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काश क‍ि महिलाएं समझ पातीं पुरुषों से जुड़ी ये बातें

पुरुषों को अकसर एक खास नजरिये से देखा जाता है। और महिलायें भी उन्हें उसी रंग में देखना चाहती हैं। लेकिन, ऐसा नहीं होता। पुरुषों की कई ऐसी बातें हैं जो महिलायें न तो समझ पाती हैं और न ही कभी वे उस ओर ध्यान ही देती हैं।

डेटिंग टिप्स By Shabnam Khan Jan 20, 2015

काश कि तुम जान पाती

पुरुषों के बारे में कुछ बातें कितनी आसानी से कह दी जाती हैं। और माना जाता है कि पुरुष ऐसे ही होते हैं, सिम्पल, सीधी बात करने वाले, और आमतौर पर बात को वहीं खत्म करने वाले। वे बात को आगे बढ़ाने में यकीन नहीं रखते। लेकिन पुरुषों से जुड़ी कई ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें महिलायें अकसर समझ नहीं पातीं। पुरुषत्व एक पेचीदा विषय है और हमें उम्मीद होती है कि महिलायें इसे समझ पायें। लेकिन, कई बार पुरुषों को एक खास रंग से पेंट किया जाता है और इस चक्कर में कई अहम पहलु अनदेखे, अनछुए रह जाते हैं। काश कि महिलायें समझ पातीं हम पुरुषों से जुड़ी ये बातें।

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हमें भी पसंद होती है तारीफ

पता नहीं जाने किसने और कब कह दिया कि पुरुषों को तारीफ की जरूरत नहीं होती। खासतौर पर उनके कपड़ों और स्टाइल की अगर तारीफ की जाये तो वे इसे पसंद नहीं करते। उनकी नजर में यह लड़कियों वाली बात हो जाती है। लेकिन हकीकत यह है कि पुरुषों को भी अच्छी नीयत से की गई तारीफ पसंद होती है।

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हम साफ बोलते हैं क्योंकि हमें आपकी परवाह है

बातें घुमानी हमें नहीं आतीं। हम साफ बोलते हैं। और महिलाओं को यह समझना चाहिये। हमारी साफगोई को बुरा नहीं समझना चाहिये। और न ही हम इतने गुस्सैल होते हैं जैसा वे हमें समझती हैं। पुरुष केवल उन लोगों से झूठ बोलते हैं, जो उनके लिए कोई मायने नहीं रखते। हम किसी से क्या बात करते हैं यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि आखिर वह हमारे लिए कितना मायने रखता है। लेकिन, आप इस मामले में लकी हैं। आपके साथ बात करते हुए हम औपचारिकताओं को बिलकुल भी जगह नहीं देते। हम आपसे किसी भी विषय पर खुलकर बात कर सकते हैं। फिर चाहे वह आपके भाई का व्यवहार हो या फिर कोई ऐसा दोस्त जो बहुत ज्यादा तवज्जो चाहता है। पुरुषों के लिए किसी भी रिश्ते में ईमानदारी बहुत मायने रखती है। लेकिन आखिर में उसे इसी ईमानदारी का खमियाजा भी भुगतना पड़ता है। और जैसे जैसे ईमानदारी हमारे लिए परेशानी का सबब बनती जाती है, हम खुद को खोल में बंद करना शुरू कर देते हैं और यह बात किसी भी रिश्ते के लिए अच्छी बात नहीं होती।

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हमारी विश्वसनीयता की तारीफ करें

ईमानदारी की ही तरह पुरुष आपकी ओर अपनी कमिटमेंट को भी दिखाने में यकीन रखते हैं। तो हमें बहुत बुरा लगता है जब हमें यह पता लगता है कि आपको कोई ऐसा इनसान पसंद है जो हवाई बातें करने और झूठे ख्वाब दिखाने में यकीन रखता है। वह आपके पास तो होता है, लेकिन आपके साथ नहीं। और ऐसे में पुरुषों को लगने लगता है ऐसे लड़के फायदे में रहते हैं। लड़कियां उन्हें अधिक तवज्जो देती हैं और ऐसे लोगों के साथ वक्त बिताना उन्हें पसंद होता है। और ऐसे में हम भी उनके जैसा ही बनना चाहते हैं। और यह आप दोनों के लिए अच्छा नहीं है, क्योकि जो ख्वाब दिखाये जाते हैं, वे अकसर पूरे नहीं होते और फिर आपका रिश्तों से ही मोहभंग हो जाता है। और ऐसा होना तो कतई सही नहीं माना जा सकता।

