हेपेटाइटिस सी का शिकार लोगों को कोरोना से इन्फेक्ट होने का खतरा अधिक, रोगी एक्सपर्ट टिप्स से रखें खुद को सेफ

Updated at: Jul 28, 2020
हेपेटाइटिस सी का शिकार लोगों को कोरोना से इन्फेक्ट होने का खतरा अधिक, रोगी एक्सपर्ट टिप्स से रखें खुद को सेफ

हेपेटाइटिस-ए, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, हेपेटाइटिस-डी, हेपेटाइटिस-ई ये पांच संक्रमण आपमें कोरोना के खतरे को बढ़ा देते हैं। जानें एक्सपर्ट टिप्स। 

Jitendra Gupta
अन्य़ बीमारियांWritten by: Jitendra GuptaPublished at: Jul 28, 2020

हेपेटाइटिस शायद आप इस शब्द को लेकर ज्यादा जागरूक न हो लेकिन जो लोग जानते हैं वह इस रोग की गंभीरता को जानते हैं। ये न केवल एक खतरनाक बीमारी है बल्कि इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित होती है। हेपेटाइटिस जैसी गंभीर पर लोगों को जागरूक बनाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन हर साल 28 जुलाई को वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे (World Hepatitis Day) मनाता है, जिसे हिंदी में विश्व हेपेटाइटिस दिवस के रूप में जाना जाता है। हेपेटाइटिस रोग में  किसी व्यक्ति का लिवर प्रभावित होता है। इस रोग में पीड़ित व्यक्ति के लिवर में सूजन आ जाती है, जिसके पीछे कई कारण होते हैं। हेपेटाइटटिस के कारण पीड़ित व्यक्ति के लिवर की कार्यप्रणाली बिल्कुल गड़बड़ा जाती है और धीमे-धीमे लिवर खराब हो जाता है और व्यक्ति की मौत हो सकती है। 

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गुरुग्राम स्थित कोलंबिया एशिया अस्पताल के मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के कंसलटेटर डॉ. आयुष ढींगरा हेपेटाइटिस के बारे में जानकारी देते हुए बताते हैं, " हेपेटाइटिस एक वायरल बीमारी होती है जो एक संक्रमित व्यक्ति में वर्षों तक साइलेंट रह सकती है, यह तब तक साइलेंट रहती है जब तक कि व्यक्ति क्रोनिक स्टेज में नहीं पहुंच जाता। इसके साइलेंट रहने के कारण ही हेपेटाइटिस को ट्रेस करना और ट्रीटमेंट करना दोनों मुश्किल होता है। अधिकांश लोगों को इसके बारे में लीवर के काफी डैमेज होने के बाद पता चलता है। यह महत्वपूर्ण है कि लोग हेपेटाइटिस के लिए टेस्ट कराते रहें, यह न केवल उन्हें मार सकता है, बल्कि उनका खराब लीवर स्वास्थ्य उन्हें COVID इन्फेक्शन के लिए ज्यादा संवेदनशील बना सकता है। 

उन्होंने बताया कि कहा यह जा रहा है कि हेपेटाइटिस के इलाज के लिए बनाई गई एक दवा का कोविड-19 मरीजों में प्रभावकारिता के लिए टेस्ट किया जा रहा है और शुरूआती स्टेज में इसमें सफलता भी मिली। यह एक अच्छी खबर है, लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि भारत में हेपेटाइटिस सी के रोगी कितने हैं यह पता नहीं है। हेपेटाइटिस के लिए एक दवा के साथ COVID -19 मरीजों के इलाज पर ध्यान केंद्रित करने के रूप में इंटरफेरॉन थेरेपी COVID मरीजों की संख्या में वृद्धि कर सकती है, जिससे दुनिया हेपेटाइटिस से फ्री हो सकती है।

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हेपेटाइटिस का इलाज

हेपेटाइटिस से पीड़ित लोग घर पर रहकर भी इलाज प्राप्त कर सकते हैं। रोगियों को अधिक से अधिक प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करना चाहिए। उन्हें आराम के साथ-साथ विटामिंस युक्त आहार या सप्लीमेंट का सहारा भी लेना चाहिए। हेपेटाइटिस के जिन मरीजों को उल्टियां होती हैं या शरीर के किसी हिस्से पर आसामान्य रूप से रक्त का थक्का बनने की परेशानी है उन्हें अस्पताल में ही इलाज कराने की जरूरत है। 

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गुरुग्राम के ही पारस अस्पताल के चीफ ऑफ़ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डॉ. रजनीश मोंगा कहते हैं, “हेपेटाइटिस सी एक वायरल इन्फेक्शन होता है, जो लीवर में सूजन और सिरोसिस (लीवर का निशान) पैदा कर सकता है। यह वायरस गंदे खून, सुई शेयर करने से, सेक्स करने से और टैटू कराने से फैलता है। इसका ट्रीटमेंट न कराने पर यह लीवर में सीरियस डैमेज कर सकता है। यदि किसी व्यक्ति को लास्ट लेवल का लीवर रोग के साथ हेपेटाइटिस सी है, तो उन्हें कोविड-19 से इन्फेक्ट होने का ज्यादा खतरा रहता है। यहां तक कि हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट रोग और डायबिटीज जैसी अन्य कंडीशन के साथ हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी से पीड़ित लोगों को भी कोविड-19 से इन्फेक्ट होने पर गंभीर बीमारी होने का खतरा बढ़ सकता है।”

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उन्होंने कहा कि एडवांस लीवर की बीमारियों वाले लोगों को कोविड-19 से बचने के लिए सतर्कता बरतनी चाहिए। उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करना चाहिए और घर पर रहना चाहिए, लेकिन साथ ही उन्हें टेली या वीडियो कन्सल्टेशन्स के माध्यम से अपने डॉक्टरों के संपर्क में रहना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति पिछले तीन से छह महीनों में डॉक्टर से चेक न कराया हो तो उसे रूटीन लीवर फंक्शन टेस्ट और लीवर कैंसर स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल शुरू करना चाहिए।

हेपेटाइटिस सी का इलाज

हालांकि ऐसी कई कारगर दवाएं हैं, जो हेपेटाइटिस सी जैसे वायरस के इलाज में बेहद सफल साबित हो रही हैं। हेपेटाइटिस सी के लिए ओरल मेडिसिन उलब्ध हैं, जिनमें से अधिकांश टी वायरल दवाएं हैं। इस बात का ध्यान रखें कि इन दवाओं को डॉक्टर की निगरानी में ही लें। ये दवाईयां वायरल को खत्म करने के साथ-साथ लिवर के नुकसान पहुंचाने में कारगर हैं। हालांकि वे मरीज, जो क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी से ग्रस्त हैं, उन्हें ही इलाज कराने की जरूरत होती है। जरूरत पड़ने पर एंटीवायरल दवाएं कई सालों तक खानी पड़ सकती हैं। ये दवाएं हेपेटाइटिस सी के वायरस को खत्म कर सकती हैं।

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