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बाइपोलर डिसऑर्डर से कैसे उभरें

Tips for ParentBy Onlymyhealth Editorial Team / 2016-06-02T00:00:00+5:30
बाइपोलर डिसऑर्डर को मौनिक डिप्रेशन भी कहा जाता है। यह मानसिक रोग की वह स्थिति है जब उसके व्यवहार में तेजी से बदलाव आता है। मन में अत्यधिक उदासी, कार्य में अरुचि, चिड़चिड़ापन, घबराहट, आत्मग्लानि, भविष्य के बारे में निराशा, शरीर में ऊर्जा की कमी, अपने आप से नफ़रत, नींद की कमी, सेक्स इच्छा की कमी, मन में रोने की इच्छा, आत्मविश्वास की कमी लगातार बनी रहती है| मन में आत्महत्या के विचार आते रहते हैं।| मरीज को बिना किसी कारण कानों में आवाजें आने लगती है| मरीज अपने आपको बहुत बड़ा समझने लगता है| मरीज मन में अत्यधिक तेजी के कारण इधर उधर भागता रहता है। इस बीमारी में कई बार व्यक्ति चाहकर भी अपने व्यवहार पर नियंत्रण नहीं रख पाता। आमतौर पर यह बीमारी नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले लोगों में पाई जाती है। इस डिसऑर्डर से बचने के लिए इसके कारणों को जानना बहुत जरूरी होता है। हालांकि बाइपोलर के कारणों को जानना बहुत आसान नहीं होता है पर अगर इस डिसऑर्डर की पहचान हो गई हो तो तुंरत ही इसका इलाज कराए। देरी होने से पूरी संभावना है कि रोगी आत्महत्या करने की ओर प्रेरित हो सकता है। इस इलाज लंबे समय तक चलता है। यह पूरी तरह से ठीक हो जाएगा इस बारे में साफ साफ नहीं कहा जा सकता है। बिना लापरवाही बरते इसकी जांच कराएं या फिर फैसला न कर पाने की स्थिति में डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। थोड़ी सी भी लापरवाही आगे चलकर बड़ी समस्या का सबब बन सकती है।

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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