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प्यार का मतलब पिछलग्गू बनना नहीं

बेशक, हमें साथ वक्त बिताना पसंद होता है। हम उस वक्त की कदर भी करते हैं। अपने रिश्ते को स्वीकार करने में हमें कोई हर्ज नहीं होता। हमें यह कहने और मानने में गुरेज नहीं कि प्यार अनंत है और यह रोज बढ़ता जाता है। लेकिन इसके साथ ही हम अपने लिए बिताये जाने वक्त की भी अहमियत को जानते हैं। हमारा मानना है कि खुद के लिए बिताया वक्त आपको बेहतर इनसान बनाता है। और इससे हमारा रिश्ता भी बेहतर बनता है। सीधे शब्दों में कहें तो वीकएंड पर अपने दोस्तों के साथ समय बिताने से हमारे बीच का रिश्ते की कड़ी कमजोर नहीं हो जाती। जैसे महिलाओं को अपनी सहेलियों के साथ वक्त बिताना पसंद होता है, लड़के भी अपने दोस्तों के साथ वक्त बिताकर सुकून महसूस करते हैं। इस तरह वक्त बिताकर हम तरोताजा महसूस करते हैं और इससे हमारा रिश्ता और मजबूत होता है।

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हम करते हैं आपके दोस्तों का सम्मान

यह दुख की बात है कि आज के दोर में समानता को गलत अर्थों में भी लिया जाने लगा है। हमसे उम्मीद की जाती है कि हम सभी की अच्छी बुरी आदतों को स्वीकार करें। पुरुष अधिक कामुक हो सकते हैं और महिलाओं का व्यवहार भी कई बार भौंडा हो सकता है। कोई भी सही दिमाग वाला पुरुष नहीं चाहेगा महिलायें अपने अधिकारों को भूल जायें और पिछली सदी के नियम कायदों के हिसाब से अपनी जिंदगी बितायें। और न ही नारीवाद से मुक्ति चाहते हैं। और न ही हम ऐसी चीजों को स्वीकार करने ते झिझकते हैं जो तुम्हें हमसे अलग करती हें। हम मानते हैं कि एक दूसरे से जरा अलग होना अच्छा रहता है। सब कुछ एक जैसा होना भी सही नहीं।

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हमारी प्रतिबद्धता हमारे लिए है

महिलाओं को सबसे बड़ी शिकायत यह होती है कि पुरुष कमिट नहीं करते। अब आप इसे सही मानें या गलत, लेकिन पुरुष मानते हैं कि कामयाब जिंदगी के लिए आत्म संतुष्टि होना बहुत जरूरी है। लेकिन, रिश्तों के मामले में यह बात विरोधाभासी लग सकती है। इससे पुरुष थोड़ा नर्वस हो सकते हैं जिससे उनकी खुशी का रास्ता थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन, साथ ही उन्हें यह समझने में भी वक्त नहीं लगता कि सच्ची खुशी तो किसी दूसरे के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने से ही मिलती है। और फिर यही हमारा जुनून बन जाता है। और इस तरह की सोच आपको हमारी खुशी में साझेदार बनाती है।

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जो देखते है उसी पर होता है यकीन

क्या आपको कभी इस बारे में सोचा है कि आखिर पुरुषों को खेल क्यों पसंद होते हैं। और खेल खत्म होने के बाद वे उसके बारे में घंटों बहस कर सकते हैं। कोई एथलीट अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए कितनी कड़ी मेहनत करता है। कोई अटूट रिश्ते की पहचान होती है। इन बातों में आप आंकड़े नहीं ला सकते और ऐसे में पुरुष इन मुद्दों पर बहस करने से बचते हैं जहां जीत मिलनी जरा मुश्किल हो। शायद आपने कभी ध्यान न दिया हो, लेकिन हमें हार से नफरत होती है। हार का डर उसके मन से बाहर निकालने के लिए महिलाओं को उन मुद्दों पर पुरुषों का साथ देना चाहिये जो उनके लिए भावनात्मक रूप से मायने रखते हैं। याद रखिये जहां पुरुष भावनात्मक रूप से अधिक संतुष्ट महसूस करते हैं, वे वहां अपना सब कुछ लुटा देते हैं।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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