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खानपान की ये बुरी आदतें हैं एसिडिटी का कारण, ऐसे पाएं छुटकारा

स्वस्थ आहार By Atul Modi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 13, 2018
खानपान की ये बुरी आदतें हैं एसिडिटी का कारण, ऐसे पाएं छुटकारा

इसके लिए अनियमित भोजन, तेल और मसालेदार खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन तथा किसी नशे की लत जिम्‍मेदार होते हैं। लगातार एसिडिटी की समस्या रहने पर ब्लडप्रेशर या शुगर की बीमारी भी सकती है। अगर आप अपना खानपान बेहतर रखेंगे तो इस प्रकार की समस्‍या

खराब जीवनशैली के चलते एसिडिटी आम हो चुकी है। इसके लिए अनियमित भोजन, तेल और मसालेदार खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन तथा किसी नशे की लत जिम्‍मेदार होते हैं। लगातार एसिडिटी की समस्या रहने पर ब्लडप्रेशर या शुगर की बीमारी भी सकती है। अगर आप अपना खानपान बेहतर रखेंगे तो इस प्रकार की समस्‍या से कोसों दूर रहेंगे।

दरअसल, अधिकांश बीमारियों की जड़ पेट में होती है। यदि पाचन करने वाले किसी भी अंग में कोई खराबी हो जाए, तो पेट से संबंधित समस्याएं शुरू हो जाती हैं। यदि आपको पेट के भारीपन, बार-कई बार खट्टी डकारें, छाती में बेचैनी, जी मिचलाना, दिल की धड़कन तेज होना, पेट में तेज दर्द, पेशाब में जलन या रुकावट आदि का अनुभव हो सतर्क हो जाएं, यह एसिडिटी हो सकती है।

वे लोग जिनकी पाचन शक्ति खराब होती है या जो कब्ज के शिकार रहते हैं, उन लोगों को गैस और एसिडिटी की समस्या अधिक होती है। आज हम आपको इस लेख के माध्‍यम से बता रहे हैं एसिडिटी की वजह क्‍या है और इसे आप कैसे ठीक कर सकते हैं। 

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एसिडिटी के लक्षण

सीने या छाती में जलन व मुंह में खट्टा पानी रह-रह कर मुंह में खट्टा पानी आना एसिडिटी का प्रमुख लक्षण है। एसिडिटी की वजह से सीने में दर्द भी हो सकता है। लगातार एसिडिटी होने पर यह गंभीर समस्या का रूप भी ले सकती है। एसिडिटी होने पर रोगी को लगता है कि जैसे भोजन करने पर वह उसके गले में ही अटक गया है, या कई बार डकार के साथ खाना मुंह में भी आ जाता है। इसके अलावा रात को सोते समय इस तरह की दिक्कत अधिक होती है। कुछ गंभीर मामलों में मुंह में खट्टे पानी के साथ खून भी आ सकता है।

इसे नजरअंदाज किया जा रहा हो तो यह बढ़ कर पेट में छाले, हार्ट बर्न, कोलेस्ट्रॉल यहाँ तक कि हृदय और मस्तिष्क से जुड़ी बहुत सी बिमारियों का कारण बन सकती है।

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एसिडिटी से बचने के उपाय

  • इसके लिए सबसे जरुरी बात तो कि अपने खान-पान में संयम बरतें। हमेशा नपी तुली, साफ़ सुथरे और ताजे आहार ही लें।
  • भूख से थोड़ा कम खाएं और खाने के तुरंत बाद चाय, कॉफी, जूस लेने के बजाय काले नमक, जीरा और पुदीने की एक गिलास लस्सी ले सकते हैं।
  • खाने में, 80 प्रतिशत फलों और सब्जियों के साथ सिर्फ 20 प्रतिशत अन्य चीजों का सेवन करने का प्रयास करें।
  • आपके हर एक आहार के बीच कम से कम 5 घंटे का फैसला अवश्य हो। यहाँ तक कि इस दौरान कुछ भी खाने से बचें।
  • चाय और कॉफी का ज्यादा सेवन न करें।
  • रात को कभी भी भारी आहार न लें और रात में फलों का सेवन करने से भी बचें। पेट की ज्यादातर समस्याएं रात को लिए गए उल्टे-सीधे और भारी आहारों से ही होती है।
  • खाने को हड़बड़ी में खाना और निवाले को उचित तरह से न चबाना भी एसिडिटी का सबसे बड़ा कारण है। इसीलिए आप छाहे कुछ भी खा रहें हों यदि आप उसका सेवन चबा-चबा कर कर रहें हैं, तो आपकी एसिडिटी की संभावनाएं 50 प्रतिशत ही रह जाती हैं।

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