गहरा दुख आपको मानसिक ही नहीं, इन 5 शारीरिक समस्याओं का भी बना सकता है शिकार

Updated at: Nov 20, 2019
गहरा दुख आपको मानसिक ही नहीं, इन 5 शारीरिक समस्याओं का भी बना सकता है शिकार

एक कहावत है कि चिंता पर समय रहते ही काबू नहीं पाया गया, तो व्यक्ति चिता में बदल सकता है। यानी कि अगर आप ज्यादा दुखी और चितिंत रहते हैं, तो इसका आपके मन पर ही नहीं बल्कि शरीर पर भी बुरा असर पड़ेगा। आइए हम आपको बताते हैं कि दुख का आपके शरीर पर क्या

Pallavi Kumari
तन मनWritten by: Pallavi KumariPublished at: Nov 20, 2019

दुख और सुख हम सभी के जीवन का एक अहम हिस्सा है। सभी के पास इसके अपने व्यक्तिगत कारण है। पर क्या आप जानते हैं दुख का सिर्फ आपके मन पर ही नहीं, शरीर पर भी बुरा असर पड़ता है। दुख सिर्फ आपको मानसिक रूप से नुकसान नहीं पहुंचाता है, बल्कि शरीर पर इसके कई बुरे प्रभाव भी देखे जा सकते हैं। दुख शरीर में सूजन को बढ़ाता है, तो धीरे-धीरे आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यूनिटी) को कमजोर भी करने लगता है। जिससे आपका शरीर किसी भी संक्रमण के प्रति संवेदनशील हो सकता है। साथ ही दुख दिल का दौरा, ब्लड प्रेशर और ब्लड क्लोटिंग आदि के जोखिम को और बढ़ा सकता है। इसी तरह दुखी रहने के और नुकसान भी है। आइए आज हम आपको बताते हैं कि ज्यादा दुखी रहने से आपके शरीर पर क्या असर होता है।

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हृदय के लिए है खतरनाक- 

तनाव दुख के भावनात्मक और शारीरिक पहलुओं को जोड़ता है। शरीर में जो सिस्टम शारीरिक और भावनात्मक तनाव को ओवरलैप करते हैं वे हमारे भावनात्मक नर्वस सिस्टम को आसानी से सक्रिय कर सकते हैं। इसके कई सारे शारीरिक खतरे हैं। दरअसल जब तनाव क्रोनिक हो जाता है, तो एड्रेनालाईन होर्मोन के रिलीज और ब्लड प्रेशर में अचानक से उतार-चढ़ाव क्रोनिक हार्ट डिजीज पैदा कर सकती है। कई बार तनाव के कारण हार्ट सिंड्रोम हो सकता है, जिसमें व्यक्ति को अचानक से कई बार दिल के दौरे पड़ते हैं और इसे नजरअंदाज करने से व्यक्ति की मौत भी हो सकती है।

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मस्तिष्क में तेज दर्द-

कई रिसर्च से पता चलता है कि जो लोग लंबे समय तक दुखी रहते हैं उनके मस्तिष्क पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे मस्तिष्क के सभी मांसपेशियों में तेज दर्द होता है और ऐसे लोग लगातार सिर दर्ज की शिकायत करते हैं। साथ ही भावनात्मक दर्द मस्तिष्क के समान क्षेत्रों को शारीरिक दर्द के रूप में सक्रिय करता है। यह हो सकता है कि दर्द निवारक दवाओं से मस्तिष्क के दर्द में आराम न मिले। साथ ही मस्तिष्क के नसों में ब्लड क्लोटिंग भी हो सकती है। ऐसे में व्यक्ति हो लगता है उसे मामूली सिर दर्द है पर ऐसा नहीं होता है। ये एक गंभीर दर्द है, अगर इसे सही वक्त पर डॉक्टरों को नहीं दिखाया गया तो व्यक्ति कि इससे मौत भी हो सकती है।

पेट से जुड़ी समस्याएं-

दुख और तनाव का आपको पाचन क्रिया पर भी असर पड़ता है। ज्यादा दुखी रहने वाले लोगों के पाचन क्रिया धीमी हो जाती है और इसके कारण उन्हें भूख लगना भी बंद हो जाता है। इतना ही नहीं लंबे समय तक इसका इलाज न करवाने से आप महसूस कर सकते हैं कि आपको पूरी तरह से भूख लगना भी बंद हो सकता है। इसलिए भी आपने देखा होगा कि जो लोग दुखी होते हैं सबसे पहले उनकी खाना-पानी बंद हो जाता है। ऐसे में धीरे-धीरे इन लोगों में गैस आदि की समस्या बढ़ने लगती है। इसके साथ ही व्यक्ति को मतली और चक्कर आने जैसी समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं।

शरीर में पानी की कमी-

दुख आपके शरीर का पानी सूखा सकती है। ये हम नहीं साइंस कह रहा है। ज्यादा दुखी होने से लोगों के शरीर में पानी की कमी महसूस हो सकता है। उनके होंठ रह रह कर सूख सकरते हैं और उन्हें बार-बार प्यास लग सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब आप दुख में होते हैं या तनाव में होते हैं, तो आपका ब्लड सर्कुलेशन बहुत तेज होता है। इसकी वजह से कुछ ही वक्त में आपको थकान महसूस होने लगती है और शरीर में पहले से मौजूद पानी धूीरे-धीरे सूखने लगता है। आपकी त्वचा भी रूखी और डार्क को जाती है। ऐसे में आपको कोशिश करना चाहिए कि जितना हो सके, उतना ठंडा पानी पीएं और लंबी सांसे लें। वहीं अगर दुख के कारण ये बहुत दिनों तक चलता रहा, तो व्यक्ति के सारे अंग सिंक कर सकते हैं। धीरे-धीरे सभी मांसपेशियों से पानी सूख सकता है और शरीर में अन्य परेशानियां उत्पन्न हो सकती है।

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शरीर इंफेक्शन सेंसिटिव हो सकता है- 

ज्यादा दुखी रहने वाले लोगों की इम्यूनिटी धीरे-धीरे कम हो जाती है। इसके बाद शरीर इंफेक्शन सेंसिटिव होने लगता है और ऐसे व्यक्ति को कोई भी इंफेक्शन जल्दी पकड़ सकता है। ऐसे में आप देखेंगे कि ऐसे लोगों में इंफेक्शन के कारण सर्दी-जुकाम और कई वायरल डिजीज हो सकती है। कमजोर इम्यूनिटी के कारण इन लोगों को मौसमी बीमारिया आसानी से पकड़ सकती है। इसके अलावा इन लोगों को कुछ गंभीर बीमारियां भी आसानी हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि आप जितना हो सके अपने दुख और तनाव को कम करें। इसके लिए घुमने-फिरने, लोगों से बात करने और योग आदि की मदद ली जा सकती है। साथ ही कोशिश करें कि ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच रहें औक अकेले रहने से बचें। ऐसे लोगों में दुख अवसाद का रूप भी ले सकता है। इसलिए कोशिश करें कि कुछ भी हो ज्यादा दुखी न हों।

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