आपकी बॉडी क्लॉक (शरीर की प्राकृतिक घड़ी) से कैसे प्रभावित होती है आपकी सेहत?

Updated at: Dec 06, 2019
आपकी बॉडी क्लॉक (शरीर की प्राकृतिक घड़ी) से कैसे प्रभावित होती है आपकी सेहत?

अगर आप अपनी बॉडी क्लॉक के अनुसार काम नहीं करते हैं, तो आपके शरीर में कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं।

Anurag Anubhav
विविधWritten by: Anurag AnubhavPublished at: Dec 06, 2019

हमारा शरीर और हमारी जिंदगी एक खास पैटर्न में समय के अनुसार चलती है। आमतौर पर ज्यादातर लोग सुबह उठते हैं और अपने-अपने कामों में लग जाते हैं। दिनभर एनर्जी के लिए खाना खाते हैं और रात होते-होते अपने शरीर को आराम देने के लिए सोने चले जाते हैं। हम में से ज्यादातर लोगों का शरीर अपने आपको इसी अनुसार ढाल लेता है। मगर क्या आपने महसूस किया है कि शरीर के रोजाना के शेड्यूल से अलग अगर आप कोई काम करते हैं, तो आपको कई तरह की परेशानियां होने लगती हैं। इसका कारण यह है कि हम सबके शरीर में एक प्राकृतिक घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिद्म कहते हैं। इसे अंग्रेजी में Body Clock या Circadian Rythm कहते हैं। ये घड़ी हमारी बायलॉजिकल गतिविधियों को नियंत्रित करती है। इसका असर हमारी सेहत पर भी पड़ता है।

बॉडी क्लॉक के सामान्य काम

आमतौर पर बॉडी क्लॉक हमारे शरीर की रोजमर्रा से जुड़ी गतिविधियों की हमें याद दिलाती है, जैसे- हमें कब खाना खाना है, कब सोना है, कब आराम की जरूरत है। इसके अलावा ये बॉडी क्लॉक हार्ट के फंक्शन, स्ट्रेस, इम्यूनिटी आदि को भी प्रभावित करती है। इसके अलावा ये बॉडी क्लॉक आपके शरीर में हार्मोन्स के स्राव में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आमतौर पर सामान्य दिन और रात का पैटर्न फॉलो करने वाले लोगों के लिए बॉडी क्लॉक रात के समय मेटाबॉलिज्म स्लो करने वाले हार्मोन्स को बढ़ा देती है, जिससे अंगों को आराम मिल सके।

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बॉडी क्लॉक से अलग काम करने पर क्या होता है?

जैसे अगर आप रोजाना रात में 10 बजे सोते हैं और सुबह 6 बजे उठते हैं। मगर एक रात आप पूरे समय जागते हैं और भोर में 5 बजे से दोपहर के 1 बजे तक सोते हैं। दोनों ही स्थितियों में आपने 8 घंटे की ही नींद ली है, मगर सुबह ली गई नींद के बाद जब आप उठते हैं, तो भी आपका दिमाग उतनी शांत तरीके से काम नहीं कर पाता है, जितनी शांति से सामान्य दिनों में कर सकता था। इसका कारण है कि आपके शरीर में हार्मोन्स आपके बॉडी क्लॉक के हिसाब से रिलीज हुए, मगर आपने अपनी जीवनशैली बदल दी, जिसका खामियाजा आपको दिनभर उबासी, आलस और थकान से चुकाना पड़ेगा।

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क्या सचमुच खतरनाक है बॉडी क्लॉक से अलग काम करना?

हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर आप अचानक अपनी जीवनशैली बदल लेते हैं, तो आपकी बॉडी क्लॉक, जो आपके पहले की आदतों के अनुसार खुद को सेट कर चुकी है, आपके शरीर में कई तरह की गड़बड़ियां पैदा करने लगती है। हार्ट के मरीजों के लिए अचानक जीवनशैली में परिवर्तन हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा देता है। इसके अलावा बॉडी क्लॉक के अनुसार काम न करने के कारण ब्लड प्रेशर और मोटापे की समस्या भी हो सकती है। लाइफस्टाइल से जुड़ी ज्यादातर बीमारियों का कारण यही बॉडी क्लॉक के फंक्शन में गड़बड़ी है।

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