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रिश्‍ते में दस बातों पर महिलाओं को होता है अफसोस

किसी रिश्‍ते के सकरात्‍मक और नकारात्‍मक दोनों पहलू होते हैं, जीवनभर साथ निभाने वाले इस रिश्‍ते में आप कुछ बातें बोल नहीं पाती हैं जिसका अफसोस आपको हमेशा रहता है।

डेटिंग टिप्स By Nachiketa SharmaDec 30, 2014

रिलेशनशिप में जब होता है अफसोस

प्रत्‍येक रिलेशनशिप के सकारात्‍मक और नकारात्‍मक दोनों पहलू होते हैं, उतार और चढ़ाव के बीच जी जिंदगी की पटरी आगे बढ़ती है। जीवनभर का साथ निभाने वाले इस रिश्‍ते में कुछ बातें आप अपने पार्टनर से अच्‍छे से कह पाती हैं और कुछ बातों को कहने में आपको संकोच होता है। क्‍योंकि आप अपने और पार्टनर के बीच में सही तरीके से तालमेल नहीं बिठा पाती हैं और जब भी आप बाद में तुलना करती हैं तब आपको अफसोस होता है। यही छोटी-छोटी बातें बाद में तनाव का कारण भी बन जाती हैं। इसलिए इन बातों पर समय रहते ही ध्‍यान दे देना चाहिए ताकि बाद में पछतावा न हो।

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अकेलापन दूर होना

शादी के बाद कुछ दिनों तक महिलायें अपने अकेलेपन यानी पुराने जीवन में जीना पसंद करती हैं। कई बार तो सही मेल न मिलने के बाद भी समझौता करना पड़ता है और समय के साथ तालमेल भी बिठा लिया जाता है। स्थिति चाहे जो भी हो लेकिन परिस्थिति से समझौता करना ही बेहतर है। इसलिए जितना जल्‍दी हो सके अपने रिश्‍ते को स्‍वीकार कर उसमें तालमेल बिठा लिया जाये।

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प्‍यार का इजहार न करना

रिलेशनशिप में ताजगी बनाये रखने के लिए जरूरी है कि समय-समय पर प्‍यार का इजहार होता रहे। लेकिन रिश्‍ते में महिलायें प्‍यार का इजहार करने में पीछे रह जाती हैं। पुरुष कई बार इस बात की शिकायत भी करते हैं कि उनकी पार्टनर की तरफ से प्‍यार कम हो रहा है क्‍योंकि वो प्‍यार का इजहार नहीं कर रही है। समय बीतने के साथ महिलाओं को भी इस बात का अफसोस होता है, कि वे प्‍यार के उन तीन जादुई शब्‍दों को बोलने में कोताही बरतती हैं।

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निर्धारित भूमिका निभाना

रिलेशनशिप में पड़ने के बाद महिलायें अपनी भूमिका निर्धारित कर लेती हैं, उनको लगता है कि उनकी जिंदगी खाना पकाने, साफ-सफाई करने, बच्‍चों की देखभाल सहित घर के दूसरे काम करने तक ही सीमित है। इन सबके बीच जीवन के अन्‍य पहलुओं जैसे बाहर घूमना, पार्टी करना, छुट्टियां मनाने यात्रा पर जाने वाली बातों से खुद को दूर कर लेती हैं। बाद में उनको इस बात का अफसोस होता है।

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रिश्‍ते की तुलना करना

आपका रिश्‍ता उतना खराब नहीं है जितना आप उसे समझती हैं, क्‍योंकि रिश्‍ते को निभाने का तरीका सबका अलग-अलग हो सकता है। गलतफहमी तभी शुरू होती जब आप अपने रिलेशन की तुलना दूसरों से करने लगती हैं। तुलना करने के बाद ही आप उसमें कमी निकालती हैं और यही तनाव और झगड़े का कारण बनता है। इसलिए रिश्‍ते को बेहतर बनाने के लिए अपने प्‍यार की तुलना किसी से न करें, बल्कि इसे अपने तरीके से निभायें।

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खुद की बात न रखना

भारतीय समाज पुरुषवादी सोच से परिपूर्ण है और महिलायें भी इस बात को स्‍वीकार करती हैं, इसलिए अपने पुरुष पार्टनर द्वारा लिये गये किसी भी निर्णय को वे आसानी से स्‍वीकार कर लेती हैं। कई बार तो वे अपने लिए भी नहीं सोचती हैं और अपनी बात भी चाहकर अपने पार्टनर के सामने नहीं रख पाती हैं। इस बात का अफसोस उनको हमेशा होता है।

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आलोचना न करना

किसी भी रिश्‍ते को सच्‍चाई के साथ निभाना सही है, इससे आपके बीच प्‍यार बना रहता है और रिश्‍ते में गहराई भी आती है। लेकिन किसी भी बात की अति अच्‍छी नहीं होती है और यह बात में गलतफहमी और झगड़े का कारण भी बनती है। इसलिए अपने पार्टनर की हर बात पर तारीफ ही न करें, जब भी आपको लगे कि वो गलत कर रहे हैं, उनकी बात का विरोध करें।

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साथ व्‍यायाम न करना

स्‍वस्‍थ शरीर में स्‍वस्थ दिमाग निवास करता है, यह कहावत शायद आपने सुनी भी हो। शरीर को स्‍वस्‍थ रखने के लिए व्‍यायाम करना बहुत जरूरी है, नियमित व्‍यायाम करने से शरीर के साथ रिले‍शन भी स्‍वस्‍थ रहता है। लेकिन व्‍यायाम तब और भी स्‍वस्‍थ हो जाती है जब आप अपने पार्टनर के साथ व्‍यायाम करें। लेकिन महिलायें स्‍वयं व्‍यायाम नहीं करती हैं और पुरुषों को व्‍यायाम के लिए उकसाती हैं।

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दोश्‍तों से तालमेल की कमी

आपके पार्टनर के कई ऐसे दोस्‍त होंगे जो अच्‍छे कपल हैं, वे लोग अक्‍सर आपके घर आते हैं और आप भी उनके घर जाती हैं। लेकिन अब तक आप उनके साथ सही तरीके से तालमेल नहीं बिठा पायी हैं। जब भी आपके पार्टनर के दोस्‍तों के बीच बाहर जाने की योजना बनती है आपको अफसोस होता है, क्‍योंकि आप उसके लिये तैयार नहीं होती हैं।

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समस्‍यायें न बताना

खुशियां हमेशा बनी नहीं रह सकती हैं, अक्‍सर आप किसी न किसी समस्‍या से जूझती हैं। लेकिन आप अपनी समस्‍या को पार्टनर से छुपाती हैं, क्‍योंकि आपको लगता है इससे वे परेशान हो जायेंगे। लेकिन आपके पार्टनर को अधिक समस्‍या तब होती है जब आपको वे दुखी देखते हैं या फिर आपकी समस्‍या की जानकारी किसी दूसरे के जरिये पता चलती है। इसलिए अपने पार्टनर से खुशियों के साथ गम भी बांटें।

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सराहना न करना

जब भी आप अपने पार्टनर कि तारीफ करती हैं, उसकी किसी बात की सराहना करती हैं तब उसका उत्‍साह तो बढ़ता ही है साथ ही खुशी भी मिलती है। लेकिन जब भी वे आपके लिए कुछ करते हैं और आप उनकी हौसला अफजाई तो इससे उनका उत्‍साह कम होता है। बाद में आप इस बात पर अफसोस भी जताती हैं। इसलिए जब भी वो आपके लिए कुछ करें उनकी सराहना करने में पीछे न रहें।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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