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हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, बीपी के हैं शिकार तो इससे होने वाले इस एक खतरे को जान लीजिए

अन्य़ बीमारियां By जितेंद्र गुप्ता , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 22, 2019
हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, बीपी के हैं शिकार तो इससे होने वाले इस एक खतरे को जान लीजिए

भागदौड़ भरी जिंदगी में अगर आप भी हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक एंव अन्य हृदय संबंधी रोगों से परेशान हैं तो आपको हार्ट वाल्व डिजीज के जोखिमों से अवगत होना जरूरी है। ह्रदय में चार वाल्व होते हैं। हार्ट वाल्व डिजीज में हृदय स

इस भागदौड़ भरी जिंदगी में अगर आप भी हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक एंव अन्य हृदय संबंधी रोगों से परेशान हैं तो आपको हार्ट वाल्व डिजीज के जोखिमों से अवगत होना जरूरी है।

हार्ट वाल्व डिजीज, दिल से जुड़ी हुई एक ऐसी समस्या है, जो तब होती है जब आपके हृदय के एक या एक से अधिक वाल्व ठीक से काम नहीं कर पाते। ह्रदय में चार वाल्व होते हैं। हार्ट वाल्व डिजीज में हृदय से होकर जाने वाले रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है, जिसके कारण हार्ट वाल्व डिजीज की समस्या हो जाती है।

श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट व कंसलटेंट डॉक्टर नितिन अग्रवाल का कहना है कि हमारे हृदय में झिल्लीनुमा आकार के चार हार्ट वाल्व होते है। हार्ट वाल्व का काम लगातार एक दिशा में ब्लड के सर्कुलेशन को बनाए रखना होता है। ये वाल्व दिल के अंदर और बाहर खून प्रवाहित करने के लिए खुलते है और खून को वापस जाने से रोकने के लिए बंद हो जाते है। हार्ट वाल्व डिजीज में वाल्व काफी संकुचित हो जाते है और कठोर होने के कारण अच्छी तरह से खुल या बंद नही हो पाते। इस सिकुड़न से हृदय का वाल्व या तो तंग हो जाता है या फिर वाल्व में लीकेज हो जाता है।

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बीमारी के कारण

हार्ट वाल्व के सिकुड़ जाने या कठोर हो जाने पर दिल की मांसपेशियों को ब्लड लेने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। हार्ट वाल्व की समस्या जन्म से 5-15 वर्ष और बड़ी उम्र में हार्ट अटैक, कार्डियोपैथी, मेटाबोलिक या डीजनरेटिव कारणों से ही सकती है।

इसके रिस्क फैक्टर और लक्षणों को कैसे पहचानें

कई ऐसे कारक हैं, जो हार्ट वाल्व डिजीज के रिस्क फैक्टर बढ़ा सकते है, जिसमें हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक एंव अन्य हृदय संबंधी रोग के खतरे को बढ़ा देता है। हार्ट वाल्व डिजीज से पीड़ित लोगों में थकान, छाती में दर्द, चक्कर आना, दिल घबराना, तेजी से वजन घटना और पैर, टखनों एंव पेट में सूजन होना इस रोग के सामान्य लक्षण है।

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इसके उपचार के तरीके

हार्ट वाल्व डिजीज का उपचार दवा और सर्जरी के माध्यम से किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले रोग के लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से जांच कराएं। जांच के बाद ही वाल्व के इलाज में रोगी की स्थिति के अनुसार बैलून वाल्वोप्लास्टी और ओपन हार्ट सर्जरी का सहारा लिया जाता है। बैलून वाल्वोप्लास्टी में अगर हृदय का वाल्व खराब है, तो उसे बैलून से खोल कर इलाज किया जाता है। इसके साथ ही अगर वाल्व में लीकेज ज्यादा है या कोई और समस्या है तो ओपन हार्ट सर्जरी के जरिये कृत्रिम वाल्व लगा दिया जाता है।

ओल्ड ऐज में सर्जरी के अलावा अन्य उपचार

आजकल बड़ी उम्र में ज्यादा हार्ट वाल्व को बिना सर्जरी के TAVI व MITRA किल्प नाम के प्रोसिजर से बदला जा सकता है, इसमें बिना ऑपरेशन के तार और बैलून के रास्ते से वाल्व को खोलकर नया वाल्व लगा दिया जाता है। 

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