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हेपेटाइटिस ए और बी क्या है ?

विविध By रीता चौधरी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 19, 2013
हेपेटाइटिस ए और बी क्या है ?

हेपेटाइटिस मुख्यतः टाइप 'ए' और टाइप 'बी' इन दो प्रकार का होता है , दोनों हेपेटाइटिस अलग-अलग विषाणुओं से होते हैं, यदि इसका उचित इलाज न हो तो यह पूरे लिवर को खराब कर सकता है।

लिवर (यकृत) पर सूजन आने को हेपेटाइटिस कहते हैं। यह मुख्यतः दो प्रकार टाइप 'ए' और टाइप 'बी' का होता है। हेपेटाइटिस की बीमारी ज्यादातर एक वायरस के कारण होती है, लेकिन कभी-कभी यह बैक्टीरिया के संक्रमण अथवा दवाइयों के साइडइफेक्ट के कारण भी हो सकता है। वायरस के कारण होने वाले हेपेटाइटिस के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, इसलिए इसमें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

 

 

हेपेटाइटिस की दो अवस्थाएं होती हैं, पहली, प्रारंभिक यानि की एक्यूट और दूसरी पुरानी अर्थात क्रॉनिक। हेपेटाइटिस की प्रारंभिक अवस्था शुरू के तीन महीनों तक रहती है। लेकिन यदि छः माहिनों तक इसका इलाज नहीं हो तो यह क्रॉनिक हेपेटाइटिस की रूप ले लेती है। शुरुआती दौर में यदि हेपेटाइटिस के साथ पीलिया हो जाए और इसका उपचार ठीक से न हो तो यह क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी या सी का रूप ले लेती है। और यदि इसके बाद भी इसका उचित इलाज न हो तो यह लिवर सिरोसिस में परिवर्तित हो जाती है जिसके कारण पूरा लिवर खराब हो जाता है। इसके कारण लिवर का कैंसर भी हो सकता है।

 

 

 

क्या है हेपेटाइटिस ए

‘हेपेटाइटिस ए’ एक विषाणु जनित रोग है। इसमें लिवरमें सूजन हो जाती है और ऐसा इस बीमारी के विषाणु के कारण होता है। इसे वायरल हेपेटाइटिस भी कहते हैं। जब लिवर रक्त से बिलीरूबिन को छान नहीं पाता है तो हेपेटाइटिस होता है। हालांकि हेपेटाइटिस के सभी रूपों में हेपेटाइटिस ए सबसे कम गंभीर है। यह संक्रामक रोग है यानी यह रोगी के संपर्क में आने वाले स्वस्थ व्यक्ति को भी अपना शिकार बना सकती है।

 

 

 

Hepatitis A And B

 

 

 


इसका वायरस दूषित पानी से सबसे ज्यादा फैलता है। हर साल भारत में जलजनित बीमारी पीलिया की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या काफी अधिक है। यह बीमारी दूषित खाने व जल के सेवन से होती है। जब नाली का गंदा पानी या किसी अन्य तरह से प्रदूषित हुआ जल सप्लाई के पाइप में मिल जाता है तो एक साथ बहुत से लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं। आमतौर पर यह बीमारी तीन से चार हफ्तों के परहेज और उपचार से ठीक हो जाती है लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए यह बीमारी ज्यादा खतरनाक  होती है। ऐसे में मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा होता है।

 

 

 

 

हेपेटाइटिस ए कैसे हो सकता है



•  हेपेटाइटिस ए संक्रमित व्यक्ति के रक्त के संपर्क में आने से फैल सकता है। उदाहरण के लिए, संक्रमित सुई के इस्तेमाल से।

•  सीपदार मछली खाने से भी यह बीमारी हो सकती है।

दूषित पानी पीने से भी इसका वायरस शरीर में चला जाता है।

 

 

 

 

हैपेटाइटिस ए के लक्षण

 


इसके लक्षण कुछ-कुछ पीलिया रोग जैसे ही होते हैं। इसके मुख्य लक्षण निम्न प्रकार के होते हैं-


