दिल की बीमारी की फैमिली हिस्ट्री है तो इस तरह रखें अपने हार्ट का ख्याल

अगर आपके परिवार में हार्ट डिजीज (दिल से जुड़ी बीमारी) की फैमिली हिस्ट्री है तो ऐसे में इसके बचाव के लिए एक्सपर्ट से जानें जरूरी बातें। 

Prins Bahadur Singh
हृदय स्‍वास्‍थ्‍यWritten by: Prins Bahadur SinghPublished at: Jul 30, 2021
Updated at: Jul 30, 2021
दिल की बीमारी की फैमिली हिस्ट्री है तो इस तरह रखें अपने हार्ट का ख्याल

आज के समय में बदलती जीवनशैली और असंतुलित खानपान की वजह से लाखों लोग हृदय से जुड़ी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। हार्ट की बीमारियों के चलते हार्ट अटैक, हार्ट स्ट्रोक और हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। लोगों को हार्ट से जुड़ी समस्याएं 40 साल के बाद से ज्यादातर होती हैं। हलांकि वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के मुताबिक हार्ट से जुड़ी बीमारी से ग्रसित किसी भी व्यक्ति को अगर 55 साल की उम्र से पहले हार्ट अटैक, स्ट्रोक या हार्ट फेलियर होता है तो उसके परिवार में भी इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। यानि अगर आपके परिवार में हार्ट से जुड़ी बीमारी से पीड़ित व्यति पहले से हैं और उनकी उम्र 55 साल से कम है तो इसकी वजह से आपको भी हार्ट से जुड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। Coronary Artery Disease जो कि आनुवांशिक बीमारी है इसकी वजह से भी हार्ट से जुड़ी बीमारियों की फैमिली हिस्ट्री बनती है। अगर आपके परिवार में हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर या हार्ट स्ट्रोक जैसी स्थिति की फैमिली हिस्ट्री (Hereditary Heart Diseases)है तो आपको विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। आइये दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल के मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ के के कपूर से जानते हैं इस समस्या में बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

हार्ट डिजीज की फैमिली हिस्ट्री होने पर इस तरह करें खुद का बचाव (Hereditary Heart Diseases Prevention Tips)

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हार्ट से जुड़ी तमाम समस्याएं आनुवंशिक कारणों से भी होती हैं। जिन लोगों के परिवार में 55 साल से कम उम्र वाले लोगों को दिल की बीमारी होती हैं उनके परिवार में हार्ट अटैक, हार्ट स्ट्रोक या हार्ट फेलियर की समस्या का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि इस स्थिति में आप चीजों को बदल नहीं सकते हैं क्योंकि ऐसी समस्या का खतरा आपको आनुवंशिक कारणों से है। लेकिन इस समस्या के खतरे को कम करने के लिए आप अपनी जीवनशैली और खानपान में कुछ बदलाव कर सकते हैं। हार्ट डिजीज की फैमिली हिस्ट्री होने पर आपको इन बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। 

1. तंबाकू के सेवन से बनाएं दूरी 

अगर आपके परिवार में हार्ट अटैक, स्ट्रोक या हार्ट फेलियर की फैमिली हिस्ट्री है तो तंबाकू के सेवन से तौबा करें। तंबाकू का सेवन और स्मोकिंग दिल की बीमारी के लिए बहुत खतरनाक माना जाता है।  

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2. शराब के सेवन से बचें 

परिवार में हार्ट डिजीज की फैमिली हिस्ट्री होने पर परिवार के दूसरे सदस्यों को हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। इस खतरे से बचने के लिए आपके पास सिर्फ एक ही विकल्प होता है खानपान और जीवनशैली में बदलाव। परिवार में किसी भी व्यक्ति को हार्ट की बीमारी हो तो आपको भी शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। शराब के सेवन से दिल से जुड़ी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। 

3. ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें

हार्ट से जुड़ी समस्याओं में डायबिटीज का भी बहुत बड़ा रोल होता है। डायबिटीज के कारण बहुत से लोगों को हार्ट की बीमारियां भी झेलनी पड़ती हैं। ऐसे में अगर आपकी फैमिली हिस्ट्री में हार्ट डिजीज से पीड़ित लोग रहे हैं तो आपको अपना ब्लड शुगर हमेशा नियंत्रण में रखना चाहिए। 

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4. नियमित रूप से व्यायाम करें

परिवार में हार्ट अटैक की फैमिली हिस्ट्री होने पर आपको इससे बचने के लिए नियमित रूप से व्यायाम और योग का अभ्यास जरूर करना चाहिए। आनुवांशिक कारणों से होने वाले हृदय रोगों से बचाव के लिए योग और व्यायाम बहुत उपयोगी माना जाता है। रोजाना कम से कम 30 मिनट के लिए शारीरिक व्यायाम या योग करने से इसका खतरा कम हो जाता है।

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5. वजन को रखें नियंत्रित 

हालांकि वजन बढ़ने की समस्या में इंसान को वैसे भी हृदय रोग, डायबिटीज जैसी समस्याओं का खतरा रहता है। लेकिन अगर आपके परिवार में आनुवांशिक कारणों से हार्ट डिजीज का खतरा है तो आपको इससे बचने के लिए अपने वजन को नियंत्रित करना होगा। कमर की साइज अगर हिप्स की साइज से ज्यादा होने लगे तो ऐसे व्यक्ति को हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।

6. नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच जरूर करें

शरीर में ब्लड प्रेशर की जांच कर दिल की सेहत का अंदाजा लगाया जा सकता है। दिल से जुड़ी बीमारियों से बचने के लिए आपको नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच जरूर करना चाहिए।

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ऊपर बताई गयी बातों के अलावा आप परिवार में हार्ट डिजीज की हिस्ट्री होने पर इससे बचाव के लिए डॉक्टर से जानकारी ले सकते हैं। ऐसी स्थिति में दिल से जुड़ी बीमारियों के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच और इलाज कराना चाहिए। याद रखें आनुवांशिक कारणों से होने वाली दिल की बीमारी में बचाव ही एकमात्र उपाय है।

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