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वीडियो: बोर्ड एग्जाम के तनाव से बच्चों को कैसे रखें दूर? जानें एक्सपर्ट की सलाह

Tips for ParentBy Onlymyhealth Editorial Team / 2019-02-22T00:00:00+5:30

परीक्षाएं शुरू होते ही बच्चों में तनाव और अवसाद के मामले बढ़ जाते हैं। तनाव के कारण न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, बल्कि उनके रिजल्ट्स भी खराब हो जाते हैं। जल्द ही 10वीं और 12वीं के बोर्ड एग्जाम शुरू होने वाले हैं। ऐसे में बच्चों को तनाव और डिप्रेशन से बचाने के लिए आप किस तरह बच्चों की मदद कर सकते हैं, बता रही हैं क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. अरुणा ब्रूटा।

परीक्षा से समय बच्चों में तनाव और डिप्रेशन बढ़ जाता है। हम कब मानें कि बच्चा तनाव में है?

हमें इस बात का इंतजार नहीं करना चाहिए कि बच्चे को तनाव होगा तब उसे समझाएंगे। आप अपने बच्चों के स्वभाव और टेम्परामेंट से परिचित हैं। इसलिए बच्चे को समय-समय पर साइकोथेरेपिस्ट और काउंसर्ल्स के पास ले जाते रहें, ताकि तनाव अवसाद में न बदल जाए। किसी भी व्यक्ति के स्वभाव को एक रात में नहीं बदला जा सकता है इसलिए बच्चों को ये बात समझाने में थोड़ा समय लगता है कि अपने आसपास की नकारात्मकता को सकारात्मकता में कैसे बदलें।

बच्चे तनाव से कैसे छुटकारा पा सकते हैं?

पढ़ाई की शुरुआत से ही बच्चों को वर्कशॉप और काउंसिलिंग में बिठाते रहना चाहिए, ताकि उसके पास अपने भविष्य के लक्ष्यों को तय करने और सोचने का समय हो, और बच्चा उन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सही दिशा में शुरुआत से ही मेहनत करे। आमतौर पर परीक्षा के दौरान बच्चे दो तरह से प्रभावित होते हैं।

  • एक यह कि उन्हें परीक्षा से इतना डर लगता है कि वो परीक्षा देना ही नहीं चाहते हैं और पढ़ाई से दूर भागना चाहते हैं।
  • दूसरा यह कि उन्हें परीक्षा के परिणाम या किसी खास सब्जेक्ट से डर लगता है, जिस कारण वो अपनी पढ़ाई ठीक से नहीं कर पाते हैं।

इसीलिए माता-पिता को शुरुआत से ही बच्चे की मदद करनी चाहिए।

क्या दोस्तों से कॉम्पटीशन के कारण भी बच्चों में तनाव बढ़ता है?

हां, टीनएज में दोस्तों का दबाव (पियर प्रेशर) बहुत अधिक प्रभावित करता है। बच्चों की दुनिया में दोस्त बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं। लेकिन यहां मसला ये है कि आपके बच्चे की दोस्ती किस तरह के बच्चों से है और वो दोस्तों की किन बातों से प्रभावित होता है। इसके अलावा यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपका बच्चा दूसरे बच्चों से कितना ज्यादा प्रभावित है। उसी अनुसार उसे तनाव हो सकता है।

माता-पिता आजकल परीक्षा में नंबर पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जबकि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देते हैं। तो पैरेंट्स को आप क्या कहना चाहेंगी?

हमारे देश में ज्यादातर लोग मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करते हैं। जब मां-बाप हर समय सिर्फ नंबर और मार्क्स की बात करते हैं, तो बच्चों को इस बात से चिढ़ होती है। माता-पिता को चाहिए कि बच्चों को पढ़ाई के लिए समझाएं मगर उन्हें खुद अपने मनपसंद विषय चुनने दें और रूचि बनाने दें। मां-बाप के ज्यादा दबाव के कारण परीक्षा के समय बहुत सारे बच्चे अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार हो जाते हैं। बच्चों को यह बताने के बजाय कि वो ज्यादा नंबर लाएं, यह बताना चाहिए कि पढ़ाई में वो दिलचस्पी कैसे जगाएं और किताबों से प्यार कैसे करें।

कुछ बच्चे परीक्षा के दौरान तनाव से बचने के लिए दवाइयों, कॉफी आदि का सहारा लेने लगते हैं। ये सही है या गलत?

ये सरासर गलत है। बच्चे डॉक्टर्स के पास जाकर नींद की दवाएं मांगते हैं। लड़कियां पीरियड्स आगे बढ़ाने के लिए दवाएं खाती हैं। ये सब बहुत हानिकारक साबित होते हैं। इन सबकी जगह तनाव से बचने के लिए म्यूजिक, खेल या मनपसंद बुक्स का सहारा लेना चाहिए।

परीक्षाओं से तुरंत पहले बच्चों के लिए आप क्या टिप्स देंगी?

परीक्षा से एक रात पहले बच्चों को अच्छी तरह सोना चाहिए। एग्जाम पेपर सामने आते ही बच्चों को सबसे पहले पूरा पेपर पढ़ना चाहिए और एक गहरी सांस लेनी चाहिए। इसके बाद सबसे पहले आसान प्रश्नों को हल करना चाहिए, जिनका उत्तर बच्चों को आता हो।

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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