HealthCare Heroes Awards: रमजान में दिनभर PPE किट पहनकर कोविड जांच के लिए सैकड़ों सैंपल इकट्ठा करते थे इमरान

Updated at: Sep 29, 2020
HealthCare Heroes Awards: रमजान में दिनभर PPE किट पहनकर कोविड जांच के लिए सैकड़ों सैंपल इकट्ठा करते थे इमरान

23 साल के इमरान रोजे के दौरान मुंबई भर में घूम-घूम कर कैसे कोविड मरीजों का सैंपल कलेक्ट करते रहे, जानें उनकी जोश और जज्बे से भरी कहानी।

Anurag Anubhav
विविधWritten by: Anurag AnubhavPublished at: Sep 25, 2020

Category : Beyond the call of Duty
वोट नाव
कौन : इमरान इरफान शेख
क्या : कोरोना वायरस जांच के लिए 10 हजार सैंपल कलेक्‍ट किया।
क्यों : अपने जीवन को दांव पर लगाकर की लोगों की सेवा।

मुंबई भारत का सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित शहर रहा है। देशभर में आने वाले कुल 40% के लगभग मामले सिर्फ महाराष्ट्र से सामने आए हैं। ऐसे में मुंबई के फ्रंटलाइन वर्कर्स (हॉस्पिटल स्टाफ, पुलिस कर्मी, डॉक्टर्स, नर्सेज) आदि को कितनी मेहनत करनी पड़ी होगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। सबसे ज्यादा चुनौतियां स्वास्थ्य कर्मियों के सामने थीं, क्योंकि उनके कोरोना मरीज के संपर्क में आकर संक्रमित होने का खतरा सबसे ज्यादा था। लेकिन सभी स्वास्थ्य कर्मियों ने दिन-रात एक करके, भूखे-प्यासे रहकर भी कोरोना मरीजों की मदद की और उन्हें ठीक करने का हर संभव प्रयास किया। ऐसे ही एक कोरोना वारियर हैं मुंबई के इमरान इरफान शेख, जिनकी उम्र महज 23 साल है और ये फ्लेबोटोमिस्ट हैं, यानी लैब्स के लिए टेस्टिंग सैंपल इकट्ठा करना इनका काम है।

इमरान रमजान के महीने में रोजा रखते हुए भी बिना अपनी सेहत की परवाह किए दिनभर पीपीई किट (PPE Kit) पहनकर सैकड़ों संदिग्ध मरीजों के सैंपल कलेक्ट करते रहे, ताकि उनकी जांच हो सके और कोरोना को आगे फैलने से रोका जा सके। इमरान के इसी जज्बे और जोश को देखते हुए Onlymyhealth की तरफ से उन्हें beyond the call of duty काम करने के लिए Frontline Warriors कैटेगरी में Covid warrior अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट कि गया है।

corona warrior imran

क्या है इमरान की कहानी?

इमरान बांद्रा के भाभा हॉस्पिटल में एक प्राइवेट टेस्टिंग लैब  में थायरोकेयर रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर काम करते हैं। 25 मार्च को जब देशभर में पहला लॉकडाउन लगा था, तब इमरान को कोविड-19 से जुड़े काम करने का विकल्प दिया गया था। इमरान खुद 23 साल हैं, उनके घर में हमउम्र भाई-बहन भी हैं और बूढ़े माता-पिता हैं, ऐसे में उनके लिए इस काम को चुनना आसान नहीं था, क्योंकि खतरों को वो स्वयं भी समझते थे। इमरान को बताया गया था कि उन्हें सुरक्षा के लिए खास कपड़े और यंत्र दिए जाएंगे। ऐसे में उनके पिता और चॉल में रहने वाले दूसरे लोगों ने उन्हें प्रोत्साहित ककिया और इमरान इस काम के लिए तैयार हो गए।

