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इम्फीसेमा का कारण होता है धूम्रपान

लेटेस्ट By Aditi Singh , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 31, 2016
इम्फीसेमा का कारण होता है धूम्रपान

इम्फीसेमा रोग का लगातार बने रहने का मुख्य कारण ज्यादा धूम्रपान करना होता है। इस बात की जानकारी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एस.एस. अग्रवाल और आईएमए के ऑनरेरी सेक्रेटरी जनरल और हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल&nb

सर्दी के मौसम में बलगम वाली खांसी होना सामान्य माना जाता है, लेकिन कुछ लोग इस समस्या से पूरे साल परेशान रहते है। बलगम वाली खांसी को इम्फीसेमा रोग भी कहा जाता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एस.एस. अग्रवाल और आईएमए के ऑनरेरी सेक्रेटरी जनरल और हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी।

फेफड़ों में लंबे समय तक सूजन रहता हो, लगातार बलगम वाली खांसी आती हो तो जांच कराएं, यह इम्फीसेमा रोग का लक्षण भी हो सकता है।
इस बीमारी का प्रमुख कारण धूम्रमान माना जाता है। जो लोग धूम्रपान या तंबाकू का सेवन नहीं भी करते हैं, उनमें भी यह बीमारी पाई जाती है। उनके मामले में अल्फा 1 एंटीट्राइस्पिन नामक प्रोटीन की कमी की वजह से एम्फीसेमा हो सकता है। इसके अलावा फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाली गैसों के संपर्क में आना, वायु प्रदूषण से सांस पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव और उचित हवादार माहौल न होना फेफड़ों की सेहत पर असर डाल सकते हैं।

डॉक्टर्स के मुताबिक, "हम लोगों को अपनी जीवनशैली बदलने की सलाह देते हैं। फेफड़ों को नुकसान पहुंचने से बचाने के लिए सबसे पहले धूम्रपान छोड़ दें। ताकत और ऊर्जा विकसित करने के लिए नियमित तौर पर व्यायाम करना शुरू करें।" उन्होंने मानना है कि अपने आसपास के माहौल को साफ सुथरा, खुला और हवादार रखना चाहिए। अंगीठी और अन्य जगहें जहां पर अत्यधिक प्रदूषण होता है वहां जाने से बचें, क्योंकि वहां का माहौल सांस की समस्या पैदा कर सकता है। आखिरी बात यह कि स्वस्थ आहार लें और बीमारियों से मुक्त जीवन जिएं।


डॉ. एस.एस. अग्रवाल ने कहा कि गंभीर हालत में इंजेक्शन, नेब्यूलाइजर, ऑक्सीजन थेरेपी और मास्क या एंडोट्रेचियल ट्यूब से सांस लेने में सहयोग जैसे इलाज की सलाह दी जाती है। बीमारी के असर को कम करने के लिए मेडिकल सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन बचाव किसी भी तरह के इलाज से बेहतर है और धूम्रपान छोड़ना सबसे बड़ी समझदारी की बात है।

भारत के एक तिहाई लोग तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं। शहरी क्षेत्रों में सिगरेट और चबाने वाला तंबाकू आम बात है तो ग्रामीण क्षेत्रों में बीड़ी, हुक्का और चिलम काफी मात्रा में प्रयोग की जाती है।

 

Image Source-Getty

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