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घरेलू हिंसा का भ्रूण पर पड़ता है ये असर

महिला स्‍वास्थ्‍य By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 22, 2016
घरेलू हिंसा का भ्रूण पर पड़ता है ये असर

घरेलू हिंसा का बच्‍चे के दिलो दिमाग पर बुरा असर पड़ता है, यह तो हम सब जानते हैं, लेकिन एक नए अध्‍ययन से यह बात सामने आई है कि घरेलू हिंसा का असर बच्‍चे के जन्‍म से पहले यानी गर्भ में भी नुकसान पहुंचा सकती है।

घरेलू हिंसा का बच्‍चे के दिलो दिमाग पर बुरा असर पड़ता है, यह तो हम सब जानते हैं, लेकिन एक नए अध्‍ययन से यह बात सामने आई है कि घरेलू हिंसा का असर बच्‍चे के जन्‍म से पहले यानी गर्भ में भी नुकसान पहुंचा सकती है। यह अध्‍ययन हाल ही में 'चाइल्ड अब्यूज एंड नेग्लेक्ट' में प्रकाशित एक शोध से पता चला है।

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घरेलू हिंसा का भ्रूण पर असर

एक नए अध्‍ययन से पता चला है कि घरेलू हिंसा का प्रभाव गर्भावस्‍था और प्रसव पर पड़ता है। इस अध्‍ययन के अनुसार, घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं में जन्‍म संबंधी जटिलताएं जैसे कम वजन का बच्‍चा, अपरिपक्‍व जन्‍म जोखिम में वृद्धि देखने को मिलता है। घरेलू हिंसा भ्रूण के विकास को प्रभावित करता है। मातृ तनाव, कुपोषण, आघात और चिकित्सा देखभाल की कमी के कारण कई मायनों में भ्रूण पर प्रभाव पड़ सकता है।


शोधकर्ताओं की चेतावनी

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि पति के द्वारा घरेलू हिंसा होन पर नकारात्‍मक प्रभाव और भी बुरे हो सकते हैं। यह एक तथ्‍य है कि घरेलू हिंसा मां और बच्‍चे दोनों के जीवन को प्रभावित करता है, यही वजह है कि शोधकर्ता निवारक उपायों सलाह देते हैं।

घरेलू हिंसा से गर्भवती के तनाव प्रतिक्रिया पर प्रभाव पड़ता है और क्रिस्टोल नामक हार्मोन में वृद्धि होती है और इससे उनके गर्भ में पल रहे भ्रूण में भी क्रिस्टोल का स्तर बढ़ जाता है। क्रिस्टोल एक न्यूरोटॉक्सिक है जिसकी अधिक मात्रा या स्तर भ्रूण के लिए दुष्प्रभावी और हानिकारक हो सकती है।


पति के कारण होने वाली घरेलू हिंसा

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर घरेलू हिंसा पति के कारण होता है, तो इसका नकारात्मक प्रभाव बुरा हो सकता है। ऐसा नहीं है कि घरेलू हिंसा दोनों मां और बच्चे के जीवन को प्रभावित करता है, एक तथ्य है और यही वजह है कि शोधकर्ताओं निवारक उपाय सलाह देते हैं। इसके अलावा, जिन महिलाओं की इन मामलों के लिए रिपोर्ट दर्ज की जाती है, उन्‍हें जन्म दोष या प्रसव जटिलताओं को रोकने के लिए ध्यान और उचित चिकित्सा सेवा दी जानी चाहिए। इसके अलावा, घरेलू हिंसा में शारीरिक हिंसा से भावनात्‍मक दुरुपयोग तक कुछ भी हो सकता है। अध्‍ययन के एक भाग के रूप में, शोधकर्ताओं ने घरेलू हिंसा का सामना करने वाली 5 लाख से अधिक महिलाओं की जांच की।


शोध का निष्‍कर्ष

अध्‍ययन का निष्‍कर्ष यह निकला कि घरेलू तनाव कई प्रसव जटिलताओं को दोगुना कर सकता है। यही कारण है कि गर्भवती को गर्भावस्‍था को पूरे चरण के दौरान उचित देखभाल दी जानी चाहिए। इसके अलावा घरेलू हिंसा के कई अन्‍य प्रभाव को लेकर शोधकर्ताओं ने पाया कि यह जन्‍म जटिलताओं भी खतरे के बीच हो सकते है।

जिन बच्चों की मां गर्भावस्था के दौरान घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं, उन बच्चों में जन्म के बाद पहले साल में भावनात्मक एवं व्यावहारिक सदमे के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे बच्चों को अक्सर नींद में बुरे सपने आते हैं, वे छोटी बातों पर चौंक जाते हैं, शोर शराबे से बेचैन हो जाते हैं, तेज रोशनी में उन्हें परेशानी होती है, लोगों से मिलने में घबराते हैं और खुशी के क्षण में भी परेशानी महसूस करते हैं।

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Image Source : Getty

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