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पित्त की पथरी के घरेलू उपाय

घरेलू नुस्‍ख By Rahul Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 18, 2013
पित्त की पथरी के घरेलू उपाय

गॉल ब्लाडर में पथरी बनना एक भयंकर पीड़ादायक रोग है। इसे पित्त पथरी कहते हैं। पित्ताशय में दो तरह की पथरी बनती है। प्रथम कोलेस्ट्रोल निर्मित पथरी। दूसरी पिग्मेन्ट से बननेवाली पथरी। जिसमें से लगभग अस्सी प्रतिशत पथरी कोलेस्ट्रोल तत्व से ही बनती है

दुनिया में लाखों ऐसे मरीज है जो गुर्दे की पथरी से परेशान है। गॉल ब्लाडर में पथरी बनना एक भयंकर पीड़ादायक रोग है। इसे पित्त पथरी कहते हैं। पित्ताशय में दो तरह की पथरी बनती है। प्रथम कोलेस्ट्रोल निर्मित पथरी। दूसरी पिग्मेन्ट से बननेवाली पथरी। जिसमें से लगभग अस्सी प्रतिशत पथरी कोलेस्ट्रोल तत्व से ही बनती है।

पथरी का फोटो

यह रोग किसी को भी और किसी भी आयु में हो सकता है लेकिन महिलाओं में इस रोग के होने की सम्भावना पुरुषों की तुलना में कम होती है। पित्त की पथरी को घरेलू उपचार के माध्यम से ठीक किया जा सकता है। इस लेख को पढ़ें और अधिक जानकारी प्राप्त करें।

   
पित्त लिवर में बनता है और इसका भंडारण गॉल ब्लेडर में होता है। यह पित्त वसायुक्त भोजन को पचाने में मदद करता है। जब इस पित्त में कोलेस्ट्रोल और बिलरुबिन की मात्रा  ज्यादा हो जाती है, तो पथरी निर्माण के लिये आदर्श स्थिति बन जाती है। यह बीमारी आमतौर पर तीस से साठ वर्ष के उम्र के लोगों में पाई जाती है और स्त्रियों की अपेक्षा पुरूषों में चार गुना अधिक पाई जाती है।

बच्चों और वृद्धों में मूत्राशय की पथरी ज्यादा बनती है, जबकि वयस्को में अधिकतर गुर्दो और मूत्रवाहक नली में पथरी बनती है। पथरी के जिन मरीजों को डायबिटीज की बीमारी होती है उनको गुर्दे की बीमारी होने की काफी संभावनाएं रहती हैं। अगर किसी मरीज को रक्तचाप की बीमारी है तो उसे नियमित दवा से रक्त चाप को नियंत्रण करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि अगर रक्तचाप बढ़ता है, तो इस बिमारी से भी गुर्दे खराब हो सकते हैं।

प्रेग्नेन्सी, मोटापा, मधुमेह, अधिक बैठे रेहने बले लोगों, तेल घी अधिकता वाले भोजन और शरीर में खून की कमी से पित्त पथरी रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है। इस  समस्या को कुछ घरेलू उपचारों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।

 

 

पित्त की पथरी के घरेलू उपाय-

  • गाजर और ककडी का रस को सौ मिलिलिटर की मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीने से पित्त की पथरी में लाभ होता है।
  • सुबह खाली पेट पचास मिली लीटर नींबू का रस पीने से एक सप्ताह में लाभ होता है।
  • शराब, सिगरेट, चाय, कॉफी तथा शकर युक्त पेय हानिकारक हैं। इनसे जितना हो सके बचने की कोशिश करें।
  • नाशपती पित्त की पथरी में फायदेमंद होती है, इसे खूब खायें। इसमें पाये जाने वाले रसायनिक तत्वों से पित्ताषय के रोग दूर होते हैं।
  • विटामिन सी अर्थात एस्कोर्बिक एसिड के प्रयोग से शरीर का प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनती है। यह कोलेस्ट्रोल को पित्त में बदल देता है। इसकी तीन से चार गोली रोज लेने पर पथरी में लाभ होता है।
  • पित्त पथरी के रोगी भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में हरी सब्जियां और फल लें। इनमें कोलेस्ट्रोल कम मात्रा में होता है और यह प्रोटीन की जरूरत भी पूरी करते हैं।
  • तली और मसालेदार चीजों से दूर रहें और संतुलित भोजन ही करें।
  • खट्टे फलों का सेवन करें। इनमें मौजूद विटामिन सी गॉलब्‍लैडर की पथरी दूर करने के लिए काफी मददगार साबित होता है। 
  • रोजाना एक चम्‍मच हल्‍दी का सेवन करने से पथरी दूर होती है।

 

 

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