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संगीत की लत छुड़ाने के लिए आजमायें ये तरीके

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 26, 2016
संगीत की लत छुड़ाने के लिए आजमायें ये तरीके

music addiction in hindi : संगीत एक मायाजाल है जिसमें आजकल के युवा बुरी तरीके से फंसते नजर आ रहे हैं और इसके कारण कई गंभीर बीमारियां भी हो रही हैं, इसलिए समय रहते इस एडिक्‍शन से बाहर निकलने की जरूरत है। संगीत की लत छुड़ाने के तरीकों के बारे

म्यूजिक से मन को सुकून और नसों को आराम देने के साथ-साथ शरीर को भी स्‍वस्‍थ रखा जा सकता है। पसंद के सुर और ताल सुनने से प्रेरणा देने वाले हार्मोन डोपामीन और खुशी के हार्मोन एंड्रोफीन का स्राव होता है। इससे लोगों को सुरक्षा का एहसास होने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि आजकल के युवाओं को आईपॉड या मोबाइल से म्‍यूजिक सुनने की ऐसी लत लग गई हैं कि वह हर समय म्‍यूजिक सुनने के लिए ईयरफोन या हेडफोन लगाये रहते हैं। पैरेंट्स से लेकर टीचर या सहयोगियों तक की डांट खाते हैं कि सुनाई देना बंद हो जाएगा, रेडियोएक्टिव तरंगें दिमाग को नुकसान पहुंचाती हैं, और न जाने क्‍या-क्‍या।

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आज लगभग पचास प्रतिशत युवाओं में कान की समस्या का कारण ईयरफोन्स का अत्यधिक प्रयोग है। डॉक्टरों का यह भी मानना है कि तेज म्‍यूजिक सुनने या ईयरफोन ज्यादा उपयोग लेने से कानों में अनेक प्रकार की समस्याएं जैसे कान में छन-छन की आवाज आना, चक्कर आना, सनसनाहट, नींद न आना, सिर और कान में दर्द आदि मुख्य है।


कई बार तो संगीत की लत के चलते ईयरफोन लगाकर गाने सुनने का शौक जानलेवा साबित हुआ है। एक बार सीमा नाम की एक युवती ईयरफोन लगाकर गाने सुनते हुए रेलवे ट्रैक पार कर रही थी कि इसी दौरान ट्रेन ने उसे चपेट में ले लिया। इसी तरह से इन कुछ सालों में ईयरफोन से कान खराब होने के मामले और सड़क पर ईयरफोन्स के इस्तेमाल से होने वाली दुर्घटनाएं का लेवल बढ़ गया है। लेकिन हम इस बात से अनजान हैं कि युवाओं का यह शौक कुछ ही सालों में गंभीर परेशानी के रूप में सामने आ सकता है। आइए इस आर्टिकल के माध्‍यम से संगीत की लत के नुकसान और छुड़ाने के उपायो के बारे में जानें।


संगीत की लत छुड़ाने के उपाय

  • अपने आसपास ऐसे युवाओं को तो आपने जरूर देखा होगा, जो लगातार कानों में ईयरफोन लगाए रहते हैं... शायद आप भी ऐसा ही करते होंगे। लेकिन संगीत सुनने के लिए ईयरफोन्स के लगातार प्रयोग से सुनने की क्षमता 40 से 50 डेसीबेल तक कम हो जाती है। कान का पर्दा वाइब्रेट होने लगता है। दूर की आवाज सुनने में परेशानी होने लगती है। यहां तक कि इससे बहरापन भी हो सकता है।
  • म्‍यूजिक सुनने के लिए ईयरफोन का इस्तेमाल कम से कम करने की आदत डालें। अगर आपको घंटों ईयरफोन लगाकर काम करना है, तो हर एक घंटे पर कम से कम 5 मिनट का ब्रेक लें। या 60/60 का फॉर्मूला अपनायें यानी साठ मिनट तक साठ प्रतिशत वॉल्यूम पर संगीत सुनें, फिर साठ मिनट का ब्रेक लें। इस तरह से कानों और दिमाग दोनों को आराम मिलता है। कान में दर्द या दिमागी थकान जैसी शिकायतें नहीं होतीं।
  • अच्छी क्वालिटी के हेडफोन्स या ईयरफोन्स का प्रयोग करें और ईयरबड की बजाय ईयरफोन्स का प्रयोग करें, क्योंकि यह बाहरी कान में लगे होते हैं।
  • एक्सपर्ट मानते हैं कि इयर बड कानों को ईयरफोन से ज्यादा नुकसान पहुंचाते है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि इयरबड सामान्य वॉल्यूम को आठ गुना बढ़ा कर हमारे कानों तक पहुंचाते है, जिससे कानों में नुकसान की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है, इसलिए बिना इयर बड वाले ईयरफोन या हेडफोन का इस्तेमाल करें। साथ ही ऐसे र्इयरफोन का चयन न करें, जो कानों की गहराई तक जाता हो। इससे भी कान को नुकसान हो सकता है।
  • तेज आवाज में संगीत सुनने से आप मानसिक समस्याएं से तो ग्रस्‍त होते ही हैं, साथ ही दिल के रोगों और कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है़। उम्र बढ़ने के साथ बीमारियां सामने आने लगती है़, क्‍योंकि यह बाहरी भाग के कान के पर्दें को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ अंदरूनी हेयरसेल्स को भी तकलीफ पहुंचाता है़।  
  • इसलिए आपको यह जानना बहुत जरूरी है कि आमतौर पर कान 65 डेसिबल की ध्वनि को ही सहन कर सकता है। लेकिन ईयरफोन पर अगर 90 डेसिबल की ध्वनि अगर 40 घंटे से ज्यादा सुनी जाए तो कान की नसें पूरी तरह डेड हो जाती है।
  • वॉल्यूम की फ्रीक्वेंसी बार-बार बढ़ाने की आदत से बचें। अमूमन लोग मीडियम लेवल पर गाने सुनते हैं, लेकिन भीड़-भाड़ वाले इलाके में गये नहीं कि लगे वॉल्यूम को बढ़ाने। ऐसा न करें। ऐसी स्थिति में थोड़ी देर संगीत न सुनें।
  • साथ ही एक ही कान में ईयरफोन लगा कर संगीत न सुनें। संगीत सुनने के लिए दोनों कानों का इस्तेमाल करें। युवा अक्सर आईपॉड या एमपी-3 फुल वॉल्यूम पर बजाते हैं। लेकिन उन्‍हें समझना चाहिए कि संगीत कम वॉल्यूम पर सुनना चाहिए, जिस पर आराम से सुना जा सके, न कि उस वॉल्यूम लेवल पर, जिसकी सुविधा आईपॉड या एमपी 3 में मिली है।
  • अच्छी क्वालिटी का ईयरफोन इस्तेमाल करें। आपके कानों में जाने वाली आवाज की क्वालिटी जितनी अच्छी होगी, आपकी सेहत को उतना कम नुकसान होगा। लगातार एक या डेढ़ घण्टे से ज्यादा संगीत न सुनें। वॉल्यूम कम रखें। कई युवा अक्सर रात को इयर फोन लगाकर सो जाते हैं, इससे बचें।

अगर कानों में घण्टी बजने की शिकायत हो, बार-बार सांय-सांय की आवाज सुनाई दे, दूसरों की आवाज साफ न सुनाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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Image Source : Getty

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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