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इसके बाद इमरान ने इंटरव्यू क्लियर किया, सेलेक्ट हुए, लेक्चर्स अटेंड किए और SOP की ट्रेनिंग ली, इसके बाद काम शुरू किया। कुल 4 दिनों में ही इमरान ट्रेन हो चुके थे और सैंपल इकट्ठा करने के लिए तैयार थे। इमरान ने ओनलीमायहेल्थ को बताया कि उन्हें पहला सैंपल 2 साल के छोटे से बच्चे का लेना था। ये बस शुरुआत थी। धीरे-धीरे कोरोना फैलना शुरू हुआ, तो इमरान को सैंपल इकट्ठा करने के लिए पूरी मुंबई के अलग-अलग इलाकों में चक्कर लगाने पड़े। कई बार तो क्रूज जहाजों में, पुलिस स्टेशनों में, दूर-दराज के हॉस्पिटल्स और क्लीनिक्स या मरीजों के घर तक जाकर सैंपल लेना पड़ता था। मरीज चाहे सामान्य बीमार हो या बहुत ज्यादा गंभीर स्थिति में हो, इमरान को उनके स्वैब का सैंपल लेना पड़ता था। कई बार तो मृत लाशों का भी सैंपल लेना पड़ा। लेकिन इमरान इन सबसे प्रभावित नहीं हुए। उन्होंने अब तक 10,000 से ज्यादा लोगों का स्वैब सैंपल ले लिया है।

PPE किट में रहना बहुत बुरा एक्सपीरियंस था

इमरान बताते हैं कि उन्हें जब भी एक से दूसरे डिपार्टमेंट में जाना होता, तो पीपीई किट बदलना पड़ता था। पीपीई किट्स को पहना भी अपने आप में इतना मुश्किल भरा काम है- ग्लव्स, N-95 मास्क, PPE गाउन, हेड कैप, चश्मे और इन सबके बार शरीर को पीपीई किट को सील करने के लिए टेपिंग। इमरान बताते हैं कि पर्याप्त सुरक्षा के लिए उन्हें 3-3 ग्लव्स पहनने पड़ते थे। दिनभर में 8-9 घंटे पीपीई किट्स पहने रहना और इस दौरान न कुछ खाना न पानी पीना बहुत मुश्किलों भरा था, उन्हें कई बार सफोकेशन (उबासांसी) होती थी।

रमजान में भूखे-प्यासे करना पड़ता था काम

इमरान ओनलीमायहेल्थ को बताते हैं, "कोविड के दौरान मेरे रमजान के रोजे चल रहे थे। मैं पसीने में इतना भीग जाता था, जैसे बारिश में नहाकर आया हूं। हमारे पास कोई विकल्प नहीं था। भूख और प्यास दोनों लगते थे और कई बार तो पेशाब या टॉयलेट भी परेशान करता था, मगर हम पीपीई किट्स को उतारना तो दूर मास्क को अपने ग्लव्स से छू भी नहीं सकते थे।"

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महामारी के दौरान सामने आईं कई चुनौतियां

कोविड मरीजों का सैंपल कलेक्ट करने में इमरान को बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सबसे पहले तो यही कि बहुत सारे लोग अपनी सोसायटी में पीपीई किट पहने व्यक्ति को घुसने ही नहीं देते थे, क्योंकि लोग डरे हुए थे। इमरान उन्हें समझाते थे तब लोग बहुत मुश्किल से जांच के लिए सैंपल देने को तैयार होते थे। नवजात शिशुओं और नन्हे बच्चों का सैंपल लेने में और भी ज्यादा मुश्किलें आती थीं। खैर सबसे ज्यादा मुश्किल तब होती थी, जब किसी की मौत हो जाती थी।

डॉक्टर बनना चाहते थे इमरान

इमरान के सामने आर्थिक चुनौतियां थी। इमरान के पिता के दोस्त जो कि एक डॉक्टर हैं, इमरान के रोल मॉडल हैं। मेडिकल की पढ़ाई के लिए पैसा नहीं था इसलिए इमरान वो पढ़ाई तो नहीं पढ़ सके, लेकिन हेल्थ केयर में सेवा करने का उनका जज्बा नहीं रोक सके, इसलिए उन्होंने medical laboratory technology (MLT)  में BSc किया और प्लेबोटोमिस्ट बन गए। इमरान कहते हैं, "मुझे लगा कि लोगों की मदद करते हुए आजीविका कमाने का ये एक अच्छा तरीका है।"

अगर आपको इमरान की कहानी अच्छी लगी और इससे कुछ प्रेरणा मिली है, तो आप इमरान को वोट करें और अवॉर्ड जीतने में उनकी मदद करें।

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