 
•    बुखार।  

•    झुरझुरी आना।  

•    भूख न लगना।  

•    खाने को देख जी मिचलाना, उल्टी।  

•    बदन दर्द।

•    सिगरेट पीने वालों को तंबाकू से अरुचि।

•    जब रोग और बढ़ जाता है तो पैरों में सूजन बढ़ जाती है तथा जोड़ों में भी दर्द रहता है।

•    यदि रोग का निदान न हो पाए तो हेपेटाइटिस प्राणघातक हो सकता है। जिस किसी व्यक्ति को हेपेटाइटिस होता है और अगर जिगर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो वैसी हालात में रोगी कोमा में भी जा सकता है।

 

 

 

हैपेटाइटिस ए से बचाव


•    साफ सफाई का विशेष ख्याल रखें और हेपेटाइटिस ए का टीका जरूर लगवाएं।

•    अशुद्ध भोजन व पानी से दूर रहें।

•    शौच आदि से निवृत्त होकर हाथ अच्छी तरह से धोएं।

•    प्रभावित व्यक्ति के रक्त, फेसिस या शरीर के द्रव्यों के संपर्क में आने पर अच्छी तरह से अपने आपको साफ करें।

•    कपड़े बदलने से पहले और बाद में हाथ अच्छी तरह से धोये।

•    भोजन परोसने से पहले हाथ अच्छे से साफ करें।

•    हेपेटाइटिस ए से ग्रस्त लोगों के संपर्क में रहने वाले लोग इम्यून ग्लोब्युलिन जरूर लें।

 

 

 

Hepatitis A And B

 

 

 

क्या है हेपेटाइटिस बी

यह 'बी' टाइप के वायरस से होने वाली बीमारी है। इसे सीरम हेपेटाइटिस भी कहते हैं। यह रोग रक्त, थूक, पेशाब, वीर्य और योनि से होने वाले स्राव के माध्यम से होता है। ड्रग्स लेने के आदि लोगों में या उन्मुक्त यौन सम्बन्ध और अन्य शारीरिक निकट सम्बन्ध रखने वालों को भी यह रोग हो जाता है। विशेषकर अप्राकृतिक संभोग करने वालों में यह रोग महामारी की तरह फैलता है। इस दृष्टि से टाइप 'ए' के मुकाबले टाइप 'बी' ज्यादा भयावह होता है। इस टाइप का प्रभाव लीवर पर ऐसा पड़ता है कि अधिकांश रोगी 'सिरोसिस ऑफ लिवर' के शिकार हो जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक पूरी दुनिया में लगभग दो अरब लोग हेपेटाइटिस बी वायरस से संक्रमित हैं और तकरीबन 35 करोड़ से अधिक लोगों में क्रॉनिक (लंबे समय तक होने वाला) लिवर संक्रमण होता है, जिसकी मुख्य वजह शराब का सेवन है।

 

 

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अल्कोहल एब्यूस एंड एल्कोहलिज्म के एक अनुसंधान से पता चला कि 15 साल से कम उम्र में शराब का सेवन शुरू करने वाले युवाओं में 21 साल की उम्र में शराब पीना शुरू करने वाले किशोरों की तुलना में शराब के आदि होने की संभावना चार गुना तक अधिक होती है। और शराब पीने की इसी आदत के चलते उन्हें कुछ ही महीनों में हेपेटाइटिस बी का शिकार भी बनना पड़ता है।

 

 

 

हेपेटाइटिस बी लक्षण

 


•    त्वचा और आँखों का पीलापन।

•    गहरे रंग का मूत्र।

•    अत्यधिक थकान।

•    उल्टी और पेट दर्द।

 

 

 

हेपेटाइटिस बी के बचाव

 


•    घाव होने पर उसे खुला न छोड़ें। यदि त्वचा कट फट जाए तो उस हिस्से को डिटॉल से साफ करें।

•    शराब ना पिएं।

•    किसी के साथ अपने टूथब्रश, रेजर, सुई, सिरिंज, नेल फाइल, कैंची या अन्य ऐसी वस्तुएं जो आपके खून के संपर्क में आती हो शेयर न करें।

•    नवजात बच्चों को टीका लगावाएं।

 

 

 

 

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