प्रेग्‍नेंसी में हृदय रोगों के खतरे को कम करते हैं ये 4 पोषक तत्‍व और एक्‍सरसाइज

Updated at: Jan 21, 2020
प्रेग्‍नेंसी में हृदय रोगों के खतरे को कम करते हैं ये 4 पोषक तत्‍व और एक्‍सरसाइज

प्रेग्‍नेंसी में महिलाओं को कई परिवर्तनों और उनसे होने वाली जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि, जीवनशैली में बदलाव कर इससे निपटा जा सकता है।

Atul Modi
महिला स्‍वास्थ्‍यWritten by: Atul ModiPublished at: Jan 21, 2020

प्रत्‍येक महिला के लिए गर्भावस्‍था (Pregnancy) का समय बहुत ही खास होता है। हालांकि यह जटिलताओं के बिना संभव नहीं है। मां के शरीर में कई प्राकृतिक प्रक्रियाएं होती हैं जो बाद में गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती हैं, अगर ध्‍यान न दिया जाए। दुनिया भर के विशेषज्ञ इस अवधि को शरीर के नेचुरल परीक्षण के तौर पर देखते हैं। इस दौरान होने वाले कुछ परिवर्तनों में 'रक्त प्रवाह में वृद्धि' एक महत्वपूर्ण परिवर्तनों में से एक है, जो हृदय पर अतिरिक्त दबाव का कारण बन सकता है, यह अक्सर रक्तचाप (Blood Pressure) या रक्त शर्करा (Blood Sugar) के स्तर में अस्थायी हमले का कारण बनता है। ये स्वस्थ और प्राकृतिक परिवर्तन हैं जो बढ़ते भ्रूण को पोषण प्रदान करने के लिए होते हैं। ये पूरी तरह से सामान्य हैं, और कई महिलाओं के लिए, ये मुद्दे प्रसव के बाद (Post-delivery) खत्‍म हो जाते हैं। 

लेकिन, ऐसी महिलाओं की संख्‍या बढ़ रही है, जिनमें ये परिवर्तन हृदय रोगों (Cardiovascular Disease) और डायबिटीज (Diabetes) की संभावनाओं को बढ़ा रहे हैं। यदि वे अनियंत्रित रहते हैं, तो भ्रूण को भी इस तरह की संभावना काफी बढ़ जाती है। गर्भावस्था के दौरान हृदय रोगों का सामना करते हुए महिलाओं में निम्‍नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं। 

  • हार्ट रेट का बढ़ना 
  • सांस लेने में परेशानी होना और छाती में दर्द 
  • थकान 
  • चक्‍कर आना 

इन स्थितियों से निपटने गर्भवती महिलाओं को अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाने की जरूरत है। कुछ जरूरी आहार है, जिन्‍हें अपनी डाइट में शामिल करने और रेगुलर एक्‍सरसाइज करने से उपरोक्‍त सभी समस्‍याओं से छुटकारा मिल सकता है।

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गर्भावस्‍था में जरूरी पोषक तत्‍व

1. जिंक

मांस और शिल्फ़िश (सीपदार मछली) जिंक के बेहतरीन स्रोत हैं। शाकाहारियों को विशेष रूप से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे अपने आहार के माध्यम से जिंक की आवश्यक मात्रा प्राप्त करें, क्योंकि वे आम तौर पर प्रोटीन में कम होते हैं। बीज और नट्स के साथ दाल, और सेम जैसे फलियां जिंक के वैकल्पिक स्रोत हैं।

2. फोलिक एसिड

सभी महिलाएं जो प्रेग्‍नेंट हैं, उन्हें हर दिन 400 माइक्रोग्राम (0.4 मिलीग्राम) फोलिक एसिड की आवश्यकता होती है, जो अंडे, नट्स, बीन्स, खट्टे फल, पत्तेदार सब्जियां, फोर्टिफाइड ब्रेकफास्‍ट और विशिष्ट विटामिन सप्लीमेंट्स में पाए जाते हैं। गर्भाधान के बाद पहले 28 दिनों के दौरान फोलिक एसिड भी आवश्यक होता है। 

3. आयरन

आयरन के सेवन से गर्भावस्था के दौरान भ्रूण की जरूरतों के लिए शरीर में आयरन स्टोर करने में मदद मिलती है। मीट, पोल्ट्री, मछली, फलियां और पत्तेदार हरी सब्जियां आयरन से भरपूर होती हैं और इन्हें गर्भावस्था से पहले के आहार में शामिल करना चाहिए।

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4. बी विटामिन

बी विटामिन चमत्कारी पूरक हैं जो भ्रूण के दिमाग और शरीर के स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक हैं। ये आठ अलग-अलग विटामिन हैं जो शरीर को विभिन्न तरीकों से मदद करते हैं; जिनमें से कुछ में स्वस्थ वृद्धि और अंगों का कार्य, स्वस्थ त्वचा, नसों और पाचन को बढ़ावा देना, ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए कार्बोहाइड्रेट का टूटना, लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण और जन्म दोषों में कमी शामिल है। साबुत अनाज, हरी सब्जियां, चिकन, अंडे की जर्दी, दूध और मछली जैसे खाद्य पदार्थ बी विटामिन के अच्छे स्रोत हैं और इन्हें आहार में शामिल किया जाना चाहिए।

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गर्भावस्‍था में एक्‍सरसाइज

एक स्वस्थ गर्भावस्था के लिए, नियमित शारीरिक गतिविधि जरूरी है। शारीरिक गतिविधि से गर्भपात, जन्म के समय कम वजन या जल्दी प्रसव होने का खतरा नहीं होता है। हालांकि, माताओं से यह उम्मीद की जाती है कि वे अपने प्रसूति विशेषज्ञ के साथ व्यायाम पर चर्चा करें। व्यायाम महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मां और बच्चे दोनों को निम्नलिखित लाभ प्रदान करता है:

  • पीठ दर्द को दूर करता है 
  • कब्ज दूर करता है
  • गर्भावधि मधुमेह, प्रीक्लेम्पसिया और सिजेरियन डिलीवरी के जोखिम को कम होता है 
  • एक्‍सरसाइज के दौरान गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ वजन बढ़ता है
  • एक्‍सरसाइज से ओवर ऑल फिटनेस, दिल और रक्त वाहिकाओं मजबूत होती हैं 
  • अपने डॉक्‍टर से बात कर एक्‍सरसाइज की सलाह ले सकती हैं

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