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जानें एक्‍सरसाइज करने के लिए कैसे प्रेरित करती है टॉक थेरेपी

जानें एक्‍सरसाइज करने के लिए कैसे प्रेरित करती है टॉक थेरेपी
Quick Bites
  • एक्सरसाइज का बहुत अच्छा ऑप्शन है टॉक थैरेपी।
  • इसे एक्सेपटेंस एंड कमिटमेंट थैरेपी (एसीटी) कहते हैं।
  • यह थैरेपी फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाने में सहायक है।
  • इससे असहज शारीरिक सेंसेशन होती है कंट्रोल।

अगर आपको एक्सरसाइज करना बिल्कुल पसंद नहीं तो आप टॉक थैरेपी से फायदा उठा सकते हैं। टॉक थैरेपी नकरात्मक एहसासों और असहज सेंसेशन को दूर करने में मदद करती है। हाल ही में आए शोध में इस थैरेपी को एक्सेपटेंस एंड कमिटमेंट थैरेपी, एसीटी ( acceptance and commitment therapy, ACT) कहा गया है। ये थैरेपी लोगों की फिजिकल एक्टिविटी का लेवल बढ़ाती है औऱ उन्हें फिट रखने में मदद करती है। ये उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो पहले बिल्कुल भी एक्सरसाइज नहीं करते थे।

 

एसीटी थैरेपी के फायदे

  • एसीटी थैरेपी माइंडफुलनेस के तरीके सीखाता है। इसका मतलब है कि ये इंसान को उनके विचारों और एहसासों के बारे में औऱ अधिक सतर्क और जागरुक करता है।
  • इससे लोग असहज शारीरिक सेंसेशन को कंट्रोल करना सीखते हैं।
  • मतलब की एसीटी के माध्यम से इन सेंसेशन को शरीर अपनाता है और उसे बरदाश्त करने के लिए तैयार होता है।


आस्ट्रेलिया में हुई 2015 की स्टडी के अनुसार एसीटी उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद है जो असहज सेंसेशन और लो फिजिकल एख्टिविटी से गुजर रहे होते हैं और एक्सरसाइज करना बिल्कुल पसंद नहीं करते। इसके साथ ही वे इसके माध्यम से अपने विचारों को एक दिशा देने में मदद करते हैं।  स्टडी की मुख्य सदस्यों में से एक प्रोफेसर कोक्स-मार्टिन कहती हैं कि, यह लोगों को अपने कोर वैल्यू को पहचानने में मदद मिलती है। इसके साथ ही अपने व्यवहार में सुधार करने के लिए भी प्रोत्साहन मिलता है जिससे उनके वैल्यू में बढ़ोतरी हो।

उदाहरण के लिए, अगर कोई कहता है कि वो ताकतवर बनना चाहता है जिससे कि वो अपने पोते के साथ खेल सके तो इसका मतलब है कि उनके लिए एक्टिव ग्रैंडपैरेंट बनना काफी जरूरी है। इसके लिए वो अपनी एक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रेरित होगा। इस तरह से वो हल्की-फुल्की एक्सरसाइज कर खुद को मेंटेन रखना शुरू करेगा।

मार्टिन ने नोट किया है कि एसीटी लोगों को उनकी एक्सरसाइज के बारे में राय बदलने के लिए मजबूर नहीं करता बल्कि जीवन की महत्वपूर्णता को समझाने में मदद करता है। तब वो इंसान अपनी जीवन के महत्व को समझते हुए उस अनुसार खुद को फिट रखने के लिए प्रेरित होता है।

मार्टिक ने खुद एक स्टडी की है जो अक्टूबर 2015 में प्रकाशित हुई थी। इस एसीटी थैरेपी को 24 सुस्त लोगों पर आजमाया गया। इस फिटनेस कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने बात करना शुरू किया। इस थैरेपी के बाद ही प्रतिभागियों ने हफ्ते में तीन बार एक्सरसाइज करना शुरू किया।

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि सारे प्रतिभागियों ने 10 हफ्तों में ही सारे एक्सरसाइज सेशन पूरे कर लिये थे। जबकि उनको  30 सेशन में से कम से कम 27 सेशन करने की हिदायत दी गई थी। साथ ही उनके चलने में सुधार हुआ। जैसे कि वो पहले आधा कोस चलने में एक मिनट से अधिक का समय लगाते थे जबकि इस सेशन के बाद से कम समय लगाने लगे।

 

स्टडी की लिमिटेशन

इस स्टडी की एक लिमिटेशन है कि इसका कोई कंट्रोल समूह नहीं है। दूसरे शब्दों में एसीटी की एक स्टडी के अध्ययनकर्ता अपने परिणामों की दूसरे एसीटी की स्टडी के परिणामों से तुलना नहीं करते हैं। वैसे भी, अध्ययनकर्ताओं को कहना है कि ये थैरेपी लोगों को उनकी फीजिकल एक्टिविटी को बढ़ाने में मदद करती है।

 

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Written by
Gayatree Verma
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागMay 31, 2016

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