यदि ये किरदार सब कर सकता है तो वे क्यों नहीं।

छोटे-छोटे टारगेट दे

छोटे-छोटे टारगेट दे तो उनमें सकारात्मक सुधार होगा। बच्चों को आज के जमाने की प्रतियोगिता से अवगत कराएं। उनके लिए कोई लक्ष्य निर्धारित करें जोकि वो आसानी से पूरा कर सकते हैं!

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पुरस्कृत करें

उनके पूरा करने पर उनको पुरस्कृत करें। ऐसा करने से बच्चे का आत्म बल बढेगा। ऐसा ही किसी मुश्किल लक्ष्य में सफल होने पर भी करें।

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खुश रहने की वजह जाने

बच्चे को समझाएं खुश रहने की वजह ढूंढना। यदि आप अपने बच्चे का मनोबल बढाने में सफल हो जाते हैं तो आप के बच्चे की आधी परेशानियां तो यहीं खत्म हो जाती हैं। अब वह पूरी मेहनत से काम करेगा और यदि हार भी गया तो निराश नहीं होगा।

कई बार इस समय में बच्चे कुछ गलत फैसले ले कर अपनी जिंदगी को पूरी तरह नष्ट कर लेते हैं। उन को जरूरत होती है एक परामर्शदाता की जो उन को सही दिशा दे। जिंदगी जीने का ढंग बदल दे। हमें अपने बच्चों को कुछ इस तरह से निराशा से निपटना सिखाना होगा कि वो आगे से किसी भी छोटी मोटी बात को ले कर निराश व हताश न हो कर बैठे बल्कि मजबूती से स्थिति का सामना करे।

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