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हीमोग्लोबिन स्तर में कमी और वृद्धि बुढ़ापे में बढ़ाती है डिमेंशिया का खतरा, डॉक्टरों ने जताई चिंता

Updated at: Aug 06, 2019
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Written by: जितेंद्र गुप्ताPublished at: Aug 06, 2019
हीमोग्लोबिन स्तर में कमी और वृद्धि बुढ़ापे में बढ़ाती है डिमेंशिया का खतरा, डॉक्टरों ने जताई चिंता

हीमोग्लोबिन एंड एनीमिया इन रिलेशन टू डिमेंशिया रिस्क एंड एकम्पेयिंग चेंजेस ऑन ब्रेन एमआरआई शीर्षक वाले अध्ययन में खुलासा हुआ है कि  हीमोग्लोबिन का कम और बढ़ा हुआ स्तर भविष्य में डिमेंशिया के खतरे को बढ़ा देता है।

एक नए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि हीमोग्लोबिन का कम और बढ़ा हुआ स्तर भविष्य में डिमेंशिया के खतरे को बढ़ा देता है। हीमोग्लोबिन एंड एनीमिया इन रिलेशन टू डिमेंशिया रिस्क एंड एकम्पेयिंग चेंजेस ऑन ब्रेन एमआरआई शीर्षक वाला ये अध्ययन 31 जुलाई 2019 को प्रकाशित हुआ था। 

इस अध्ययन में 12,305 लोग शामिल हुए, जिनकी औसत उम्र 65 साल थी और ये लोग डिमेंशिया के शिकार नहीं थे। कुल मिलाकर अध्ययन के 6 फीसदी यानी की 745 लोगों में एनीमिया पाया गया। शोधकर्ताओं ने औसतन 12 वर्ष तक अध्ययन में शामिल लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी। इस दौरान 1,520 लोगों में डिमेंशिया विकसित हुआ। इसके अलावा इनमें से 1,194 को अल्जाइमर जैसी बीमारी का भी सामना करना पड़ा।

अध्ययन के मुताबिक वे लोग, जो एनीमिया के शिकार थे उनमें अल्जाइमर के 41 फीसदी और डिमेंशिया का खतरा 34 उीसदी तक बढ़ जाता है, विशेषकर उनके मुकाबले जिनमें एनीमिया नहीं था। एनीमिया से ग्रस्त 745 लोगों में से 128 में डिमेंशिया विकसित हुआ।

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अध्ययन के मुताबिक, इसी तरह वे व्यक्ति, जिनमें हीमोग्लोबिन का स्तर अधिक पाया गया उनमें डिमेंशिया विकसित होने की संभावना अधिक थी। अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों को उनके हीमोग्लोबिन स्तर के आधार पर पांच समूहों में विभाजित किया गया। सामान्य हीमोग्लोबिन समूह की तुलना में जिन लोगों में हीमोग्लोबिन स्तर अधिक था उनमें डिमेंशिया विकसित होने का खतरा 20 फीसदी अधिक था। जिन लोगों का हीमोग्लोबिन स्तर कम था उनमें डिमेंशिया होने का खतरा 29 फीसदी कम था।

बेंगलुरू के डॉक्टरों का कहना है कि भारत सहित विकासशील देशों में ये निष्कर्ष एक खतरे की घंटी का संकेत है। शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के कारण कई रोग होते हैं।

NIMHANS के मनोचिकित्सा विभाग की जीरियाट्रिक मनोचिकित्सा इकाई  में मनोचिकित्सा और सलाहकार के प्रोफेसर पी.टी. शिवकुमार का कहना है कि जन स्वास्थ्य महत्व के संदर्भ में, एनीमिया के साथ संबंध हमारी सेटिंग के लिए अधिक प्रासंगिक है क्योंकि यह बुजुर्गों और विशेष रूप से गरीब सामाजिक-आर्थिक स्थिति वाले लोगों में बहुत आम है। अध्ययन ने एनीमिया के पहले ज्ञात संबंध और अधिक कठोर कार्यप्रणाली के साथ डिमेंशिया के खतरे की पुष्टि की गई है।

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उन्होंने कहा, ''पिछले अध्ययनों में जो संबंध दिखाया गया उसमें इस संभावना को खारिज नहीं किया गया कि यह याददाश्त में कमी और डिमेंशिया के शुरुआती चरण पोषण संबंधी हानि के कारण हो सकते है। यह अध्ययन जोखिम को कम करने के लिए एनीमिया की जांच और उपचार की आवश्यकता पर जोर देता है क्योंकि यह एक संभावित परिवर्तनीय जोखिम कारक है।''

हीमोग्लोबिन के उच्च स्तर के डिमेंशिया के साथ जुड़े होने पर उन्होंने कहा, ''ऐसा संभव है क्योंकि उच्च हीमोग्लोबिन स्तर रक्त प्रवाह और ऊतकों में ऑक्सीजन की आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इसके लिए और मूल्यांकन की आवश्यकता है।'' हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने वाले फूड

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